नालों से निकालकर डाला गया मलबा बना लोगों की मुसीबत

𝐤𝐮𝐬𝐡𝐚𝐥 𝐕𝐞𝐫𝐦𝐚
लखीमपुर खीरी। बारिश में कराई जा रही नालों की सफाई से निकलने वाला मलबा लोगों की परेशानी का सबब बनता जा रहा है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि जहां भी नालों की सफाई हो रही है वहां से निकलने वाला मलबा तुरंत हटाए जाने के बजाय सड़क पर ही छोड़ दिया गया है, जिससे कई स्थानों पर यातायात भी बाधित हो रहा है। खास यह है कि क्षेत्र में लगभग लगातार चल रही बारिश के कारण सड़क पर पड़ा मलबा फिर नालों में बह जा रहा है।
शहर को साफ सुथरा रखने के लिए न तो सफाई कर्मचारियों की कमी है और न ही जरूरी संसाधनों की। बावजूद इसके नाले-नालियों की स्थिति पिछले सालों की तरह जस की तस है। नगर पालिका के पास नियमित और संविदा से लेकर ठेके पर करीब 550 सफाई कर्मचारी सहित पांच सफाई नायक हैं। संसाधनों की भी कमी नहीं है। बावजूद इसके न तो समय रहते नाले नालियों की सफाई होती है और न ही कूड़ा उठता है। इस कारण हर साल नगरवासियों से लेकर जिला मुख्यालय पर अस्पताल, कचहरी, विकास भवन आदि के लिए आने वालों को बारिश के दौरान हो रहे जलभराव का सामना न करना पड़ता है।

पिछले कई दिनों से लगभग लगातार हो रही बारिश के कारण जब सड़कें और गलियां तालाब का रूप लेने लगीं तो पालिका प्रशासन को प्रमुख 32 नालों की सफाई की सुध आई। लगभग 15 दिनों से शहर में कई स्थानों पर नाला सफाई कराई जा रही है, लेकिन निकलने वाला मलबा तुरंत हटाए जाने के बजाय सड़क पर ही छोड़ दिया जा रहा है, जो लोगों की परेशानी का सबब बन रहा है। बारिश होने के बाद यह मलबा वापस नालों में ही चला जा रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण खीरी रोड पर नाले से निकालकर डाला गया मलबा है। लोगों का कहना है कि पालिका प्रशासन के पास कोरोना कर्फ्यू के एक माह का स्वर्णिम अवसर था। पूरा शहर बंद रहा। इस दौरान नाले-नालियों की विधिवत सफाई हो सकती थी। मगर, तब किसी ने ध्यान नहीं दिया।
नाले-नालियों की साफ सफाई बद से बदतर है। एक तो इनकी ढंग से सफाई नहीं होती। दूसरे सफाई के बाद समय से मलबा नहीं उठता। ऐसे में बारिश के दौरान वह फिर से नाले में समा जाता है। पहले नाले से निकालकर डाला गया मलबा लोगों के लिए मुसीबत बनता है और उसके बाद बारिश से होना वाला जलभराव।
- डॉ. विजय प्रकाश वर्मा, निवासी सीतापुर रोड
शहर की सफाई का हाल बारिश के दौरान देखने को मिलता है। कुछ देर की बारिश में ही सड़कें और गलियां तालाब बन जाती हैं। बस अड्डे के सामने तक पानी भर जाता है। ऐसे में यात्रियों को आने जाने में दिक्कत होती है। मगर, जलभराव से निजात दिलाने के लिए कोई ध्यान नहीं दे रहा।
- विकास अवस्थी, रोडवेज बुक स्टॉल
नाला सफाई का हाल हर साल ऐसा ही रहता है। वैसे अप्रैल, मई में नालों की सफाई हो जानी चाहिए थी, क्योंकि गर्मी के कारण मलबा जल्दी सूखता है, जिसे उठाने में दिक्कत नहीं रहती। मगर, इस समय मलबा निकालकर डाल देने के बाद बारिश हो जाने पर वह फिर से नालों में चला जाता है।
- शारिक खान, सभासद मोहल्ला नई बस्ती
पूरे साल नगर पालिका नालों की सफाई कराती है और बारिश से पहले फिर से नाला सफाई पर लाखों रुपये खर्च करती है। मगर, साफ सफाई का नतीजा सबके सामने है। हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद नगरवासियों को बारिश में जलभराव की समस्या झेलनी पड़ती है।
- नईम खान, पूर्व सभासद मोहल्ला हिदयातनगर
नालों पर अतिक्रमण होने के कारण सफाई में दिक्क्त होती है। सफाई कर्मचारियों को लोग नालों पर पड़े पत्थर तक नहीं उठाने देते। कुछ लोगों ने नालों पर ही पक्का कब्जा कर रखा है। बावजूद इसके नाला सफाई का कार्य विधिवत कराया जा रहा है, जिससे शहरवासियों को दिक्कत न हो।
- निरूपमा बाजपेई, अध्यक्ष नगर पालिका लखीमपुर

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