लखीमपुर: ईद के त्योहार से बच्चों में खुशी साफ देखने को मिलने लगती थी। उनके जहन में सिर्फ नए-नए कपड़े और खाने पीने की चीजें चलने लगती थी लेकिन, इस महामारी ने बच्चों से सब कुछ छीन लिया है। शहर में लॉकडाउन होने से दुकानें बंद हैं लेकिन, चोरी-छिपे बिक रहे कपड़ों से महंगाई भी बढ़ी है। जो संसाधन से समर्थ हैं, वह लोग खरीदारी कर रहे हैं। जो लोग कमाने वाले हैं, वह अपने बच्चों को दिलासा देते नजर आ रहे हैं।
कर्फ्यू के दौरान खासकर रेडीमेड कपड़ा, ज्वैलरी, आर्टिफिशियल ज्वैलरी व जूते के कारोबारियों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। ईद उल फितर पर कारोबार की तैयारी को लेकर व्यापारी एक से दो माह पहले से तैयारियां शुरू कर देते हैं लेकिन, इस बार कोरोना का कहर इस कदर है कि व्यापारी अपने घर से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं।ईद को लेकर जहां एक ओर मुस्लिम समाज के लोग काफी समय से खुशियां मनाने के लिए तैयारियां कर लेते हैं। वहीं कारोबारी भी इस त्योहार पर हर वर्ष अच्छी खासी सेल को लेकर तैयारियां कर लेते हैं। इस बार कोरोना की लहर ने सभी कारोबारियों को घर से बाहर नहीं निकलने के लिए मजबूर कर दिया है। कोरोना ने सब बर्बाद कर दिया
चूड़ी की बिक्री करने वाले इस्माइल कहते हैं इस बार बाहर से त्योहार के दौरान अच्छी और नई डिजाइन समेत चमक धमक वाली चूड़ियां मंगाई गई थी। इनकी डिमांड काफी बढ़ गई थी लेकिन, कोरोना कर्फ्यू लगने से काफी नुकसान हुआ है। टेलर नरेश राठौर कहते हैं कि त्योहार पर काफी दिन पहले से ही लोग तरह-तरह के कपड़े सिलवाने के लिए डाल देते थे। अच्छी इनकम भी होती थी लेकिन, इस महामारी ने सब बर्बाद कर दिया। व्यापारी लाला ने बताया कि लोग त्योहार पर नए डिजाइन में आरामदायक चप्पल जूते समेत सैंडल मंगवाते थे। जिनसे बिक्री करके कमाई होती थी, घर का खर्च दुकान का किराया भी निकल आता था लेकिन, इस बार तो घर का खर्च भी चलाना मुश्किल है।