शिक्षकों की मांग- जिनकी नहीं हो पाई कोरोना जांच, उनके परिजन को भी मिले आर्थिक मदद
लखीमपुर खीरी। शिक्षक संगठनों की मांग पर प्रदेश सरकार द्वारा चुनाव ड्यूटी से 30 दिन में कोरोना से मृत कर्मचारी के परिवार को 30 लाख रुपये मुआवजा देने के फैसले को पीड़ित परिजन ने सराहा है। साथ ही मांग की है कि जिन शिक्षकों की कोरोना जांच नहीं हो पाई थी पर लक्षण कोरोना के थे, उनके परिवारों को भी लाभ दिया जाए। यहां बता दें कि पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने के बाद 60 से अधिक शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों समेत सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी समेत अन्य कई कर्मचारियों की कोरोना से मौत हुई है।
जनपद में पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में 19 अप्रैल 2021 को मतदान कराया गया था, जिससे पहले करीब एक सप्ताह तक मतदान कर्मियों का प्रशिक्षण कराया गया था। प्रशिक्षण के बाद से शिक्षकों के बीमार होने के मामले सामने आने लगे थे। मतदान के बाद मौत के मामलों में अचानक तेजी आ गई। शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों के मुताबिक, पहली मौत 11 अप्रैल को ईसानगर के प्राथमिक विद्यालय नंदूरा के सहायक अध्यापक संतोष बहादुर सिंह की हुई थी, जो चुनाव के प्रशिक्षण के दौरान संक्रमित हुए थे। इसके बाद मतदान से पहले तक कुल छह शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की मौत हो गई। इसमें बीएसए ऑफिस के दो लिपिक भी शामिल हैं।
मतदान वाले दिन सुबह नकहा ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय रंगीलानगर की सहायक अध्यापक सुनीता रानी मित्रा की मौत हो गई थी। 20 अप्रैल को तीन, 21 अप्रैल को दो, 22 अप्रैल को चार और 23 अप्रैल को तीन शिक्षकों की मौत हुई। ऐसे ही प्रतिदिन तीन से चार शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की मौत का सिलसिला 20 मई तक जारी रहा। इसके बाद भी कुछ शिक्षकों की मौत हुई है। कुल 60 शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की मौत होने की सूची शिक्षक संगठन ने शासन-प्रशासन को सौंपी है।
वहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना या अन्य कारणों से मरने वाले कर्मचारियों के परिजनों को 30 लाख आर्थिक मदद देने के लिए प्रस्ताव मांगे तो जिला प्रशासन ने सिर्फ दो शिक्षकों की मौत चुनाव के दौरान होना मानते हुए उनके प्रस्ताव भेजे थे। इससे नाराज शिक्षक संगठनों ने शासन-प्रशासन को ज्ञापन देकर कोरोना से होने वाली मौतों की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाए थे।
प्रदेश सरकार ने शिक्षक संगठनों की मांगों का संज्ञान लेते हुए चुनाव ड्यूटी से 30 दिन में कोरोना से मृत्यु होने पर कर्मचारी के परिजन को 30 लाख रुपये मुआवजा देने के प्रस्ताव को मंजूरी देकर पीड़ित परिजन को बड़ी राहत दी है। वहीं कुछ शिक्षक व कर्मचारी ऐसे भी थे, जिनकी कोरोना जांच नहीं हो पाई थी, उनके परिजनों को भी आर्थिक सहायता कैसे मिलेगी। इस पर अभी संदेह है, क्योंकि सरकार ने कोरोना पॉजिटिव व निगेटिव रिपोर्ट को मुआवजे के दायरे में रखा है।
- संजीव त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
मुआवजा 30 लाख रुपये कम है। इसे बढ़ाकर एक करोड़ रुपये किया जाए। परिवार के आश्रितों को असाधारण पेंशन मिले, एनपीएस वाले शिक्षकों का अंशदान ब्याज सहित उन्हें वापस किया जाए। उनके बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था की जाए। साथ ही सभी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन सरकार बहाल करे।
- विश्वनाथ मौर्य, जिला संयोजक, अटेवा पेंशन बचाओ मंच
सरकार के इस निर्णय से कोरोना से मृतक कर्मचारियों के परिजन को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन कई शिक्षकों व कर्मचारियों की कोरोना जांच नहीं हो पाई थी, जबकि वह भी पंचायत चुनाव की ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुए थे। उनमें ज्यादातर लक्षण कोरोना के ही थे। ऐसे शिक्षकों के परिजन को भी मुआवजा मिले।
- श्रुति दीक्षित, मंत्री, प्राथमिक शिक्षक संघ, नकहा ब्लॉक
प्रदेश सरकार ने संगठन की मांगों पर संज्ञान लेते हुए नियमों में बदलाव करने का सराहनीय कदम उठाया है। इससे पीड़ित परिवारों को काफी हद तक राहत मिलेगी। हालांकि इसमें कुछ और ढील देने की जरूरत है, क्योंकि मृत्यु का शिकार हुए शिक्षकों में से करीब 40 प्रतिशत की कोरोना जांच नहीं हो पाई थी। ऐसे में तमाम पीड़ित परिवारों के सामने मुआवजा प्राप्त करने में कोरोना रिपोर्ट की अनिवार्यता पेंच फंसाएगी।
- संतोष मौर्य, प्रदेश संयुक्त महामंत्री, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ