सीएचसी में बेड पड़े हैं खाली, सिर्फ कोरोना की जांच और किया जा रहा है टीकाकरण
महेवागंज/सुंदरवल। ग्रामीण इलाकों की सेहत को संभालने का जिम्मा जिन सीएचसी/ पीएचसी पर था, कोरोना काल जैसे मुश्किल हालात में वह सिर्फ सफेद हाथी बनी नजर आ रही हैं। फूलबेहड़ सीएचसी अस्पताल में बेड खाली पड़े हैं, लेकिन वहां मरीजों का इलाज नहीं, बल्कि सिर्फ कोरोना की जांच और टीकाकरण ही हो रहा है।
फूलबेहड़ सीएचसी में कहने को तीन महिला डॉक्टर समेत सात डॉक्टर हैं, लेकिन अस्पताल अभी डॉक्टर आशीष वर्मा के भरोसे चल रहा है, जबकि सीएचसी अधीक्षक संक्रमित होने की वजह से आइसोलेट हैं। सीएचसी में स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट समेत कुल 19 लोगों का मेडिकल स्टाफ है।
एक हजार से ज्यादा गांवों को जोड़ने वाली फूलबेहड़ सीएचसी में सन्नाटा पसरा है। मरीजों को दवाओं तक के लाले हैं, जबकि जांच मशीनें धूल फांक रही हैं। सीएचसी में नेत्र और ईएनटी डॉक्टर के अलावा बाल रोग विशेषज्ञ भी नहीं हैं। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं रामभरोसे ही हैं। सामान्य दिनों में ढाई से तीन सौ मरीज आते थे, लेकिन ओपीडी बंद होने से अब इक्का दुक्का मरीज ही दिखाई देते हैं, वह भी ओपीडी बंद देखकर काउंटर से ही बैरंग हो जाते हैं। बरसात के दिनों में बाढ़ ग्रस्त इलाके में संक्रामक बीमारियों से निपटना स्वास्थ्य विभाग के लिये चुनौतीपूर्ण है।
सीएचसी पर लग चुके हैं 532 लोगों को टीके
अस्पताल में इन दिनों कोरोना टीकाकरण और सिर्फ जांच चल रही है। एक मई से अब तक 532 लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है। अप्रैल और मई में सामान्य बीमारी के 235 मरीज देखे गए हैं, जबकि हर दिन करीब 200 लोगों की कोरोना जांच हो रही है।
इन गांवों का बुरा हाल
क्षेत्र के महेवागंज, खम्बारखेड़ा और बुढ़नापुर में ही करीब 50 से ज्यादा सक्रिय केस हैं। वहीं, बसहा माफी और करदईयामानपुर में बुखार खांसी से 30 लोग प्रभावित मिले हैं। डॉक्टर आशीष वर्मा का कहना है कि निगरानी टीम मरीजों को दवाइयां दे रही हैं।
सीएसची में रात के समय इलाज के लिए कोई महिला डॉक्टर नहीं रुकती हैं। इमरजेंसी में फोन कर महिला डॉक्टर को बुलाया जाता है। नर्स ड्यूटी के अनुसार रुकती हैं।
दवा न होने की बात कहकर टाला
सीएचसी पर अपनी पांच माह की पुत्री की दवा लेने पहुंचीं पिंकी निवासी जगन्नाथपुरवा ने बताया कि स्टाफ ने दवा न होने की बात कही, फिर काफी जोर-दबाव पर दवा दी गई।
पर्चा काउंटर बंद मिला, मायूस लौट रहे अस्पताल से
राजापुर निवासी छोटन्ने बेग ने बताया कि फूलबेहड़ अस्पताल में दवा लेने गए थे, लेकिन पर्चा काउंटर बंद मिला। मजबूरन लौटकर निजी क्लीनिक पर दवा लेनी पड़ी।
आंख, नाक, कान का कोई डॉक्टर न होने से समस्याएं हो जाती हैं। साफ सफाई ,पेयजल की पूरी व्यवस्था है। ओपीडी बंद होने के बाद भी जो मरीज आ रहे हैं, मानवता के नाते उनका इलाज हो रहा है। कोशिश की जा रही है कि किसी भी प्रकार की कोई समस्या न आने पाए। - आशीष वर्मा, कार्यवाहक अधीक्षक, सीएचसी फूलबेहड़फूलबेहड़ सीएचसी में ओपीडी बंद होने से एक हजार से ज्यादा गांवों के लोग प्रभावित
सीएचसी में बेड पड़े हैं खाली, सिर्फ कोरोना की जांच और किया जा रहा है टीकाकरण
महेवागंज/सुंदरवल। ग्रामीण इलाकों की सेहत को संभालने का जिम्मा जिन सीएचसी/ पीएचसी पर था, कोरोना काल जैसे मुश्किल हालात में वह सिर्फ सफेद हाथी बनी नजर आ रही हैं। फूलबेहड़ सीएचसी अस्पताल में बेड खाली पड़े हैं, लेकिन वहां मरीजों का इलाज नहीं, बल्कि सिर्फ कोरोना की जांच और टीकाकरण ही हो रहा है।
फूलबेहड़ सीएचसी में कहने को तीन महिला डॉक्टर समेत सात डॉक्टर हैं, लेकिन अस्पताल अभी डॉक्टर आशीष वर्मा के भरोसे चल रहा है, जबकि सीएचसी अधीक्षक संक्रमित होने की वजह से आइसोलेट हैं। सीएचसी में स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट समेत कुल 19 लोगों का मेडिकल स्टाफ है।
एक हजार से ज्यादा गांवों को जोड़ने वाली फूलबेहड़ सीएचसी में सन्नाटा पसरा है। मरीजों को दवाओं तक के लाले हैं, जबकि जांच मशीनें धूल फांक रही हैं। सीएचसी में नेत्र और ईएनटी डॉक्टर के अलावा बाल रोग विशेषज्ञ भी नहीं हैं। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं रामभरोसे ही हैं। सामान्य दिनों में ढाई से तीन सौ मरीज आते थे, लेकिन ओपीडी बंद होने से अब इक्का दुक्का मरीज ही दिखाई देते हैं, वह भी ओपीडी बंद देखकर काउंटर से ही बैरंग हो जाते हैं। बरसात के दिनों में बाढ़ ग्रस्त इलाके में संक्रामक बीमारियों से निपटना स्वास्थ्य विभाग के लिये चुनौतीपूर्ण है।
सीएचसी पर लग चुके हैं 532 लोगों को टीके
अस्पताल में इन दिनों कोरोना टीकाकरण और सिर्फ जांच चल रही है। एक मई से अब तक 532 लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है। अप्रैल और मई में सामान्य बीमारी के 235 मरीज देखे गए हैं, जबकि हर दिन करीब 200 लोगों की कोरोना जांच हो रही है।
इन गांवों का बुरा हाल
क्षेत्र के महेवागंज, खम्बारखेड़ा और बुढ़नापुर में ही करीब 50 से ज्यादा सक्रिय केस हैं। वहीं, बसहा माफी और करदईयामानपुर में बुखार खांसी से 30 लोग प्रभावित मिले हैं। डॉक्टर आशीष वर्मा का कहना है कि निगरानी टीम मरीजों को दवाइयां दे रही हैं।
सीएसची में रात के समय इलाज के लिए कोई महिला डॉक्टर नहीं रुकती हैं। इमरजेंसी में फोन कर महिला डॉक्टर को बुलाया जाता है। नर्स ड्यूटी के अनुसार रुकती हैं।
दवा न होने की बात कहकर टाला
सीएचसी पर अपनी पांच माह की पुत्री की दवा लेने पहुंचीं पिंकी निवासी जगन्नाथपुरवा ने बताया कि स्टाफ ने दवा न होने की बात कही, फिर काफी जोर-दबाव पर दवा दी गई।
पर्चा काउंटर बंद मिला, मायूस लौट रहे अस्पताल से
राजापुर निवासी छोटन्ने बेग ने बताया कि फूलबेहड़ अस्पताल में दवा लेने गए थे, लेकिन पर्चा काउंटर बंद मिला। मजबूरन लौटकर निजी क्लीनिक पर दवा लेनी पड़ी।
आंख, नाक, कान का कोई डॉक्टर न होने से समस्याएं हो जाती हैं। साफ सफाई ,पेयजल की पूरी व्यवस्था है। ओपीडी बंद होने के बाद भी जो मरीज आ रहे हैं, मानवता के नाते उनका इलाज हो रहा है। कोशिश की जा रही है कि किसी भी प्रकार की कोई समस्या न आने पाए। - आशीष वर्मा, कार्यवाहक अधीक्षक, सीएचसी फूलबेहड़