शिक्षक परिवार की पीड़ा : बेटे ने कहा-मां ने तेज बुखार में की थी ब्लॉक पलिया के महंगापुर मतदान केंद्र पर ड्यूटी
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमित हुईं कस्बे के प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षिका भारती निषाद की इलाज के दौरान 28 अप्रैल को मौत हो गई। उनके बड़े पुत्र दिव्यांश कुमार का आरोप है कि समय पर कोरोना जांच न होने और इलाज में लापरवाही बरते जाने के कारण उनकी मां की मौत हुई है।
बेटे दिव्यांश ने बताया कि भारती निषाद (53) हाई ब्लडप्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित थीं। पंचायत चुनाव के दौरान उनकी ड्यूटी ब्लॉक पलिया के महंगापुर मतदान केंद्र पर लगाई गई। भारती निषाद ने अपनी बीमारी का हवाला देते हुए चुनावी ड्यूटी से मुक्त करने का अनुरोध किया था, लेकिन अफसरों ने उनकी नहीं सुनी। लिहाजा उन्हें बीमारी के बावजूद चुनाव ड्यूटी करनी पड़ी। इसी दौरान वह कोरोना संक्रमित हो गईं।
ड्यूटी के दौरान मतदान केंद्र पर ही अचानक उन्हें तेज बुखार के साथ सांस लेने में दिक्कत महसूस होने पर उनकी तबीयत बिगड़ गई। बावजूद इसके उन्होंने अपना फर्ज निभाते हुए चुनावी ड्यूटी पूरी की। वहां से लौटने के बाद उन्हें इलाज के लिए पहले गोला सीएचसी ले जाया गया, जहां उनकी कोरोना जांच करने के बजाए सिर्फ ऑक्सीजन लेवल चेक कर उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में भी न उनकी कोरोना जांच कराई गई और न ही इलाज में गंभीरता दिखाई गई।
शिक्षिका के दूसरे पुत्र शिवांश कुमार ने बताया कि हालत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के कमांड हास्पिटल में भर्ती कराया गया। कोरोना जांच में वह एक्यूट पॉजिटिव निकलीं। कमांड हास्पिटल में कोरोना बेड न होने के कारण मां को मिलिट्री के बेस हास्पिटल में शिफ्ट किया गया। वहां इलाज के दौरान ही 28 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। उनके पुत्र का आरोप है कि चुनाव ड्यूटी से लेकर जांच और इलाज तक में भारी लापरवाही बरती गई। यदि उनकी जांच समय पर हो जाती और कोरोना का इलाज शुरू हो जाता तो उनकी जान बच सकती थी। यहां बता दें कि भारती निषाद मूल रूप से गोला की रहने वाली थीं। अपनी नौकरी के 15 वर्ष तक का कार्यकाल उन्होंने खीरी जिले में ही बिताया। उनके पति सुरेश कुमार एयर फोर्स में थे। पति का देहांत सात साल पहले हो चुका है।
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