बरेली की रबर फैक्टरी में रही किशनपुर सेंक्चुुरी की बाघिन को आखिरकार शुक्रवार सुबह ट्रैंक्युलाइज कर लिया गया। यह बाघिन शीरा भरने के टैंक में फंस गई थी। अब स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे ट्रक से दुधवा लाया जा रहा है। इस बाघिन के साथ पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डीएफओ नवीन खंडेलवाल, डब्ल्यूटीआई के विशेषज्ञ और डॉक्टर सुशांत के अलावा दुधवा पार्क प्रशासन के पशु चिकित्सक और वनाधिकारी भी आ रहे हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक संजय पाठक ने बताया कि ‘शर्मीली’ को दुधवा लाकर उसका नियमानुसार स्वास्थ्य परीक्षण होगा। बाद में दुधवा के जंगल में प्रवास के लिए छोड़ा जाएगा।
बताते हैं कि बाघिन को पहले उसके पुराने ठिकाने किशनपुर सेंक्चुरी में छोड़े जाने की योजना थी। बाद में इस योजना में बदलाव कर दुधवा के जंगल में छोड़े जाने का निर्णय लिया गया है। बाघिन के बरेली रबर फैक्टरी पहुंचने पर उसे पकड़ने के लिए जो अभियान चलाया गया था, उसमें दुधवा टाइगर रिजर्व की टीम भी शामिल थी।
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बरेली की रबर फैक्टरी में कई दिन से किशनपुर सेंक्चुरी की बाघिन प्रवास कर रही थी। जिसे पकड़ने के तमाम प्रयास किए गए लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। उसे वहां शुक्रवार सुबह ट्रैंक्युलाइज कर लिया गया। दुधवा पहुंचने पर इसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा और फिट फॉर रिलीज मिलने पर दुधवा जंगल में स्वछंद विचरण के लिए छोड़ा जाएगा।
संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व