जट्टारी कस्बे में रहने वाले एक इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य को शुक्रवार दिन में कोरोना वैक्सीन लगने के बाद रात में तबियत बिगड़ गई। सूचना पाकर पहुंचा बेटा उनको जेवर (गौतमबुद्धनगर) के कैलाश हास्पिटल ले गया जहां शनिवार की सुबह प्रधानाचार्य ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार करते हुए शव को उन्नाव जिले स्थित पैतृक निवास ले जाने की बात कही।
उन्नाव जिले के बस्ती खेड़ा के मूल निवासी सुरेश कुमार (55) पुत्र प्रीतम लाल गांव सालपुर स्थित इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य थे। वह जट्टारी कस्बे में तालाब के सामने किराए का मकान लेकर रह रहे थे। बताते हैं कि शुक्रवार की शाम साढ़े चार बजे वे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जट्टारी में कोरोना की वैक्सीन लगवाने गए थे।
उन्नाव जिले के बस्ती खेड़ा के मूल निवासी सुरेश कुमार (55) पुत्र प्रीतम लाल गांव सालपुर स्थित इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य थे। वह जट्टारी कस्बे में तालाब के सामने किराए का मकान लेकर रह रहे थे। बताते हैं कि शुक्रवार की शाम साढ़े चार बजे वे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जट्टारी में कोरोना की वैक्सीन लगवाने गए थे।
वैक्सीन लगवाने के बाद अपने घर लौट आए।
रात में उनकी तबियत बिगड़ गई। इस पर उन्होंने अपने बेटे हरि को सूचना दी। हरि तत्काल ही जट्टारी पहुंचे और पिता को गंभीर हालत में जेवर के कैलाश हास्पिटल ले गए जहां शनिवार की सुबह उनकी मौत हो गई। वह अपने पीछे दो पुत्रों व दो पुत्रियों को छोड़ गए हैं। सुरेश कुमार के बड़े बेटे सेना में हैं, जबकि छोटै बेटे अलीगढ़ जिले के ही गोंडा ब्लॉक के एक प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक हैं।
टीका से मौत नहीं : सीएमओ
प्रधानाचार्य की मौत टीका से नहीं हुई है। टीका लगने के बाद आधे घंटे तक वह जट्टारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रहे। शाम को भी कोई दिक्कत नहीं हुई। रात तीन बजे सीने में दर्द और बेचैनी हुई। वह पहले से मधुमेह से पीड़ित थे। हमलोगों ने वीडियोग्राफी के साथ उनका पोस्टमार्टम कराने का प्रयास किया ताकि मौत का कारण स्पष्ट हो, किंतु उनके पुत्र तैयार नहीं हुए। उनका कहना था कि टीका से पिता की मृत्यु नहीं हुई है।
- डॉ. बीपी सिंह कल्याणी, सीएमओ
रात में उनकी तबियत बिगड़ गई। इस पर उन्होंने अपने बेटे हरि को सूचना दी। हरि तत्काल ही जट्टारी पहुंचे और पिता को गंभीर हालत में जेवर के कैलाश हास्पिटल ले गए जहां शनिवार की सुबह उनकी मौत हो गई। वह अपने पीछे दो पुत्रों व दो पुत्रियों को छोड़ गए हैं। सुरेश कुमार के बड़े बेटे सेना में हैं, जबकि छोटै बेटे अलीगढ़ जिले के ही गोंडा ब्लॉक के एक प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक हैं।
टीका से मौत नहीं : सीएमओ
प्रधानाचार्य की मौत टीका से नहीं हुई है। टीका लगने के बाद आधे घंटे तक वह जट्टारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रहे। शाम को भी कोई दिक्कत नहीं हुई। रात तीन बजे सीने में दर्द और बेचैनी हुई। वह पहले से मधुमेह से पीड़ित थे। हमलोगों ने वीडियोग्राफी के साथ उनका पोस्टमार्टम कराने का प्रयास किया ताकि मौत का कारण स्पष्ट हो, किंतु उनके पुत्र तैयार नहीं हुए। उनका कहना था कि टीका से पिता की मृत्यु नहीं हुई है।
- डॉ. बीपी सिंह कल्याणी, सीएमओ