Lakhimpur Kheri : प्रसूता की मौत पर अस्पताल में परिवार वालों का हंगामा

𝐤𝐮𝐬𝐡𝐚𝐥 𝐕𝐞𝐫𝐦𝐚
उपचार के दौरान लापरवाही बरतने और कोई कागज न देने का लगाया आरोप
गोला गोकर्णनाथ। लखीमपुर रोड स्थित माया अस्पताल में भर्ती एक प्रसूता की ऑपरेशन के बाद हालत बिगड़ने से मौत हो गई। परिजन का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से प्रसूता की जान गई। वहीं उन्हें उपचार संबंधी कागजात भी नहीं दिए गए हैं। इस बात कर अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ। इस मामले में सीएमओ से कार्रवाई करने की मांग की गई है।
बिजुआ निवासी सत्यनारायण वाजपेयी ने बताया कि 25 मई को उनकी 30 वर्षीय गर्भवती पत्नी रुचि और सास को दो आशाओं ने बहलाकर माया अस्पताल में भर्ती करवा दिया। 25 मई की रात करीब एक बजे बिना किसी जांच और रिपोर्ट देखे ऑपरेशन कर प्रसव करा दिया गया। 26 मई की सुबह रुचि की हालत बिगड़ गई। तबीयत खराब है, कहकर अस्पताल स्टाफ ने परिवार वालों को शांत कर दिया। बताते हैं कि रात दो बजे रुचि की हालत और भी अधिक गंभीर हो गई। अस्पताल के कर्मचारियों ने पत्नी को गंभीर अवस्था में प्राइवेट वैन में लादकर लखनऊ ले जाने को कहा। लखीमपुर में रुचि को दूसरी एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया, जो हरगांव में खराब हो गई। उसके बाद तीसरी प्राइवेट एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया। मरीज की हालत गंभीर देख रास्ते में नेपालापुर के दो अस्पतालों में दिखाया तो बताया कि मरीज की काफी समय पहले ही मौत हो चुकी है।

आरोप है कि 26 मई से अस्पताल के डॉक्टर का मोबाइल भी बंद जा रहा है। परिजन का कहना है कि अस्पताल से इलाज और प्रसव संबंधी कोई कागज भी नहीं दिए गए हैं। मृतका के पति ने सीएमओ से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
प्रसूता को जब भर्ती कराया गया तो परिवार वालों ने उसके हार्ट पेशेंट होने की जानकारी नहीं दी। प्रसव के बाद उसे दिल का दौरा पड़ा, इसलिए रेफर किया गया। रास्ते में मौत हुई होगी। अस्पताल में कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
- डॉ. रोहित कुमार, माया हॉस्पिटल, गोला
मामले की जानकारी तो हुई है, लेकिन अभी कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन है। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

- डॉ. गणेश कुमार, प्रभारी, पीएचसी कुंभी
नगर में प्राइवेट अस्पतालों की भरमार
नगर में प्राइवेट अस्पतालों की भरमार है। प्रमुख मार्गों से लेकर गली कूचे तक में प्राइवेट अस्पताल खुले हैं। अधिकांश के पास न तो रजिस्ट्रेशन हैं और न ही कोई डॉक्टर। इन अस्पतालों में पीड़ितों की शिकायत पर अधिकारी जांच कर पल्ला झाड़ लेते हैं। सूत्र बताते हैं कि आशाओं को निजी अस्पताल में प्रसव कराने पर पांच से 10 हजार रुपये तक मिलते हैं।

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