लखीमपुर खीरी। नर्सिंग होम और अस्पतालों में 24 घंटे व सातों दिन बेहतर इलाज की सुविधा का दावा किया जाता है। मगर इनकी हकीकत इलाज के दौरान पता चलती है। कुछ निजी अस्पतालों में न तो योग्य चिकित्सक मिलते हैं और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। एक निजी अस्पताल में डीपीआरओ (जिला पंचायत राज अधिकारी) की पत्नी के उपचार से मना कर दिया। डीपीआरओ ने सीएमओ को शिकायती पत्र लिखा है।
डीपीआरओ ने बताया कि उनकी पत्नी 28 मार्च की रात को इलाज के लिए छाउछ स्थित एक निजी अस्पताल पहुंची थी। रात में वहां शटर बंद मिला। करीब 15 मिनट बाद अंदर से निकले चौकीदार ने स्टाफ का न होना बताया। उन्होंने बताया कि एक अप्रैल को पत्नी का इलाज सिविल अस्पताल में कराया। मगर, उसी दिन शाम को फिर से पत्नी का स्वास्थ्य बिगड़ गया। घर से नजदीक होने के कारण उसी नर्सिंग होम पर इलाज के लिए ले जाया गया। मगर, मौजूद प्रबंधक ने कहीं और इलाज कराने की बात कहकर उपचार करने से मना कर दिया।
डीपीआरओ का कहना है कि अस्पताल के गेट पर 24 घंटे सातों दिन इलाज का बोर्ड टंगा है। फिर भी अस्पताल प्रशासन अपने चिकित्सीय दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रहा है। उन्होंने सीएमओ को शिकायती पत्र भेजकर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
छाउछ में गोला रोड स्थित एक निजी अस्पताल के गेट पर 24 घंटे उपचार मिलने का दावा किया जाता है। मगर, रात में मरीजों को देखा तक नहीं जाता है। इसलिए सीएमओ को शिकायती पत्र लिखा है। इससे अस्पताल प्रशासन की मनमानी पर अंकुश लगे और मरीजों को इलाज मिले।
- सौम्यशील सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी
जिला पंचायत राज अधिकारी ने एक निजी अस्पताल की शिकायत की थी। मगर, अस्पताल प्रबंधक ने माफी मांग ली है। इससे मामला ही खत्म हो गया।
डॉ. मनोज अग्रवाल सीएमओ