उल्लेखनीय है कि लंबे समय से जिले के कद्दावर नेता रामवीर उपाध्याय के परिवार में कलह चल रही थी। करीब डेढ़ साल पहले पूर्व एमएलसी मुकुल उपाध्याय ने रामवीर उपाध्याय पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस बार रामवीर उपाध्याय ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रामवीर उपाध्याय ने अपने आगरा रोड स्थित निवास पर अपने समर्थकों की बैठक बुलाई। बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुकुल को मैंने पढ़ाया- लिखाया, शादी कराई। इगलास में वर्ष 2004 के चुनाव में मुकुल को बसपा से टिकट दिलाकर चुनाव जितवाया।
सभी लड़ाई मैंने झेली। इसके बाद वर्ष 2007 के विधानसभा क्षेत्र में मुकुल क्षेत्र में नहीं रहे तो मुकुल चुनाव हार गए। इसके बाद भी मैंने इसे राज्यमंत्री का दर्जा दिलाया। प्रदेश में बसपा का कोआर्डिनेटर बनवाया। इसके बाद एमएसली का चुनाव लड़ाया। तब जब रुपये की जरूरत पड़ी तो रुपये देने के नाम पर हाथ खड़े कर दिए। काफी रुपया मेरा लग गया। मैंने अपने बच्चों की एफडी तोड़ी, घर के जेवर बेचे। रामवीर ने कहा कि मैंने जब अपने रुपये मांगे तो ऐसा प्लाट दिखा दिया, जोकि झगड़े का था। इस प्लाट के कागजात मैंने एक मित्र को दिए। वह भी कागज लौटा गया और वह रुपये भी मुझे देने पड़े। इसके चक्कर में मेरी लखनऊ की कोठी, लखनऊ और नोएडा का प्लाट बिक गया। फिर मुकुल एमएलसी का चुनाव जीत गए।
पूर्व मंत्री ने आरोपों की बौछार करते हुए कहा कि जब मैं सादाबाद से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था तो मैंने मुकुल से एमएलसी की निधि से हैंडपंप मांगे, लेकिन केवल वादे करते रहे। इसके बाद मुकुल को सांसद का चुनाव गाजियाबाद से लड़ाया। तब कहने लगे कि मुझे भइया एक करोड़ रुपये कहीं से दिलवाओ। मैंने तब एक मित्र से रुपये की व्यवस्था कराई। जब मेरे मित्र ने मुकुल के कई बार चक्कर लगाए तो उसे केवल 65 लाख रुपये दिए। 35 लाख रुपये दिए ही नहीं। ब्याज भी नहीं मिला। उसके बाद जब वह पैसे मांगने आया तो उसे गाली-गलौज देकर भगा दिया।
इसके बाद शिकारपुर से मुकुल ने विस चुनाव लड़ा। वहां से मेरे छोटे भाई विनोद उपाध्याय की बेटी के ससुर अनिल शर्मा चुनाव मैदान में थे। मैंने व पूरे परिवार ने मना किया और हाथ-पैर जोड़े, लेकिन मुकुल नहीं माने और वहां से चुनाव लड़कर हार गए। रामवीर ने कहा कि वहां जब मैं ब्राह्मण सम्मेलन में नहीं गया तो मुकुल ने मेरे पीए व नौकरों के फोन पर तमाम गालियां दी। उन्होंने कहा कि नगर पालिका के चुनाव के लिए रामेश्वर उपाध्याय ने पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन मुकुल ने फिर बात नहीं मानी और यह चुनाव भी लड़ा, जिसमें फिर यह हार गए।
उन्होंने कहा कि आशीष से मेरी कोई दुश्मनी नहीं थी। केवल पार्टी ही बदली थी। मुकुल ने मंच से आशीष को भला-बुरा कहा। आशीष को हमारा दुश्मन बना दिया। उन्होंने कहा कि मैंने आज तक किसी की जमीन नहीं हड़पी, कोई रिश्वत नहीं ली। कोई गलत काम नहीं किया, लेकिन मुकुल ने जमुना वाला बाग कांड करके मेरी पूरी राजनीति पर कलंक लगा दिया। उपाध्याय ने यह भी कहा कि मैंने आगरा रोड का यह मकान बनवाया था। इसमें मुकुल, रामेश्वर और मैं रहते थे। कई साल से मुकुल इसमें नहीं रह रहे और ताला बंद कर रखा है। हमने जब चाभी मांगी तो इसे देने में आनाकानी करते रहे।
रामवीर यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि जब बहन जी ने इसे पार्टी से निकाला तो मेरे लिए यह कहा कि रामवीर व सीमा मेरा मर्डर करा देंगे। जिस भाई को बुलंदियों पर पहुंचाया। मेरी पत्नी ने अपने गहने बेचकर चुनाव में लगा दिए। परिवार के मान सम्मान के लिए सब कुछ किया, लेकिन मुकुल ने अपने कारनामों से हमारे ऊपर कलंक लगा दिया। उन्होंने कहा कि मुकुल रहते तो ग्रेटर नोएडा में हैं। यहां जनता से उनका कोई संपर्क नहीं हैं, लेकिन चुनाव के वक्त यहां आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार भी वार्ड नंबर 14 से रामेश्वर की पत्नी कल्पना निर्दलीय तैयारी कर रही थीं, लेकिन अब मुकुल ने अपनी पत्नी को भाजपा से टिकट दिला दिया। इसलिए मैंने अपनी पत्नी सीमा को वार्ड नंबर 14 से उतारने का फैसला किया है।
सीमा ने किया नामांकन, रितु आज भरेंगी पर्चा
हाथरस। बैठक के बाद रामवीर और सीमा अपने कुछ परिजनों व समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और वहां सीमा उपाध्याय ने वार्ड नंबर 14 से निर्दलीय पर्चा दाखिल किया। इसी वार्ड से भाजपा ने पूर्व एमएलसी मुकुल उपाध्याय की पत्नी को प्रत्याशी बनाया है। वह रविवार को इसी वार्ड से अपना नामांकन करेंगी।
मुकुल की वजह से मुझे नहीं मिला टिकट : विनोद
बैठक में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय ने भी मुकुल पर खुलकर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुकुल पर पहले ही अंकुश लगाया जाना चाहिए था। कई बार सचेत भी किया गया था। हालांकि बैठक में उन्होंने रामवीर से यह अपील भी की कि मुकुल को वह माफ कर दें। आखिर वह भाई ही है, लेकिन रामवीर ने स्पष्ट मना कर दिया और बोले इस बार माफी नहीं मिलेगी। वहीं पत्रकारों से वार्ता करते हुए विनोद ने यह भी कहा कि मुकुल की वजह से ही उन्हें भाजपा ने अपना समर्थित उम्मीदवार नहीं बनाया। इसमें मुकुल की ही चाल है।
सीमा की आंखों में आ गए आंसू
रामवीर जब बैठक में यह सब भावुक अंदाज में बता रहे थे तो वहां मौजूद पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय की आंखें भर आईं। उन्होंने बाद में यह भी कहा कि मुकुल ने परिवार में भी यह परामर्श नहीं किया कि आखिर वह कहां से और किस दल से अपनी पत्नी को चुनाव लड़वा रहे हैं।
मैं गद्दार नहीं हूं भइया, कहकर माफी मांगने लगे मुकुल
पूर्व मंत्री के आवास पर उस समय अजीबोगरीब दृश्य पैदा हो गया, जब मुकुल उपाध्याय वहां आ गए और रो-रोकर अपने भाई से माफी मांगने लगे और पैर पकड़ने लगे। रामवीर ने उन्हें चेताया कि बैठक में आने की जरूरत नहीं है। मुुकुल काफी देर तक अंदर कमरे में बैठे रहे। यह कहते रहे कि मैं गद्दार नहीं हूं। मैने हमेशा अपने भाई का साथ दिया है। जो कुछ मुझसे बन पड़ा, वह मैंने किया। काफी देर तक यह सब चलता रहा, लेकिन आखिरकार रामवीर ने स्पष्ट कर दिया सीमा वार्ड नंबर 14 से ही चुनाव लड़ेगी।
जेठानी और देवरानी के बीच होगा मुकाबला
मुकुल से जब यह पूछा गया कि क्या इस स्थिति में वह अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाएंगे तो उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने भाई के साथ कोई गद्दारी नहीं की है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पत्नी रितु उपाध्याय को भाजपा जैसी पार्टी ने मैदान में उतारा है तो चुनाव तो लड़ना ही है। इसलिए रितु उपाध्याय अब वार्ड नंबर 14 से रविवार को पर्चा दाखिल करेंगी। वहीं ऐसे में इस चुनाव में जहां एक तरफ जेठानी सीमा उपाध्याय होंगी तो उनके मुकाबले में देवरानी रितु उपाध्याय चुनाव लड़ेंगी।
विनोद ही होंगे जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए मैदान में
पूर्व ऊर्जा मंत्री की बैठक यह बात भी सामने आई कि आखिर जिला पंचायत अध्यक्ष की परिवार में से कौन दावेदारी करेगा तो इस पर यह बात भी रामवीर ने कही कि सीमा उपाध्याय इस समय जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रही हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए विनोद उपाध्याय ही मैदान में होंगे।
पूरे दिन घटनाक्रम को लेकर होती रही चर्चाएं
रामवीर उपाध्याय के निवास पर हुई बैठक की चर्चा पूरे दिन राजनीतिक सुर्खियां बटोरती रही। लोग यह जानने को आतुर रहे कि आखिर वहां क्या-क्या हो रहा है। वहीं बैठक के दौरान जब मुकुल से यह पूछा गया कि वह आखिर अब यहां क्यों आए हैं तो उनका कहना था कि वह परिजनों का आशीर्वाद लेने के लिए आए हैं।
सभी लड़ाई मैंने झेली। इसके बाद वर्ष 2007 के विधानसभा क्षेत्र में मुकुल क्षेत्र में नहीं रहे तो मुकुल चुनाव हार गए। इसके बाद भी मैंने इसे राज्यमंत्री का दर्जा दिलाया। प्रदेश में बसपा का कोआर्डिनेटर बनवाया। इसके बाद एमएसली का चुनाव लड़ाया। तब जब रुपये की जरूरत पड़ी तो रुपये देने के नाम पर हाथ खड़े कर दिए। काफी रुपया मेरा लग गया। मैंने अपने बच्चों की एफडी तोड़ी, घर के जेवर बेचे। रामवीर ने कहा कि मैंने जब अपने रुपये मांगे तो ऐसा प्लाट दिखा दिया, जोकि झगड़े का था। इस प्लाट के कागजात मैंने एक मित्र को दिए। वह भी कागज लौटा गया और वह रुपये भी मुझे देने पड़े। इसके चक्कर में मेरी लखनऊ की कोठी, लखनऊ और नोएडा का प्लाट बिक गया। फिर मुकुल एमएलसी का चुनाव जीत गए।
पूर्व मंत्री ने आरोपों की बौछार करते हुए कहा कि जब मैं सादाबाद से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था तो मैंने मुकुल से एमएलसी की निधि से हैंडपंप मांगे, लेकिन केवल वादे करते रहे। इसके बाद मुकुल को सांसद का चुनाव गाजियाबाद से लड़ाया। तब कहने लगे कि मुझे भइया एक करोड़ रुपये कहीं से दिलवाओ। मैंने तब एक मित्र से रुपये की व्यवस्था कराई। जब मेरे मित्र ने मुकुल के कई बार चक्कर लगाए तो उसे केवल 65 लाख रुपये दिए। 35 लाख रुपये दिए ही नहीं। ब्याज भी नहीं मिला। उसके बाद जब वह पैसे मांगने आया तो उसे गाली-गलौज देकर भगा दिया।
इसके बाद शिकारपुर से मुकुल ने विस चुनाव लड़ा। वहां से मेरे छोटे भाई विनोद उपाध्याय की बेटी के ससुर अनिल शर्मा चुनाव मैदान में थे। मैंने व पूरे परिवार ने मना किया और हाथ-पैर जोड़े, लेकिन मुकुल नहीं माने और वहां से चुनाव लड़कर हार गए। रामवीर ने कहा कि वहां जब मैं ब्राह्मण सम्मेलन में नहीं गया तो मुकुल ने मेरे पीए व नौकरों के फोन पर तमाम गालियां दी। उन्होंने कहा कि नगर पालिका के चुनाव के लिए रामेश्वर उपाध्याय ने पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन मुकुल ने फिर बात नहीं मानी और यह चुनाव भी लड़ा, जिसमें फिर यह हार गए।
उन्होंने कहा कि आशीष से मेरी कोई दुश्मनी नहीं थी। केवल पार्टी ही बदली थी। मुकुल ने मंच से आशीष को भला-बुरा कहा। आशीष को हमारा दुश्मन बना दिया। उन्होंने कहा कि मैंने आज तक किसी की जमीन नहीं हड़पी, कोई रिश्वत नहीं ली। कोई गलत काम नहीं किया, लेकिन मुकुल ने जमुना वाला बाग कांड करके मेरी पूरी राजनीति पर कलंक लगा दिया। उपाध्याय ने यह भी कहा कि मैंने आगरा रोड का यह मकान बनवाया था। इसमें मुकुल, रामेश्वर और मैं रहते थे। कई साल से मुकुल इसमें नहीं रह रहे और ताला बंद कर रखा है। हमने जब चाभी मांगी तो इसे देने में आनाकानी करते रहे।
रामवीर यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि जब बहन जी ने इसे पार्टी से निकाला तो मेरे लिए यह कहा कि रामवीर व सीमा मेरा मर्डर करा देंगे। जिस भाई को बुलंदियों पर पहुंचाया। मेरी पत्नी ने अपने गहने बेचकर चुनाव में लगा दिए। परिवार के मान सम्मान के लिए सब कुछ किया, लेकिन मुकुल ने अपने कारनामों से हमारे ऊपर कलंक लगा दिया। उन्होंने कहा कि मुकुल रहते तो ग्रेटर नोएडा में हैं। यहां जनता से उनका कोई संपर्क नहीं हैं, लेकिन चुनाव के वक्त यहां आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार भी वार्ड नंबर 14 से रामेश्वर की पत्नी कल्पना निर्दलीय तैयारी कर रही थीं, लेकिन अब मुकुल ने अपनी पत्नी को भाजपा से टिकट दिला दिया। इसलिए मैंने अपनी पत्नी सीमा को वार्ड नंबर 14 से उतारने का फैसला किया है।
सीमा ने किया नामांकन, रितु आज भरेंगी पर्चा
हाथरस। बैठक के बाद रामवीर और सीमा अपने कुछ परिजनों व समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और वहां सीमा उपाध्याय ने वार्ड नंबर 14 से निर्दलीय पर्चा दाखिल किया। इसी वार्ड से भाजपा ने पूर्व एमएलसी मुकुल उपाध्याय की पत्नी को प्रत्याशी बनाया है। वह रविवार को इसी वार्ड से अपना नामांकन करेंगी।
मुकुल की वजह से मुझे नहीं मिला टिकट : विनोद
बैठक में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय ने भी मुकुल पर खुलकर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुकुल पर पहले ही अंकुश लगाया जाना चाहिए था। कई बार सचेत भी किया गया था। हालांकि बैठक में उन्होंने रामवीर से यह अपील भी की कि मुकुल को वह माफ कर दें। आखिर वह भाई ही है, लेकिन रामवीर ने स्पष्ट मना कर दिया और बोले इस बार माफी नहीं मिलेगी। वहीं पत्रकारों से वार्ता करते हुए विनोद ने यह भी कहा कि मुकुल की वजह से ही उन्हें भाजपा ने अपना समर्थित उम्मीदवार नहीं बनाया। इसमें मुकुल की ही चाल है।
सीमा की आंखों में आ गए आंसू
रामवीर जब बैठक में यह सब भावुक अंदाज में बता रहे थे तो वहां मौजूद पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय की आंखें भर आईं। उन्होंने बाद में यह भी कहा कि मुकुल ने परिवार में भी यह परामर्श नहीं किया कि आखिर वह कहां से और किस दल से अपनी पत्नी को चुनाव लड़वा रहे हैं।
मैं गद्दार नहीं हूं भइया, कहकर माफी मांगने लगे मुकुल
पूर्व मंत्री के आवास पर उस समय अजीबोगरीब दृश्य पैदा हो गया, जब मुकुल उपाध्याय वहां आ गए और रो-रोकर अपने भाई से माफी मांगने लगे और पैर पकड़ने लगे। रामवीर ने उन्हें चेताया कि बैठक में आने की जरूरत नहीं है। मुुकुल काफी देर तक अंदर कमरे में बैठे रहे। यह कहते रहे कि मैं गद्दार नहीं हूं। मैने हमेशा अपने भाई का साथ दिया है। जो कुछ मुझसे बन पड़ा, वह मैंने किया। काफी देर तक यह सब चलता रहा, लेकिन आखिरकार रामवीर ने स्पष्ट कर दिया सीमा वार्ड नंबर 14 से ही चुनाव लड़ेगी।
जेठानी और देवरानी के बीच होगा मुकाबला
मुकुल से जब यह पूछा गया कि क्या इस स्थिति में वह अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाएंगे तो उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने भाई के साथ कोई गद्दारी नहीं की है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पत्नी रितु उपाध्याय को भाजपा जैसी पार्टी ने मैदान में उतारा है तो चुनाव तो लड़ना ही है। इसलिए रितु उपाध्याय अब वार्ड नंबर 14 से रविवार को पर्चा दाखिल करेंगी। वहीं ऐसे में इस चुनाव में जहां एक तरफ जेठानी सीमा उपाध्याय होंगी तो उनके मुकाबले में देवरानी रितु उपाध्याय चुनाव लड़ेंगी।
विनोद ही होंगे जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए मैदान में
पूर्व ऊर्जा मंत्री की बैठक यह बात भी सामने आई कि आखिर जिला पंचायत अध्यक्ष की परिवार में से कौन दावेदारी करेगा तो इस पर यह बात भी रामवीर ने कही कि सीमा उपाध्याय इस समय जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रही हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए विनोद उपाध्याय ही मैदान में होंगे।
पूरे दिन घटनाक्रम को लेकर होती रही चर्चाएं
रामवीर उपाध्याय के निवास पर हुई बैठक की चर्चा पूरे दिन राजनीतिक सुर्खियां बटोरती रही। लोग यह जानने को आतुर रहे कि आखिर वहां क्या-क्या हो रहा है। वहीं बैठक के दौरान जब मुकुल से यह पूछा गया कि वह आखिर अब यहां क्यों आए हैं तो उनका कहना था कि वह परिजनों का आशीर्वाद लेने के लिए आए हैं।