रैनी-समदहा गांव के करीब 100 पीड़ित परिवारों के लिए आईं थीं किटेंधौरहरा। शारदा नदी में आई बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित रैनी-समदहा गांव के करीब 100 पीड़ित परिवारों के लिए प्रशासन ने राहत किट का इंतजाम किया, लेकिन डिब्बों पर 2020 लिखा होने से तहसील प्रशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि राशन पुराना नहीं है। भूलवश ठेकेदार ने पैकेट के ऊपर पुराना रैपर लगा दिया है।
बीते बृहस्पतिवार को बाढ़ प्रभावित रैनी समदहा के ग्रामीणों को तहसीदार धौरहरा अनिल कुमार यादव व भाजपा जिला मंत्री दुर्गेश नंदन पांडेय की मौजूदगी में बांटा गया था, जिस पर ‘बाढ़ राहत किट 2020’ लिखा मिला। 2020 की सामग्री का वितरण 2021 में होता देख बाढ़ पीड़ित आश्चर्य में पड़ गए। वही लोगों के मन में भी शंका है कि कहीं उन्हें पिछले साल की तो राशन किट नहीं दे दी गई। मामले में प्रशासन के घिरने पर अधिकारी बचाव की मुद्रा में उतर आए और ठेकेदार को जिम्मेदार ठहरा दिया। सवाल यह है कि आखिर पुराना डिब्बा या रैपर इस्तेमाल ही क्यों किया गया?
ठेकेदार के द्वारा पुराने रैपर में सामग्री को पैक कर दिया गया है। राशन किट पुरानी नहीं है और न ही उसमें सामग्री पुरानी है। रैपर चेंज करने के लिए कहा गया है। - रेनू, एसडीएम धौरहरा
राशन किट बांटने के दौरान ध्यान नहीं दिया। अधिकारियों व ग्रामीणों से जानकारी की गई है। राशन सामग्री पुरानी नहीं है। ठेकेदार के द्वारा पुराने रैपर में पैक कर दिया गया है। - दुर्गेश नंदन पांडेय, भाजपा जिला मंत्री