फादर्स डे पर उन्होंने चंडीगढ़ और दिल्ली से अपने पिता को शुभकामनाएं भेजी हैं। वहीं, मंजू सिंह चौहान के चेहरे पर पॉसिंग आउट परेड के दौरान पिता को पैंट में आने की बात का जिक्र करते हुए मुस्कान छा जाती है।
बड़ी पुत्री राखी बतातीं हैं कि हम लोगों का भविष्य बनाने के लिए पिता ने बैंक की नौकरी से रिटायरमेंट लेकर हम लोगों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया। वह पढ़ाई के दौरान काफी सख्त रहते थे। स्कूल में क्या पढ़ा और अगले दिन क्या पढ़ाया जाएगा। जब तक पढ़ा हुआ सुन नहीं लेते तब तक बैठने तक नहीं देते थे। वह बताती हैं कि पढ़ाई के दौरान उनकी सख्ती से ही तीनों बहनों का एक साथ आर्मी में चयन हुआ, जो लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज है।
वहीं, मंजू सिंह चौहान बताते हैं कि बेटा ब्रिगेडियर बनने वाला है, जबकि बेटियों ने कैप्टन होने के बाद रिजाइन कर दूसरे सेक्टरों में ज्वाइनिंग ले ली। मंजू सिंह चौहान बताते हैं कि पॉसिंग आउट परेड में शामिल होने के लिए छोटी बेटी ने पायजामा में न आने को कहा, लेकिन बड़ी बेटी राखी ने कहा कि ‘पायजामा में हो या पैंट में आखिर पापा तो पापा हैं’। आर्मी में कर्नल मृदुल कुमार एवं राखी, रोली व रूचि बताती हैं कि आज वह जिस मुकाम पर हैं वह पिता जी की देन है।
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पिता के वह शब्द : शहर में जो पढ़ता है वह अच्छा आदमी बनता है
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरएस मधौरिया कहते हैं गरीबी का कभी साया नहीं पढ़ने दिया पिता ने
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। फादर्स डे पर पिता जी को याद करते हुए जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरएस मधौरिया बताते हैं कि बेहद गरीबी के बाद भी पिता जी ने उन दोनो भाइयों को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पिताजी का ख्वाब था कि मैं एक अच्छा आदमी बनूं, इसलिए उन्होंने पांचवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद पांच किलोमीटर दूर कस्बा जसवंत नगर के स्कूल में कक्षा छह में दाखिला कराया। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण हम दोनो भाई पैदल ही स्कूल आते जाते थे। इस बीच पिताजी बीमार हो गए, पैसों के अभाव में उनका इलाज न करा सका, जिससे उनकी मौत हो गई। पिताजी की मौत से टूट गया।
मगर, मां अच्छा आदमी बनकर पिताजी का सपना पूरा करने के लिए निरंतर प्रेरित करती रहीं, जिससे हिम्मत बढ़ती रही। इंटर के बाद इटावा से बीएसएसी की। इसके लिए रोजाना साइकिल से 48 किलोमीटर आते जाते थे। आर्थिक तंगी के कारण पैसों के लिए काम भी करने के साथ पढ़ाई भी करते रहे। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में सेलेक्शन होकर डॉक्टर बन गया। पिता जी के शब्द ‘जो शहर में पढ़ता है वह अच्छा आदमी बनता है’, आज भी कानों में गूंजा करते हैं। संवाद