कर्मचारी संगठन ने बताया सरकार का तानाशाही रवैया
लखीमपुर खीरी। प्रदेश सरकार द्वारा अगले छह महीने तक राज्य में एस्मा यानी एसेंसियल सर्विसेज मेंटनेंस एक्ट (एस्मा) लगा दिया है, जिससे अब सरकारी कर्मचारी अगले छह महीने तक हड़ताल पर नहीं जा सकेंगे। वहीं, जिले के कर्मचारी संगठनों ने सरकार के इस कदम को अलोकतांत्रिक करार दिया है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का कहना है कि वह एस्मा से डरने वाले नहीं हैं। कोरोना महामारी के बाद हालात सामान्य होने पर अपनी मांगों को जोरदार तरीके से रखेंगे। परिषद के जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद पुष्कर का कहना है कि कर्मचारियों ने मतगणना का विरोध कर उसे कुछ समय टालने की मांग उठाई थी, लेकिन सरकार ने हाईकोर्ट को गुमराह कर मतगणना करवा ली। मतगणना के दौरान गाइडलाइन का पालन नहीं हुआ, जिससे हजारों कार्मिक संक्रमित होकर अपनी जान गंवा बैठे। मृतकों के आश्रित परिवारों को आर्थिक सहायता व मृतक आश्रित नौकरी की मांग से घबराई सरकार ने कर्मचारियों, शिक्षकों व अधिकारियों का विरोध न झेलना पड़े इस कारण सरकार एस्मा लगाकर प्रतिबंधित कर रही है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद जनपद के लगभग 57 संगठनों का वृहद संगठन हम है। कोरोना महामारी हटने के बाद हम एस्मा को कुछ नहीं मानेंगे और कार्मिकों की मूलभूत मांगों को लेकर हम एस्मा को तोड़ देंगे। कर्मचारी विरोधी सरकार कार्मिकों को डराने धमकाने का प्रयास कर रही है।
- राजेंद्र प्रसाद पुष्कर, जिलाध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद
सरकारी कर्मचारी अभी कोई आंदोलन नहीं कर रहे हैं। हम लोग डीए की मांग कर रहे हैं, जिसको दरकिनार कर सरकार ने तीसरी बार एस्मा लगा दिया। जैसे ही हम लोग कुछ सरकार से मांग करते हैं, सरकार एस्मा लगा देती है।
- संजीव त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष कर्मचारी शिक्षक अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच
23 अप्रैल को सबसे पहले हमने मतगणना का विरोध किया था। हम लोगों ने अपनी मांगों की सूची सौंपी थी, सबकी सूची 1500 लोगों की है। इसलिये सरकार ने घबराकर एस्मा लगाया है। यह सरकार का तानाशाही रवैया है।
- संतोष मौर्य, जिलाध्यक्ष/ प्रदेश संयुक्त महामंत्री, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ