आदेश से एक बार फिर शादी वाले घर और कारोबारी असमंजस में
लखीमपुर खीरी। बढ़ते कोराना संक्रमण के बीच शासन ने जहां शादी समारोह में शामिल होने वाले लोगों की संख्या सीमित कर दी है, वहीं इस आदेश से शादी वाले घर समेत आयोजक और कारोबारी असमंजस में हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत उन लोगों के सामने है, जिनके यहां आज कल में शादियां हैं और मेहमानों को कार्ड भी बंट चुके हैं। इन सब के मन में इस बात की उधेड़बुन है कि दो दिन बाद शादी है अब किस मेहमान को आने के लिए कहें और किसे न।
शर्तों से सहालग कारोबारियों के आगे भी रोजी रोटी का संकट
शादी एक ऐसा समारोह है जिससे हर तरह के कारोबारी जुड़े होते हैं। कार्ड छपाई से लेकर होटल, गेस्ट हाउस, टेंट, लाइट, डीजे, फूलों की सजावट, बैंड बाजा, वेेटर, हलवाई सहित कपड़ा, गहने, ब्यूटी पार्लर आदि तमाम तरह से लोग इससे जुड़े होते हैं। इसके अलावा कई अन्य लोगों को भी रोजगार मिलता है। एक दिन में कई समारोह होने से सैकड़ों घरों की रोजी-रोटी चलती है। पर अब 25 की संख्या निर्धारित होने का सीधा असर इन सब पर पड़ रहा है, क्योंकि तमाम लोग बुकिंग रद्द करा दे रहे हैं या फिर तारीख आगे बढ़ा दे रहे हैं।
नियम के उल्लंघन से पड़ सकते हैं मुसीबत में
हिंदू रीति रिवाज में शादी में सात फेरे लेकर सात वचन निभाने की रस्म है। मगर, अब इन सात वचनों के साथ सरकारी वचन को भी निभाना होगा, क्योंकि इसका उल्लंघन हर तरह से मुसीबत में डाल सकता है। सबसे बड़ा वचन है 25 लोगों की संख्या। इसमें दूल्हा दुल्हन भी शामिल हैं। वहीं होटल, मैरिज लॉन एवं केटरर का कहना है कि जब संख्या सीमित है तो हमारा काम ही क्या होगा।
संख्या सीमित होने से सैकड़ों लोगों का रोजगार छिना
शहर में करीब 70 से 80 होटल और मैरिज लॉन हैं। हर जगह कम से कम आठ से दस कर्मचारी हैं, जिनकी सैलरी पर ही एक से डेढ़ लाख रुपये हर माह खर्च होता है। कर्फ्यू के चलते लगी पाबंदी के कारण होटल एवं मैरिज लॉन वालों के सामने इन्हें वेतन देने तक के लाले पड़ रहे हैं। इनका कहना है कि जब संख्या 25 होने पर लोग बुकिंग रद्द कर घर में ही काम निपटा रहे हैं तो हम कर्मचारियों को पगार कहां से दें।
पहले से आधी हुई संख्या
कोरोना के कारण शासन ने पहले खुले स्थानों पर 100 और बंद जगहों पर 50 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी थी। मगर अब कोरोना की दूसरी लहर के कहर को देखते हुए योगी सरकार ने समारोह में शामिल होने वालों की संख्या में कटौती कर दी है। अब खुली जगह हो या फिर बंद, हर जगह सिर्फ 25 लोगों के ही शामिल होने की शर्त है। यह संख्या सिर्फ मेहमानों के लिए है। वहीं समारोह में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होगा।
जिले में होटल- 55
मैरिज लॉन- 200
कर्फ्यू ने चौपट किया होटल कारोबार
अप्रैल से जुलाई तक 30-32 बुकिंग थी। अप्रैल, मई की सब रद्द हो र्गइं। जून में दो व जुलाई में तीन-चार बुकिंग हैं। जो अभी रद्द नहीं हैं। यह लोग भी हालात सुधरने का इंतजार कर रहे हैं। कोरोना ने तो सहालग कारोबार को ही चौपट करके रख दिया।
- विवेक कपूर, मालिक कंफर्ट इन होटल
कर्मचारियों को कहां से दें पैसा
अप्रैल और मई में मिलाकर करीब 15 बुकिंग थीं। इसमें से अप्रैल में तीन में ही काम हुआ। मई में अब तक एक ही विवाह हुआ है, जबकि अन्य रद्द हो गए। ऐसे में कर्मचारियों को पैसा देने तक के लाले पड़े रह हैं। यही काम धाम का सीजन था, जो कोरोना की भेंट चढ़ गया।
- योगेश जोशी, सौभाग्य मैरिज हाल
कैसे मना करें कि भाई बारात में न चलना
24 मई को भतीजे की बारात जानी है। निमंत्रण पत्र बंट चुके हैं। अब शासन ने 25 की शर्त रख दी है। बारात के लिए वाहन और रोड लाइट, बैंड बाजा बुक कर एडवांस भी दे दिया था, जो संख्या निर्धारित है उससे ज्यादा तो घर में ही लोग है। अब कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
- कमलेश वर्मा, मोहम्मदी
रोजी रोटी की सता रही चिंता
पिछले साल करीब 30 और इस वर्ष लगभग 35 बुकिंग थीं। पिछले साल सिर्फ तीन-चार और इस बार केवल दो-तीन ही काम हुए। संख्या सीमित होने से लोग बुकिंग रद्द कर दे रहे हैं या फिर घर पर ही निपटा ले रहे हैं। काम धंधा न चौपट होने से रोजी रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।
- सुशील गुप्ता, हलवाई