एआर कॉपरेटिव के ट्रांसफर के बाद बस्तौली में फिर से शुरू कराई गई गेहूं खरीद
लखीमपुर खीरी। लखीमपुर की राजापुर मंडी में 1800 क्विंटल गेहूं की बरामदगी के बाद धीरे-धीरे किसान भी खुलकर गेहूं खरीद में कमीशनबाजी के खेल को उजागर करने लगे हैं। मैगलगंज मंडी के बाद अब पलिया मंडी में भी किसानों ने खरीद के दौरान कमीशनबाजी की बात कही है। उधर, कमिश्नर से शिकायत के बाद हफ्ते भर बाद गोला तहसील के बस्तौली निवासी किसान आशीष तिवारी को कमीशनबाजी से मुक्ति मिली है। उन्हें बिक्री किए गए गेहूं का पूरा भुगतान मिल गया है, जबकि वहीं बस्तौली में बंद पड़ी खरीद भी शुरू करवा दी गई है। अमर उजाला द्वारा मुद्दा उठाए जाने पर किसान आशीष तिवारी ने अमर उजाला को धन्यवाद कहा है।
27 मई को राजापुर मंडी में सरकारी बोरों में लावारिस मिले 1800 क्विंटल गेहूं के बाद अमर उजाला ने जनपद की अन्य मंडियों में गेहूं की पड़ताल की तो 28 मई को मैगलगंज कृषि मंडी में गेहूं बेचने के लिए कई दिनों से डटे किसानों ने बारदाना छुपाकर रखने की बात का खुलासा किया। 29 मई को खबर प्रकाशित होने के बाद किसान खुलकर सामने आ गए। उन्होंने गेहूं खरीद में उनसे प्रति क्विंटल छह किलो गेहूं की कमीशनबाजी का खुलासा किया, जबकि 30 मई को पलिया कृषि मंडी में भी क्रय केंद्र बंद मिलने की जानकारी मिली और पलिया क्षेत्र के किसानों ने भी स्वीकारा कि गेहूं खरीद के दौरान उनसे प्रति क्विंटल 80 से 100 रुपये लिये गए हैं।
उधर, गोला तहसील के बस्तौली के किसान आशीष तिवारी ने भी कमीशनबाजी का खेल उजागर करते हुए 18 मई को कमिश्नर से शिकायत की थी, जिसके बाद अब उनको गेहूं बिक्री का पैसा बिना कोई कमीशन दिए ही मिल गया और एआर कॉपरेटिव का ट्रांसफर कर बस्तौली में फिर से गेहूं खरीद शुरू करा दी गई है। अमर उजाला ने 20 मई को इस आशय की खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद आशीष तिवारी ने अमर उजाला को भी धन्यवाद दिया।
80 रुपये प्रति क्विंटल खर्चा मांगने का लगाया था आरोप
मोहम्मदी। तहसील गोला गोकर्णनाथ के गांव बस्तौली निवासी आशीष तिवारी ने मई के पहले हफ्ते में अपने 56 क्विंटल गेहूं की तौल बस्तौली एफसीआई सेंटर पर करवाई थी। आरोप है कि सचिव उससे 80 रुपये प्रति क्विंटल का खर्चा मांग रहे थे, जिसकी शिकायत उसने एआर कॉपरेटिव से की थी, जिस पर एआर कॉपरेटिव उल्टा उस पर ही भड़क उठे और सेंटर बंद करवा दिया।
18 मई को जब कमिश्नर रंजन कुमार और डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह मियांपुर का निरीक्षण करने के बाद शाहपुर राजा पहुंचे तो आशीष तिवारी ने कमिश्नर को अपनी कहानी सुनाई थी। कमिश्नर ने डीएम से मामले में उचित कार्यवाही की बात कही थी, जिसके बाद एआर कोऑपरेटिव का ट्रांसफर कर दिया गया और किसान आशीष तिवारी को सरकारी मूल्य के हिसाब से पूरा भुगतान प्राप्त हो गया।
पलियाकलां। पलिया मंडी के चार सेंटरों पर खरीद हो रही है, जबकि अन्य दो सेंटरों पर गेहूं खरीद बंद कर दी गई है। बताया गया कि शासन द्वारा दो केंद्र बंद किए गए हैं। वहीं, किसानों का कहना है कि प्रति क्विंटल 80-100 रुपये की वसूली की जा रही है, जिसके बाद ही किसानों का गेहूं क्रय किया जा रहा है। कई किसानों ने यह भी स्वीकार किया है कि उन्होंने क्रय केंद्रों पर रुपये भी दिए, जिसके बाद ही उनका गेहूं खरीदा गया।
मंडी आने वाले कई किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां पर कई-कई दिन खड़े होने के बाद ही तौल होती है। बताया कि बीते दस दिनों में कई किसानों को काफी दिनों तक खड़ा रहना पड़ा, जिसके बाद ही उनके गेहूं की तौल हो सकी।
एफएससी के दो केंद्र में ठप है तौल
एफएससी के प्रभारी जसवंत सिंह ने बताया कि 25 मई को सभी सेंटरों के कांटे बंद कर दिए गए थे। उनके दो कांटे भी बंद हो गए थे। इसके बाद दो दिन पूर्व ही सभी कांटे खुले, लेकिन उनके दो कांटे अभी भी बंद हैं। कुछ किसानों की फीडिंग भी नहीं हो पाई है, जिससे वह चक्कर लगा रहे हैं। सोमवार या मंगलवार से कांटा खुलने की उम्मीद है।
खुले में रखा गेहूं, खा रहे हैं मवेशी
पलिया। सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर तौल होने के बाद केंद्रों के बाहर खुले में गेहूं रख दिया गया है। मंडी के गोदाम से एसडीएम आवास की तरफ जाने पर दो केंद्र स्थित हैं। यहां एक केंद्र के बाहर गेहूं लगा हुआ है, जिसमें रविवार को सरकारी बोरियों में रखा हुआ यह गेहूं मवेशी खाते नजर आए। मवेशियों को हटाने के लिए भी वहां पर कोई मौजूद नहीं था।
क्या कहते हैं किसान
करीब पंद्रह दिन पूर्व हम अपना गेहूं लेकर पलिया मंडी गए थे। जहां आठ दिनों तक वह इंतजार करते रहे और एक दिन बीच में बारिश होने के चलते उनका आधे से ज्यादा गेहूं भी भीग गया। जिससे दोबारा सुखाकर तब गेहूं बेचना पड़ा है। - कुमार शेखर, पढुवा
पलिया मंडी में कुछ दिन पूर्व ही हम गेहूं बेचने गए थे, जहां प्रति क्विंटल 100 रुपये कमीशन मांगा गया। जब मैंने उनके सामने काफी विनती की तो मुझसे 75 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से लेकर गेहूं खरीदा गया। उसके बाद भी दो दिन बाद गेहूं तौला गया।
- सतेंद्र कुमार शुक्ला, पढुवा
गेहूं क्रय केंद्र पलिया मंडी में अपना गेहूं लेकर गया था, जहां पर मुझसे ऑनलाइन चढ़वाकर आने को कहा गया। जब कुछ दिन बाद ऑनलाइन चढ़वाकर ले गया तो मुझसे कहा गया कि अभी आपका गेहूं नहीं खरीदा जाएगा, पांच दिन बाद आना। मैंने परेशान होकर आढ़ती के यहां औने-पौने दामों पर गेहूं बेंचा।
-कुलदीप यादव, त्रिकोलिया
पलिया मंडी स्थित गेहूं क्रय केंद्र पर गेहूं लेकर गया था। जहां प्रति क्विंटल के हिसाब से सेंटर पर 80 रुपये मांगे गए जब मैंने रुपये देने से इंकार कर दिया तो गेहूं भीगा होने की बात कहकर मेरा गेहूं लेने से ही मना कर दिया गया, जिसके बाद आढ़ती के हाथों अपना गेहूं बेचा है।
- मोनू सिंह, निवासी पलिया
दो क्रय केंद्रों के कांटें बंद होने की हमें कोई जानकारी नहीं मिली है। अगर ऐसा है तो उसको दिखवाया जाएगा कि आखिर कांटे क्यों बंद हैं। रही बात प्रति क्विंटल के हिसाब से रुपये लेने की, तो अभी तक ऐसी शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलने पर क्रय केंद्र के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. अमरेश कुमार, एसडीएम पलिया