2018 में मिर्ची ने चलाई थी पुलिस पर गोली फिर भी बिना तैयारी दी गई दबिश
निघासन। पढुआ गांव में दबिश देने गई पुलिस को पर्याप्त सुरक्षाबल न होने का खामियाजा भुगतना पड़ा। हिस्ट्रीशीटर की फायरिंग में चौकी इंचार्ज समेत कई लोग घायल हुए और अपराधी भी हत्थे नहीं लगा। बिना तैयारी की गई ऐसी ही कार्रवाई का नतीजा था कानपुर का बिकरू कांड, जिसमें कई पुलिस कर्मियों की जान चली गई थी।वर्ष 2018 में हिस्ट्रीशीटर तौकीर उर्फ मिर्ची ने दबिश के दौरान पुलिस पर गोली चला दी थी। यह जानते हुए भी सोमवार रात दस बजे पढ़ुआ चौकी इंचार्ज अशोक कुमार अपने हमराही सिपाही सौरभ, कृष्ण कुमार और कुछ स्थानीय लोगों के दम पर अपराधी को पकड़ने पहुंच गए। हिस्ट्रीशीटर तौकीर उफ मिर्ची फायरिंग कर आसानी से भाग गया। गनीमत रही कि पुलिस कर्मी मामूली रूप से घायल हुए। घटना बड़ी भी हो सकती थी। क्योंकि जिस अंदाज में मिर्ची ने फायरिंग की। जुलाई 2020 में इसी तरह की फायरिंग में कानपुर के बिकरू गांव में कई पुलिस वालों की जान चली गई थी। अधिकारियों को बिना सूचना दिए इस तरह दबिश देने पहुंच जाना घटना पर भी सवाल खड़ा कर रही है। हालांकि पुलिस अफसर इस इस लापरवाही पर पर्दा डालने में लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर तौकीर उर्फ मिर्ची के घर को घेर लिया। तौकीर ने भागने पर चौकी इंचार्ज अशोक कुमार ने पीछा किया उसने उन्हें गोली चला दी, जिससे वह घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, फायरिंग की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने भी तौकीर का पीछा किया। इसी दौरान गांव निवासी मुन्ना भी घायल हो गया। इसमें एक पुुलिस कर्मी भी घायल हो गया।
स्थिति बिगड़ने के बाद घायल पुलिसकर्मियों ने थाने पर सूचना दी, जिसके बाद मौके पर निघासन थाने से पुलिस फोर्स पहुंची और घायल दरोगा और सिपाही को अस्पताल लेकर गए। सूचना पर करीब साढ़े 11 बजे एसपी विजय ढुल मौके पर पहुंचे। उन्होंने सवा बारह बजे गजियापुर समेत कई जगहों का निरीक्षण किया। इस दौरान घटना को पूरी तरह छिपाने की कोशिश की गई। लेकिन मंगलवार को मामला खुलने के बाद दोनों घायलों का मेडिकल परीक्षण कराया गया और चौकी इंचार्ज की तरफ से तहरीर दिलवाकर मामले में मुकदमा दर्ज करवाया गया।
नहीं किया गया पुलिस रेगुलेशन का अनुपालन
कानून के जानकार बताते हैं कि इस घटना में जो भी कदम उठाए गए। उसमें पुलिस रेगुलेशन का कोई अनुपालन नहीं हुआ। क्योंकि चौकी या थाने से दबिश देने जाने से पहले अधिकारियों को सूचना देकर मयफोर्स दबिश के लिये पहुंचना होता है। यही नहीं, चौकी इंचार्ज ने घटना के अगले दिन जो रिपोर्ट दर्ज करवाई उसमें कहा कि छह सिपाहियों के साथ गश्त पर थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सौरभ और कृष्ण कुमार ही चौकी इंचार्ज के साथ थे, जबकि अन्य सिपाही दूसरी जगह गश्त कर रहे थे।मिर्ची पहले भी कर चुका है चौकी इंचार्ज पर हमला
वर्ष 2018 के एक मामले में तत्कालीन चौकी इंचार्ज नरेंद्र प्रताप सिंह उसे पढुआ साइफन के पास उसे पकड़ने गए थे, जहां पर उसने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी थी, जिससे चौकी इंचार्ज नरेंद्र प्रताप बाल-बाल बच गए थे। मामले में पुलिस ने मिर्ची को पकड़कर उसका चालान भेजा था। हिस्ट्रीशीटर तौकीर उर्फ मिर्ची कई बार वह जेल से छूटा, लेकिन हर बार पुलिस किसी न किसी मामले में उसे जेल भेज देती थी। इस बार वह पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहा। तौकीर पर निघासन में सात, सिंगाही में एक, धौरहरा में एक, बहराइच के मोतीपुर थाने में तीन, सुजौली में दो मुकदमे दर्ज हैं। निघासन थाने में हत्या का प्रयास, लूट, चोरी समेत सात मुकदमे दर्ज हैं।
थाना निघासन में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है। अपर पुलिस अधीक्षक के निरीक्षण में सीओ धौरहरा और सीओ निघासन समेत चार पुलिस की टीमें आरोपी की गिरफ्तारी में जुटी है। चौकी इंचार्ज को छर्रा लगा, जबकि सिपाही को छूकर निकला और दोनों ठीक हैं। - विजय ढुल, एसपी
चोर-चोर की आवाज सुनकर दौड़े
चोर-चोर की आवाज सुनकर दौड़े
जब पुलिस के बीच में फायरिंग हो रही थी तब गांव वालों ने चोर-चोर की आवाज दी और हम दौड़कर आ गए और चौकी इंचार्ज के साथ में भागने लगे। इसी बीच मिर्ची ने फायरिंग कर दी, जिससे हम लोग घायल हो गए हमारे हाथ पैर और पेट समेत आठ छर्रे लगे हैं।- शिवमंगल, घायल
भाई शिवमंगल को भागते हुए देखकर मैं भी उसके पीछे दौड़ा और जब उसने फायर की तो मेरे और शिवमंगल दोनों लोगों को छर्रे लगे। चौकी इंचार्ज अशोक कुमार के बाएं हाथ में एक छर्रा लगा उसके बाद तौकीर भाग गया। - चोंगल, घायल
पढुआ चौकी इंचार्ज अशोक कुमार का कहना है कि वह सिपाही गजेंद्र सिंह, जयनेंद्र सिंह, कृष्णकुमार, सौरभ, कैलाश, संदीप के साथ सोमवार रात करीब साढ़े नौ बजे गश्त पर थे। इसी बीच मुखबिर ने फोन करके बताया कि पढुआ निवासी तौकीर उर्फ मिर्ची गांव के पास एक खंडहर में छुपा है। पुलिस टीम ने घेराबंदी की तो वह भागने लगा। टीम ने उसका पीछा किया तो मिर्ची ने तमंचे से फायर करना शुरू कर दिया, जिससे चौकी इंचार्ज अशोक के बांए हांथ में छर्रे लग गए। सिपाही सौरभ उसे दौड़ाते समय सड़क पर गिर गया, जिससे उसके गले के पास चोट लग गई। फायरिंग की आवाज सुनकर गांव के टीकाराम के पुत्र शिवमंगल, चोंगल, शोभित, मुन्ना आदि आ गए। उन लोगों ने भी उसे पकड़ने की कोशिश की, जिससे शिवमंगल के गले, पेट, और पैर में छर्रे लग गए। चोंगल के बांए कंधे और बांए पैर में छर्रे लग गए। शोभित के कंधे को छूता हुआ छर्रा निकल गया। मुन्ना ने जब उसे दबोच लिया तब उसने तमंचे की बट से सिर पर प्रहार कर घायल कर भाग निकला। चौकी इंचार्ज अशोक की तहरीर पर पुलिस ने धारा 307, 323, 333, 3/7 आईपीसी की धारा में रिपोर्ट दर्ज की है।
मेडिकल रिपोर्ट में छर्रे लगने की बात
शिवमंगल के सीने और पेट, बाईं और दाई जांघ, चोंगल के कंधे, पेट और बाईं तरफ पैर में छर्रे लगे हैं। शोभित के हाथ और मुन्ना के सिर पर हल्की चोट है। मेडिकल के दौरान चौकी इंचार्ज के हाथ में छर्रा नहीं था। उन्होंने रात में ही कहीं से छर्रा निकलवा लिया था। सिपाही सौरभ के कंधे को छर्रा छूकर निकल गया था। सभी को मामूली जख्म है। - डॉ. अनिल वर्मा, सीएचसी निघासनतौकीर पर हत्या समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज
निघासन। मंगलवार को पुलिस ने तौकीर उर्फ मिर्ची के खिलाफ हत्या का प्रयास समेत कई संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस ने तिकुनियां, सिंगाही के अलावा पड़ोसी जनपद बहराइच में भी दबिश दी, लेकिन आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका।पढुआ चौकी इंचार्ज अशोक कुमार का कहना है कि वह सिपाही गजेंद्र सिंह, जयनेंद्र सिंह, कृष्णकुमार, सौरभ, कैलाश, संदीप के साथ सोमवार रात करीब साढ़े नौ बजे गश्त पर थे। इसी बीच मुखबिर ने फोन करके बताया कि पढुआ निवासी तौकीर उर्फ मिर्ची गांव के पास एक खंडहर में छुपा है। पुलिस टीम ने घेराबंदी की तो वह भागने लगा। टीम ने उसका पीछा किया तो मिर्ची ने तमंचे से फायर करना शुरू कर दिया, जिससे चौकी इंचार्ज अशोक के बांए हांथ में छर्रे लग गए। सिपाही सौरभ उसे दौड़ाते समय सड़क पर गिर गया, जिससे उसके गले के पास चोट लग गई। फायरिंग की आवाज सुनकर गांव के टीकाराम के पुत्र शिवमंगल, चोंगल, शोभित, मुन्ना आदि आ गए। उन लोगों ने भी उसे पकड़ने की कोशिश की, जिससे शिवमंगल के गले, पेट, और पैर में छर्रे लग गए। चोंगल के बांए कंधे और बांए पैर में छर्रे लग गए। शोभित के कंधे को छूता हुआ छर्रा निकल गया। मुन्ना ने जब उसे दबोच लिया तब उसने तमंचे की बट से सिर पर प्रहार कर घायल कर भाग निकला। चौकी इंचार्ज अशोक की तहरीर पर पुलिस ने धारा 307, 323, 333, 3/7 आईपीसी की धारा में रिपोर्ट दर्ज की है।
बदमाश पहले भी पुलिस टीम पर कर चुके हैं हमला
- 1- वर्ष 2008 में बेलरायां चौकी इंचार्ज सरवेंद्र यादव एक आरोपी को पकड़ने के लिए थानाक्षेत्र के गांव धरमापुर गए थे। वहां पर आरोपी ने पुलिस टीम पर हमला बोलकर उनकी वर्दी फाड़ दी थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी जेल पहुंचे।
- 2- 2009 में दुबहा गांव में मामूली विवाद में थाने के हलका दरोगा अभिषेक मिश्रा को दुबहा के कुछ लोगों ने दौड़ाकर पीटा था। मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी जेल पहुंचे, अब जमानत पर हैं।
- 3- 2010 में तत्कालीन पढुआ चौकी इंचार्ज को पठानन पुरवा के कुछ लोगों ने दौड़ाकर पीटा था। मुकदमा दर्ज होने के बाद जेल पहुंचे। मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी जेल पहुंचे, अब जमानत पर हैं।
- 4- 2011 में रंजीत मौर्या हत्याकांड में नाराज ग्रामीणों ने ढखेरवा चौकी में आग लगाने के बाद दो पुलिसर्मियों पर हमला बोल दिया था, जिससे उनके सिर फट गए थे। मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी जेल पहुंचे, अब जमानत पर हैं। 5- 2018 में पढुआ चौकी इंचार्ज नरेंद्र प्रताप पर भी हिस्ट्रीशीटर ने हमला बोला था। मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी जेल पहुंचे, अब जमानत पर हैं।
- 6- सितंबर 2019 में मध्यप्रदेश की पुलिस पर प्रतापगढ़ के लोगों ने हमला बोला था, जिसमें एक सिपाही को चोट आई थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी जेल पहुंचे, अब जमानत पर हैं।