Lakhimpur Kheri : तीन डॉक्टर, फिर भी रेफरल अस्पताल बना पसगवां सीएचसी

𝐤𝐮𝐬𝐡𝐚𝐥 𝐕𝐞𝐫𝐦𝐚
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चिकिसाधिकारियों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी से जूझ रहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

पसगवां। कोरोना काल जैसे मुश्किल वक्त में विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) महज रेफरल अस्पताल बना हुआ है। यहां तीन डॉक्टर तैनात हैं। अधिकांश समय वह अनुपस्थित रहते हैं, जिससे आसपास के मरीजों को साधारण इलाज भी नहीं मिल पा रहा है।

सीएचसी में चिकित्साधिकारी डॉ. अखिलेश त्रिपाठी दिसंबर 2018 से लखनऊ में अटैच हैं। चिकित्साधिकारियों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी के कारण सीएचसी का स्वास्थ्य ढांचा चरमरा गया है। स्त्री रोग विशेषज्ञ और सर्जन न होने के कारण प्रसूताओं को बेहद परेशानी होती है। प्रसूताओं को समुचित सुविधाएं न मिलने से कुछ आशा बहुएं उन्हें निजी अस्पतालों में ले जाती हैं, जहां उनका आर्थिक दोहन होता है।

यहां नेत्र चिकित्सक हैं, लेकिन उपयोग लायक उपकरण नहीं हैं। एक्सरे मशीन अजबापुर चीनी मिल ने उपलब्ध कराई हैं, लेकिन उसे संचालित करने वाला कोई नहीं है। गंभीर रोगों के इलाज की व्यवस्था न होने के कारण सीएचसी से मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। न तो दवाएं हैं और न ही डॉक्टर। कोरोना काल में क्षेत्र के लोग इलाज को भटकने को मजबूर हैं। यह पद हैं रिक्त स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ, चीफ फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वॉय, सफाई कर्मचारी, चौकीदार।

नहीं रहते ड्यूटी पर

डॉक्टर और फार्मासिस्ट की ड्यूटी के रोस्टर बने हैं। रोस्टर के अनुसार ड्यूटी करने के बाद स्वास्थ्य कर्मी बिना अनुमति मुख्यालय छोड़कर चले जाते हैं।

सिर्फ प्रसव की सुविधा

रात में इलाज के नाम पर प्राथमिक उपचार कर गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। सिर्फ प्रसव की सुविधा है। हर रोज 100 कोरोना जांच सीएचसी में पूरे क्षेत्र की 109 ग्राम पंचायतों के स्तर पर सिर्फ यहीं कोरोना जांच हो रही है। गांवों में कोई जांच की सुविधा नहीं है।

मुल्लापुर की नव निर्वाचित प्रधान सविता मिश्रा का कहना है कि प्रसूताओं की सुविधा के लिए महिला चिकित्सक और सर्जन की कमी को पूरा किया जाए। गांवों में बने स्वास्थ्य उपकेंद्रों का संचालन मानक के अनुसार किया जाए। इसके लिए वह विभाग से पत्राचार करेंगी। नयागांव किशोरी के प्रधान सर्वेश कुमार का कहना है कि सीएचसी में मरीजों के तीमारदारों के रहने के लिए रैन बसेरों की व्यवस्था की जाए। अच्छी दवाएं उपलब्ध कराई जाएं।

सीएचसी अधीक्षक डॉ. अश्विनी कुमार वर्मा का कहना है कि समस्याओं के संबंध में विभागीय अधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत कराया जा चुका है। सीएचसी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दोहरी प्रशासनिक व्यवस्था होने के कारण उन्हें सहयोग नहीं मिल पाता है। सीएचसी को गोद लेने के लिए किसी माननीय ने नहीं बढ़ाए हाथ
पसगवां। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आह्वान के बावजूद किसी माननीय ने पसगवां सीएचसी को गोद लेने के लिए हाथ आगे नहीं बढ़ाए हैं।

पसगवां क्षेत्र में सत्तारूढ़ दल के एक सांसद और दो विधायक तथा सपा के एक विधान परिषद सदस्य हैं। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए सीएचसी को गोद लेने का जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया है, लेकिन एक सप्ताह बाद भी किसी माननीय ने पसगवां सीएचसी को गोद नहीं लिया है। संवाद

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