Lakhimpur Kheri : फूलबेहड़ में कर्ज में दबे युवक ने फंदे से लटककर दी जान

𝐤𝐮𝐬𝐡𝐚𝐥 𝐕𝐞𝐫𝐦𝐚

कोरोना कर्फ्यू में पानी की दुकान बंद होने से नहीं चल रहा था घर का खर्च

महेवागंज (लखीमपुर खीरी)। फूलबेहड़ के मिदनिया गांव में एक युवक ने आम के पेड़ से फंदा लगाकर जान दे दी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। युवक की मौत से घर में मातम है। घरवालों ने आर्थिक तंगी को आत्महत्या की वजह बताया है।

मिदनिया गांव निवासी आनंद पुत्र लल्लू राम ने बताया कि उनका छोटा भाई महेश उर्फ सर्वेश मौर्य (35) कुछ दिनों से उदास रहता था। अंदेश नगर में पान की दुकान कर किसी तरह वह परिवार का पेट पाल रहा था। कोरोना काल में दुकान बंद थी। परिवार का खर्च चलाने के लिए उसने किसी समूह से कर्ज ले रखा था। परिवार वालों को इस बारे में कभी कुछ खुलकर नहीं बताया। कर्ज बढ़ने से वह परेशान था।

बुधवार रात जब घर के सभी सदस्य सो रहे थे। तभी उसने गांव के पश्चिम आम के बाग में फांसी के फंदे पर लटककर आत्महत्या कर ली। सुबह शव लटका देख घर में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंची फूलबेहड़ पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक की पत्नी गंगाजली और उसके चार बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल है।

काम धंधा चौपट होने से अवसाद में थे महेश

महेवागंज/सुंदरवल। फूलबेहड़ के दुधवा मिदनिया गांव में फांसी लगाकर आत्महत्या करने वाले सर्वेश कुमार मौर्या कुछ दिनों से तनाव में थे।
पिता लल्लू राम के तीन लड़कों में सर्वेश सबसे छोटा था। तीनों लड़कों की शादी हो चुकी है। परिवार के पास नाम मात्र की खेती है। मृतक का बड़ा भाई आनंद और मंझला कमल भी मजदूरी कर घर परिवार के खर्च में हाथ बंटाते हैं, वहीं सर्वेश के हिस्से एक बीघा जमीन है। जमीन न के बराबर होने से वह अंदेशनगर में पान की गुमटी रख घर परिवार का किसी तरह खर्च चला रहा था। घरवालों के मुताबिक, हाल ही में उसने लोहे की बड़ी गुमटी के लिए एक समूह से कर्ज लिया था। कोरोना कर्फ्यू के दौरान दुकान बंद हो जाने से धंधा चौपट हो गया। समूह की किस्तें देना भारी पड़ने लगा। बीमार पत्नी और चार बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी का बोझ बढ़ता ही जा रहा था।

पिता बोले, किस्त मांगने घर पर आते थे लोग

सर्वेश के पिता लल्लूराम ने बताया कि पुत्र महेश के अलावा गांव में करीब दस से पंद्रह लोग समूह के जाल में फंसे हुए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, अंदेशनगर और इसके आसपास गांवों में समूह से जुड़े लोग भोले भाले छोटे दुकानदारों को कर्ज का प्रलोभन देकर फंसाते हैं। फिर उनसे मूल धन के साथ ब्याज की अदायगी भी करते हैं। नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रैकेट गांव गली तक फैला हुआ है। दुकान बंद हो फिर भी हर महीने किस्त मांगने के लिए एजेंट घर तक पहुंच जाते हैं। मृतक के भाई आनंद ने बताया कि कोरोना कर्फ्यू में धंधा बंद होने से भाई किस्त नहीं चुका पा रहे थे, लेकिन अपनी परेशानी के बारे में उन्होंने कभी घरवालों से जिक्र नहीं किया। पिता लल्लू राम ने कहा कि बेटे ने मजबूरी में इतना बड़ा कदम उठा लिया।

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