21,226 जिंदगियां बाढ़ के पानी से घिरीं, किसानों की फसलों का भी भारी नुकसान
लखीमपुर खीरी। शारदा व घाघरा नदियों में आई बाढ़ के कारण जनपद के 123 गांव प्रभावित हुए हैं, जबकि चार गांवों के संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में कट गए हैं। इन गांवों के लोग नाव के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं। 21,226 लोग बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं, जिन्हें संक्रामक बीमारियों का डर सता रहा है। मानसून की शुरूआत में ही 6462 हेक्टेअर फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। पीड़ितों को प्रशासन की तरफ से कोई राहत नहीं मिली है।
तहसील पलिया, निघासन, धौरहरा और लखीमपुर क्षेत्र में बाढ़ का प्रभाव बना हुआ है। एक जून से अब तक जनपद में 342.1 मिमी बारिश हो चुकी है। वहीं पहाड़ों पर होने वाली अत्यधिक वर्षा के कारण बनबसा बैराज से छोड़ा गया पानी शारदा व घाघरा नदियों के जरिए तबाही मचा रहा है। रविवार को शारदा बैराज पर जलस्तर खतरे के प्वाइंट 135.49 के सापेक्ष 134.35 मिमी रहा, जबकि घाघरा बैराज पर जलस्तर खतरे के निशान 136.78 के सापेक्ष 134.90 मिमी पर रहा।
साफ है कि पिछले दो-तीन दिनों में बारिश थमने से जलस्तर में कमी आई है, जिससे प्रशासन समेत ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हालांकि खतरा अभी टला नहीं है, क्योंकि जुलाई और अगस्त में अत्यधिक बारिश होती है, जिससे बाढ़-कटान की विभीषिका विकराल रूप धारण करती है। लिहाजा जून की बाढ़ ने प्रशासन की तैयारियों को और पुख्ता करने का मौका दिया है। क्योंकि बाढ़ के दौरान लोगों तक सहायता पहुंचाने में प्रशासन विफल रहा है। इस बार आई बाढ़ में एक व्यक्ति की जान जा चुकी है। कुल 7715 हेक्टेअर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है, जिसमें कृषि योग्य भूमि 6752 हेक्टेअर और 6462 हेक्टेअर फसलें प्रभावित हुई हैं। तहसील प्रशासन द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक किसानों को 208.49 लाख का नुकसान हुआ है। आठ पक्के मकान ढह गए हैं। पांच झोपड़ियां नष्ट हो चुकी हैं।
40 बाढ़ चौकी और मेडिकल टीम राहत पहुंचाने में लगीं
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 40 बाढ़ चौकी स्थापित की गई हैं और इतनी ही मेडिकल टीम लगाई गई है। बाढ़ से घिरे गांवों में नाव ही पहुंचने का एकमात्र विकल्प है। अब तक 51 नावें लगाई गई हैं। एडीएम अरुण कुमार सिंह ने बताया कि बचाव कार्य के लिए फ्लड पीएसी की दो टीमें लगाई गई हैं। 799 लोगों का उपचार किया जा चुका है। 2650 लोगों को अनाज किट बांटी जा चुकी हैं।
कटान थमता देख ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
महेवागंज। बनबसा डैम से छोड़े गए अतिरिक्त पानी से उफनाई शारदा नदी में बाढ़ का पानी कम होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, चार दिन बाद बाढ़ का पानी उतरने के साथ कटान पर भी ब्रेक लग गया। निघासन तहसील के लेखपाल श्याम नंदन मिश्रा ने बताया कि बाढ़ से ग्रंट 12 गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। गांव की आबादी ढाई हजार है। मंझरी में 13 घर नदी में समा चुके है। फिलहाल इस वक्त नदी शांत है। अब तक 690 लोगों को राशन, त्रिपाल आदि राहत किट दी गई है। संवाद
तेज कटान से सैकड़ों बीघा जमीन नदी में समाई
धौरहरा। रमियाबेहड़ क्षेत्र में घाघरा नदी सुजानपुर, देवीपुरवा, मोटेबाबा, बिंजहा, बाछेपारा, रामनगर बगहा, घोसियाना, लालापुर, गोडियन पुरवा आदि गांवों में तेजी से कटान कर रही है। वहीं शारदा नदी डेबर, खनवापुर, खड़वा, चिकनाजती में कटान कर रही है। अब तक किसानों की सैकड़ों बीघा फसल लगी जमीन को शारदा व घाघरा नदी निगल चुकी है। वहीं रामनगर बगहा गांव में बाढ़ खंड द्वारा कराए गए कार्य को नदी ने काटना शुरू कर दिया है, जिससे बचाव के लिए विभाग बोरियों में खड़ंजा भरकर कटान रोकने का प्रयास कर रहा है। तहसीलदार धौरहरा अनिल यादव ने बताया कि बाढ़ से पीड़ितों को लेखपाल के माध्यम से राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है और कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड विभाग से कहा गया है। लेखपालों को भेज कर जमीन कटान का सर्वे कराया जा रहा है। संवाद
बाढ़ से 123 गांव हुए प्रभावित, चार गांवों के संपर्क मार्ग कटे
June 27, 2021