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| शिओम प्रधान - फोटो : LAKHIMPUR |
पसगवां। विकास खंड की 10 हजार से अधिक की आबादी वाली और सबसे बड़ी ग्राम पंचायत औरंगाबाद अपना ऐतिहासिक महत्व तो रखती है, पर जरूरी सुविधाओं के लिहाज से पंचायत काफी पिछड़ी है।
गांव में विकास की उम्मीद में इस बार ग्रामीणों ने युवा प्रधान शीओम को अपना ग्राम प्रधान चुना है। इधर, शीओम ने भी गांव के विकास में मदद कर अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की बात कही है। उनका कहना है कि वह पात्रों को आवास दिलाएंगे और गांव को गंदगी मुक्त करना उनकी प्राथमिकता में शामिल है।
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पहचान
यहां दक्षिण भारतीय शैली में बना श्री राम-जानकी मंदिर ग्राम पंचायत की पहचान है। यहां सभी द्वादश शिवलिंग स्थापित हैं। ब्रिटिश स्मारक भी क्रांतिकारियों के शौर्य की गवाही देता है। मुग़लकाल में यह गांव तहसील हुआ करता था, जो 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में प्रसिद्ध रहा था। यहीं पर 5 जून, 1857 को मोहम्मदी रेजीमेंट के कई सैनिकों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने मार डाला था। उनकी याद में ब्रिटिश सरकार ने एक स्मारक बनवाया था। यहां स्वतंत्रता आंदोलन की अलख उमा शंकर त्रिपाठी, जगन्नाथ प्रसाद, महीधर शर्मा और मेवालाल जैसे लोगों ने जलाई थी और जेल गए थे।
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एक नजर
1-जनसंख्या- 10686
2- मतदाता- 9100
3- कुल परिवार- 1786
4- मुख्य पेशा- कृषि
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प्राथमिकताएं
1-पात्रों को आवास
2- जर्जर सड़को और नालियों का निर्माण
3- गंदगी दूर कर साफ सफाई
4- मनरेगा से रोजगार सृजन
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गांव की समस्याएं
1- साफ-सफाई का अभाव
2- संकरी सड़कें
3- टूटी फूटी नालियां
4- खेल का मैदान नहीं
5- बदहाल स्वास्थ्य सुविधाएं
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औरंगाबाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का गढ़ रहा है उनकी स्मृति में पर्यटन स्थल का निर्माण कराकर गांव का पिछड़ापन दूर किया जाए।
- आशुतोष त्रिपाठी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उमाशंकर त्रिपाठी के पौत्र
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चकबंदी प्रक्रिया कोर्ट में लंबित न होने के कारण किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि नहीं मिल रही है। जल्द ही पात्र किसानों को सम्मान निधि को दिलाई जाए।
प्रजेश मिश्र, ग्रामीण
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प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धावस्था, विधवा व दिव्यांग पेंशन का लाभ पात्रों को दिलाने के अलावा घर घर शौचालयों की सुविधा का लाभ दिलाने की कोशिश की जाएगी। - शीओम, ग्राम प्रधान, औरंगाबाद
