Lakhimpur Kheri :गांवों में पंचायत भवनों को क्वारंटीन सेंटर बनाने की राह आसान नहीं

𝐤𝐮𝐬𝐡𝐚𝐥 𝐕𝐞𝐫𝐦𝐚
ज्यादातर पंचायत भवन दूसरों के कब्जे में, कई हो चुके हैं खंडहर तो कई अभी अधूरे
आधी तैयारी के साथ सरकार की मंशा पर अधिकारी कैसे उतरेंगे उम्मीदों पर खरे

एक नजर
412 पंचायत भवन अधूरे
753 पंचायत भवन बने

लखीमपुर खीरी। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की भविष्यवाणी के बाद सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से बेहतर करने के लिए पंचायत घरों में क्वारंटीन सेंटर बनाने के निर्देश दिए हैं। दुविधा यह है कि ज्यादातर पंचायत भवन दूसरों के कब्जे में हैं, कई बने ही नही हैं और कहीं कहीं वह खंडहर हो चुके हैं। ऐसे में प्रशासन को सरकार के इस निर्देश पर खरा उतरना मुुुश्किल लग रहा है।
कुछ साल पहले पंचायत घरों को मिनी सचिवालय के तौर पर विकसित करने के निर्देश दिए गए थे, जहां पर ग्रामीणों की सुविधा के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जानी थी, यह योजना अभी तक फ्लाप रही है, लेकिन जनपद में करीब 1600 सक्रिय मरीजों की संख्या को देखते हुए पंचायत घरों को क्वारंटीन सेंटर बनाया जाना है, जिससे संक्रमितों के परिवार अलग रखे जा सकें।

खासकर जिन घरों में एक ही शौचालय और बाथरूम है तो ऐसे परिवार के संक्रमित व्यक्ति को पंचायत भवन में बने क्वारंटीन सेंटर पर रखा जाएगा, लेकिन इस वक्त कहीं पंचायत घरों पर दूसरे विभागों का कब्जा है, तो कहीं वह जर्जर पड़े हैं। 412 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन निर्माणाधीन हैं, जबकि 753 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन बने हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए यह राह आसान नहीं है। यहां बता दें कि जिन गांवों में पंचायत भवन बने हैं तो उनमें दूसरों का कब्जा हटवाने के लिए पंचायत विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है।
डीपीआरओ सौम्य शील सिंह ने इस संबंध में सभी एडीओ पंचायत को निर्देश जारी कर क्वारंटीन सेंटर बनाने के लिए आवश्यक तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही दूसरे के कब्जे वाले और जर्जर पंचायत भवनों की सूची मांगी है।
मितौली के पंचायत भवन पर बीआरसी का कब्जा
मितौली ग्राम पंचायत के पंचायत भवन पर बेसिक शिक्षा विभाग के ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी) का करीब आठ साल से कब्जा है। जब से मितौली में तहसील स्थापित हुई, जिसके बाद से पंचायत घर में बीआरसी का कार्यालय संचालित हो रहा है। ऐसी दशा में यहां क्वारंटीन सेंटर बनाना पंचायत विभाग के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा, जबकि ब्लॉक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत होने के साथ ही इसकी आबादी करीब 25 हजार है।

कुकरा के पंचायत भवन में बंधे हैं पशु
कुकरा। ब्लॉक बांकेगंज की ग्राम पंचायत कुकरा में गांव के लोगों ने ही पंचायत भवन पर अवैध रूप से अपना कब्जा कर रखा है। कुछ दबंग किस्म के लोगों ने जानवर बांधना, भूसा भरना, डनलप आदि खड़ा कर कब्जा कर रखा है। ग्राम विकास अधिकारी जगतपाल का कहना है कि अवैध कब्जे के बारे में विभागीय कार्रवाई की जा चुकी है। कई बार विभाग को अवगत कराया जा चुका है लेकिन अभी कोई कार्यवाही नहीं हुई।
पंचायत भवन में रह रहे मजदूर
धौरहरा। तहसील धौरहरा के तीनो विकास खंड धौरहरा, रमियाबेहड़ व ईसानगर की ग्राम पंचायतों में बने पंचायत भवन अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। यहां न तो कोई अधिकारी बैठता है न ही कोई बैठक ही होती है। ज्यादातर पंचायत भवनों में खिड़की दरवाजे तक टूटे पड़े हैं।
विकास खंड रमियाबेहड़ की ग्राम पंचायत रामनगर बगहा में बने पंचायत भवन में घाघरा नदी में बाढ़ से बचाव के लिए चल रहे कार्य में काम करने वाले मजदूर रह रहे हैं, वहीं धौरहरा के ग्राम पंचायत बसंतापुर में पंचायत भवन में जंगल झाड़ियां उग आई हैं और दरवाजे टूटे पड़े हैं।
पंचायत भवन नहीं खंडहर बोलिये
पसगवां। विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पसगवां, सल्लिया, चोरहा खुर्रमनगर, जमुनिया शहवाज में पंचायत घर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। एडीओ (पंचायत) देवेंद्र कुमार का कहना है कि विकास खंड में 48 नए पंचायत भवनों का निर्माण होना है, जिसमें सिकटार, रामपुर ग्रंट, करमोलिया में पंचायत भवनों का निर्माण विवाद के कारण शुरू नही हो सका है।
पंचायत भवनों में क्वारंटीन सेंटर बनाने के निर्देश मिले हैं। इसके लिए सभी एडीओ पंचायत को निर्देश दिए गए हैं। जिन पर दूसरों का कब्जा है या फिर उनमें कमियां हैं तो उन्हें दुरुस्त करके क्वारंटीन सेंटर के तौर पर तैयार किया जाएगा। हालांकि अब संक्रमितों की संख्या में कमी आई है, लेकिन एहतियातन निर्देशों का अनुपालन कराया जा रहा है। - सौम्य शील सिंह, डीपीआरओ

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