कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर एक एडीजे और दस अधिवक्ता गवां चुके हैं जान
विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सिर्फ जरूरी मामलों की हो रही सुनवाई लखीमपुर खीरी। कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर जनपद में जहां एक अपर जिला जज (एडीजे) और दस अधिवक्ता अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं संक्रमण के कारण अदालती सुनवाई पर भी रोक लग गई है। संक्रमण की वजह से खीरी में सवा लाख से अधिक मुकदमे लंबित हैं। अभी केवल बेहद जरूरी मामलों की ही सुनवाई हो रही है।
क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रदेश के सबसे बड़े जिले में कोविड-19 संक्रमण ने अदालत की व्यवस्था पर अंकुश लगा दिया है। संक्रमण की चपेट में आकर अपर जिला जज राजेश कुमार और कर्मचारी मतीन बाबू की जान चली गई है, जबकि अब तक 32 न्यायिक कर्मचारी और दर्जन भर न्यायिक अधिकारी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। बीते तीन महीनों में दस अधिवक्ताओं की मौत हो चुकी है।
यही कारण है कि हाईकोर्ट ने केवल विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बेहद जरूरी मामलों की सुनवाई कराने के आदेश दिए हैं, जिसके चलते जिला जज मुकेश मिश्र ने प्रतिदिन जमानत, रिमांड और रिलीज के मामलों की सुनवाई के लिए एक अपर जिला जज और एक न्यायिक मजिस्ट्रेट को जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अलावा हाजिरी, गवाही और बहस आदि के लिए सुनवाई के बजाय सीधे सामान्य तिथियां दी जा रही हैं। संक्रमण के चलते जहां आम जनमानस की आमदनी प्रभावित हुई है और लोगों की खाना खर्च की दिक्कतें बढ़ी हैं। अदालत में नए भरण पोषण के मामलों में भी सुनवाई नहीं हो पा रही है।
यहां बता दें कि फौजदारी के 68,240, दीवानी अदालतों में 23,806, पारिवारिक न्यायालय में 8,350, 138 एनआई एक्ट, एमवी एक्ट, पुलिस एक्ट और आबकारी के मामलों को मिलाकर करीब एक लाख मुकदमे लंबित हैं। इसके अलावा जिला उपभोक्ता फोरम राजस्व अदालतों और मोटर वाहन दुर्घटना प्रतिकर अधिकरण में लंबित मुकदमों को जोड़कर करीब सवा लाख से अधिक मामलों में कोरोना संक्रमण के चलते कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पा रही है।
कोविड-19 संक्रमण के चलते हाईकोर्ट के आदेश पर केवल अर्जेंट मामलों की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हो रही है। जिला जज मुकेश मिश्र के आदेश पर प्रतिदिन एक अपर जिला जज और एक न्यायिक मजिस्ट्रेट की तैनाती होती है, सामान्य मामले में सुनवाई के बजाए अग्रिम तारीख में दी जा रही है। - अविनाश चंद्र गौतम, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण
छिन गया परिवार का सहारा
पीड़ित परिवार को तीन-तीन लाख की मदद
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष जंग बहादुर सिंह और महामंत्री अजय कुमार पांडे ने बताया कि तीन मार्च को मनोज शर्मा, 15 अप्रैल को आशुतोष मिश्र, 16 अप्रैल को सुधीर पांडे, 20 अप्रैल को सतीश दत्ता, कमलेश कुमार बाजपेई, शिवराम सिंह चौहान, 26 अप्रैल को रमेश कुमार, 27 अप्रैल को वेद प्रकाश श्रीवास्तव, सात मई को उपेंद्र मनार और सुधीर मिश्रा और 18 मई को योगेश पांड्या का निधन हो चुका है। अधिकतर अधिवक्ताओं के परिजन को तीन-तीन लाख रुपये की सहायता राशि दी जा चुकी है। इसके अतिरिक्त बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से 70 साल से कम आयु वाले वकीलों को 5 लाख रुपये और 70 साल से अधिक आयु वाले दिवंगत वकील साथियों के परिजन को डेढ़ लाख रुपया की सहायता के लिए संस्तुति की जा रही है। उन्होंने बताया कि कचहरी के न्यू एडवोकेट चैंबर में कोविड सेंटर स्थापना को लेकर जिला अधिवक्ता संघ की पहल पर एक महीना पहले प्रशासन ने स्वास्थ्य महानिदेशक से अग्रिम दिशा निर्देश मांगे थे, लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिल सकी है।मुकदमों की सुनवाई न होने से बंदियों की संख्या बढ़ी
मुकदमों की सुनवाई नियमित तरीके से न हो पाने के कारण जिला जेल में बंदियों की संख्या 1500 से बढ़कर 1750 हो गई थी, मगर हाईकोर्ट के निर्देश पर दो महीने के लिए पैरोल पर छोड़े गए 124 बंदियों के बाद अब बंदियों की औसतन संख्या 1620 हो चुकी है।छिन गया परिवार का सहारा
गोला निवासी अधिवक्ता रमेश कुमार की पत्नी सीमा रानी ने बताया कि 22 अप्रैल को कचहरी से आने के बाद पति रमेश कुमार की तबीयत बिगड़ती चली गई। सांस लेने में दिक्कत, बुखार, बलगम, खांसी सारे लक्षण होने के बावजूद भी डॉक्टरों ने कोविड-19 संक्रमण से मृत्यु नहीं लिखा है।
निघासन के रहने वाले अधिवक्ता उपेंद्र मनार की पत्नी साधना सिंह ने बताया कि परिवार में छोटे-छोटे बच्चे हैं। दिवंगत पति के जाने के बाद की दुनिया वीरान हो गई है। कोविड-19 संक्रमण से मौत के बावजूद कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। केवल जिला अधिवक्ता संघ की ओर से सहायता मिली है।
निघासन के रहने वाले अधिवक्ता उपेंद्र मनार की पत्नी साधना सिंह ने बताया कि परिवार में छोटे-छोटे बच्चे हैं। दिवंगत पति के जाने के बाद की दुनिया वीरान हो गई है। कोविड-19 संक्रमण से मौत के बावजूद कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। केवल जिला अधिवक्ता संघ की ओर से सहायता मिली है।