पिछले साल तीन माह के लॉकडाउन ने और इस बार एक माह के कर्फ्यू ने लकड़ी कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस दौरान एक तो लकड़ी नहीं मिली। बाद में जो मिली भी उससे कारोबारियों ने बेड, सोफा, कुर्सी आदि तैयार करा लिए। व्यापारियों को उम्मीद थी कि सहालग मिलने से काम धाम पटरी पर लौट आएगा, मगर एक माह के कर्फ्यू ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। दुकानदारों का कहना है कि काम धंधा चौपट होने से आमदनी हुई नहीं। ऊपर से बिजली का बिल, दुकान का किराया, कारीगरों की सैलरी का कर्ज हो गया। हमारे लिए सरकार भी कुछ नहीं सोच रही।
पिछले साल की तरह इस बार भी सहालग कोरोना की भेंट चढ़ गए। एक माह बाजार बंद रहने से आमदनी तो हुई नहीं जो पूंजी थी भी वह घर पर रहने से खत्म हो गई। दुकान का किराया, बिजली का बिल आदि देना है। वह कहां से दे इसकी चिंता सता रही है।
शकील खां, वारिस टिंबर
सहालग में ही फर्नीचर में बिक्री होती थी। इसके लिए होली के बाद से ही तैयारी शुरू कर दी थी। माल भी तैयार करा लिया था, लेकिन बंदी के कारण सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। सरकार को बिजली बिल, टैक्स आदि में कुछ न कुछ रियायत देनी चाहिए।
इनायत उल्ला खान, एके फर्नीचर
बंदी के कारण काम धंधा सब चौपट हो गया। आमदनी एक पैसे की नहीं हुई। जबकि कारीगर को सैलरी देनी ही पड़ी, क्योंकि वह तो हमारे सहारे ही है। दुकान के तमाम खर्चे हैं। इन सबको लेकर चिंता सता रही है।
करोना महामारी में शादी, बरात, तिलक आदि कार्यक्रम अप्रैल-मई में होते, इसी समय लॉकडाउन लग गया, जिसमें दुकानें बंद रहीं बिक्री नहीं हुई। पिछले साल भी करोना के चलते दुकान बंद रही काफी नुकसान हुआ। सरकार बिजली बिल के आलावा सहयोग करना चाहिए।
हरजिंदर सिंह, फर्नीचर विक्रेता मोहम्मदी
पिछले साल की तरह इस बार भी कोरोना ने व्यापार पर ग्रहण लगा दिया। इस बार पहले की तुलना में सहालगों में शादियां कम हुईं, जिससे कारोबार पर भी काफी असर पड़ा।
मोहम्मद वसी, फर्नीचर विक्रेता, पलियाकलां।
कोरोना काल की बंदी सहालग का सीजन ले गई। इससे व्यापार काफी प्रभावित हुआ, क्योंकि सहालग में ही फर्नीचर आदि की बिक्री सबसे ज्यादा होती है।
मुख्तार हुसैन, फर्नीचर विक्रेता पलियाकलां