सात क्रय केंद्र प्रभारियों के निलंबन के साथ ही पीसीयू और पीसीएफ के प्रबंधकों पर लटकी तलवार
लखीमपुर खीरी। एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन गेहूं खरीद के नए सीजन में पूर्व में हो चुकी धान और गेहूं खरीद के घोटालों की परतें उधड़ने लगी हैं। 2019-20 में धान खरीद में अनियमितता पाए जाने पर सात क्रय केंद्र प्रभारी निलंबित हो चुके हैं और पीसीयू व पीसीएफ के अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
जांच में पता चला कि किसानों ने धान बेचने से इंकार किया था और खेत में गन्ने की फसल लगी होने की बात कही थी। इसी तरह का एक मामला तीन म हीने पहले मितौली तहसील क्षेत्र के जम्हौरा से आया था, जहां ग्रामीणों के नाम से बैंक में खाते खोलकर उनमें से लाखों की राशि निकाल ली गई थी, जिसमें किसानों के खातों में धान खरीद का पैसा आने की बात सामने आई थी। ग्रामीणों ने पुलिस में सामूहिक तहरीर भी दी थी, अब मामले में जांच पूरी होने का दावा किया जा रहा है। उधर, कार्रवाई की जद में आए अधिकारियों ने शक की सुई सत्यापन करने वाले तहसील प्रशासन की ओर मोड़ दी है।
लखीमपुर खीरी। एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन गेहूं खरीद के नए सीजन में पूर्व में हो चुकी धान और गेहूं खरीद के घोटालों की परतें उधड़ने लगी हैं। 2019-20 में धान खरीद में अनियमितता पाए जाने पर सात क्रय केंद्र प्रभारी निलंबित हो चुके हैं और पीसीयू व पीसीएफ के अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
जांच में पता चला कि किसानों ने धान बेचने से इंकार किया था और खेत में गन्ने की फसल लगी होने की बात कही थी। इसी तरह का एक मामला तीन म हीने पहले मितौली तहसील क्षेत्र के जम्हौरा से आया था, जहां ग्रामीणों के नाम से बैंक में खाते खोलकर उनमें से लाखों की राशि निकाल ली गई थी, जिसमें किसानों के खातों में धान खरीद का पैसा आने की बात सामने आई थी। ग्रामीणों ने पुलिस में सामूहिक तहरीर भी दी थी, अब मामले में जांच पूरी होने का दावा किया जा रहा है। उधर, कार्रवाई की जद में आए अधिकारियों ने शक की सुई सत्यापन करने वाले तहसील प्रशासन की ओर मोड़ दी है।
2019-20 में धान खरीद में अनियमितता पर पीसीयू के गोला मंडी, चंदनचौकी, प्रीतमपुरवा, टाउन सांडा, नैनापुर क्रय केंद्रों के प्रभारी निलंबित किए गए हैं, जबकि पीसीएफ के टाउन मूड़ा जवाहर, खैरहनी ढखेरवा क्रय केंद्रों के प्रभारी निलंबित हुए हैं। साथ ही इन सभी सातों क्रय केंद्रों को दो वर्ष के लिए गेहूं व धान खरीद करने से ब्लैकलिस्ट किया गया है। इन क्रय केंद्रों पर 20 किलोमीटर की अधिक परिधि के किसानों से धान खरीदा गया था। जांच में किसानों ने धान बेचने से इंकार किया था और खेत में गन्ने की फसल लगी होने की बात कही थी।
इससे जाहिर है कि केंद्र प्रभारियों ने बड़े पैमाने पर दलालों से धान की खरीद करके लाखों रुपये का गोलमाल किया था। वहीं 2020-21 में जम्हौरा गांव के किसानों के नाम खाते खोलकर धान का पैसा निकाले जाने का मामला सामने आने आया था, जिसमें किसानों के जीरो बैलेंस के खाते में लाखों रुपये आकर निकल गए थे। मामले में बैंक के कुछ अफसरों ने धान खरीद का पैसा आने की बात कही थी।
अमर उजाला में प्रमुखता से खबर छपने के बाद डीएम ने एसडीएम मितौली की अगुवाई में चार सदस्यीय कमेटी बनाई थी, जिसमें भी पीसीयू का नाम सामने आया था। किसानों ने धान न बेचने की बात कहते हुए शिकायत की थी। अब मामले में डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि जांच कमेटी ने रिपोर्ट दी है, जिसके मुताबिक किसानों ने धान बेचने की बात स्वीकार की है। इसलिए इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
निलंबित अधिकारियों ने तहसील प्रशासन की ओर घुमाई सुई
लखीमपुर खीरी। 2019-20 में सरकारी धान खरीद में घोटाले की परते उधड़ने के बाद कार्रवाई की जद में आए केंद्र प्रभारियों और सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने अपनी गर्दन बचाने की कवायद तेज कर दी है। कागजों पर गन्ने के खेत में धान की फसल दिखाकर किए गए इस घोटाले में फंसे अधिकारियों को अब याद आया है कि खेत में धान है या गन्ना इसका सत्यापन करने का काम तहसील प्रशासन का है। इसलिए उन्होंने घोटाले में फसल और किसानों का सत्यापन करने वाले तहसील कर्मचारियों की ओर शक की सुई घुमाई है।
पीसीयू के जिला प्रबंधक ध्रुव कुमार कार्रवाई के बाद से लखनऊ में डेरा डाले हैं, वहीं अन्य अधिकारियों ने भी कार्रवाई से बचने के लिए जुगत भिड़ानी शुरू कर दी है। कार्रवाई को लेकर अधिकारी दबी जुबान से सवाल उठा रहे हैैं कि, किसानों के ऑनलाइन पंजीकरण के बाद तहसील प्रशासन द्वारा किसानों की उपज का सत्यापन किया जाता है, जिसके बाद किसान क्रय केंद्र पर फसल बेच पाता है। अभी सात क्रय केंद्र प्रभारियों पर कार्रवाई हुई है, लेकिन इन किसानों का सत्यापन करने वाले तहसील कर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि फसलों के सत्यापन में तहसील कर्मियों की भी अहम भूमिका रहती है, जो किसान के खेत में धान या गेहूं की फसल होने का सत्यापन करके रिपोर्ट लगाते हैं।
किसानों की फसलों का सत्यापन तहसील कर्मियों द्वारा किया जाता है, जिसमें हेरफेर करने वाले कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। इस संबंध में अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। यदि किसानों की फसलों के सत्यापन में तहसील कर्मी द्वारा गड़बड़ी की जाती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब गेहूं खरीद के लिए तहसीलों द्वारा सत्यापन किया जा रहा है।
- अरुण कुमार सिंह, एडीएम
नियम-कायदे दरकिनार कर सरकारी खरीद में हर बार लग जाती है सेंध
लखीमपुर खीरी। सरकारी गेहूं व धान खरीद को हर बार फूलप्रूफ बनाने की कोशिशें की गईं, लेकिन नियम-कायदे को दरकिनार कर क्रय केंद्र प्रभारियों समेत हैंडलिंग ठेकेदारों ने समय-समय पर लाखों-करोड़ों के वारे-न्यारे कर दिए। ऐसे कई मामले पकड़े गए, जिनमें कुछ मामले बेहद संगीन रहे। 2018 में सरकारी गेहूं खरीद के दौरान पीसीएफ के क्रय केंद्रों पर हुए 33 करोड़ के घोटाले मामले की जांच सीबीसीआईडी कर रही है, तो कुछ मामलों की जांच विभिन्न थानों की पुलिस कर रही है।
मुलायम सरकार के वर्ष 2004 में प्रदेश के कई जिलों में बड़े पैमाने पर हुए खाद्यान्न घोटाले की सीबीआई जांच कई सालों से चल रही है, जिसमें अब तक कई अधिकारी समेत सफेदपोश जेल जा चुके हैं। बावजूद इसके घोटालों में कोई कमी नहीं आई, बल्कि सरकारी सिस्टम में सेंध लगाते हुए साल-दर-साल घोटालों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। 2004 के घोटाले के बाद जनपद में दूसरा बड़ा घोटाला 2018 में सामने आए, जिसमें पीसीएफ के प्रबंध निदेशक की रिपोर्ट पर आरोपी बनाए गए पीसीएफ तत्कालीन जिला प्रबंधक प्रभंजन कुमार यादव समेत दो केंद्र प्रभारियों की सेवा समाप्त (बर्खास्त) की जा चुकी है।
रबी विपणन वर्ष 2018-19 में पीसीएफ ने 109 क्रय केंद्रों के माध्यम से 1,05,406 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा था, जिसके एवज में किसानों को एक अरब 83 करोड़ 93 लाख रुपये का भुगतान होना था। तत्कालीन आरएम/जिला प्रबंधक वैभव कुमार वर्मा ने तहरीर देकर बताया था कि तत्कालीन जिला प्रबंधक प्रभंजन कुमार यादव के इशारे पर कई केंद्र प्रभारियों ने गेहूं खरीद में गड़बड़ी करते हुए 33 करोड़ का भुगतान चेकों के माध्यम से किया, जो शासनादेश के प्रावधानों का खुला उल्लंघन था। 22 क्रय केंद्रों पर एक दिन में प्रति केंद्र 300 मीट्रिक टन से अधिक खरीद कराई गई, जिसमें अतिरिक्त कांटा लगाने के लिए डीएम से अनुमति नहीं ली गई थी।
कोतवाली पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपी तत्कालीन प्रबंधक प्रभंजन कुमार यादव, मरखापुर क्रय केंद्र प्रभारी अनूप कुमार, गोला मंडी में पीसीएफ के प्रथम और द्वितीय क्रय केंद्रों के प्रभारी शिवराज और अनिल कुमार, हसनपुर कटौली के केंद्र प्रभारी भारत भूषण मिश्रा समेत कुछ नाम पता अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मामला सरकारी गेहूं खरीद में करोड़ों के घोटाले से जुड़ा होने के कारण शासन ने इसकी जांच सीबीसीआईडी को दे दी थी। पीसीएफ के प्रबंध निदेशक ने तत्कालीन जिला प्रबंधक और केंद्र प्रभारी शिवराज को जनवरी 2020 में बर्खास्त कर दिया था, जबकि तीसरे आरोपी भारत भूषण मिश्रा की 2019 में मौत हो चुकी है। चौथे आरोपी अनिल कुमार को 18 जून 2020 को बर्खास्त किया गया। इसके बाद पांचवें आरोपी अनूप कुमार की बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई। जून 2020 में लॉकडाउन के बाद हुए अनलॉक से सीबीसीआईडी का जांच में तेजी आई थी, जिसके बाद टीम ने कार्यालय के अभिलेख खंगाले थे। इनमें से 32 क्रय केंद्रों के दस्तावेज टीम अपने साथ ले गई थी।
तीन सदस्यीय टीम ने जांच में यह पकड़ी थीं खामियां
पीसीएफ के तत्कालीन एमडी ने जिला प्रबंधक प्रभंजन यादव के खिलाफ लगे आरोपों की जांच तीन सदस्यीय टीम से कराई थी। जांच टीम ने 33 करोड़ का भुगतान किसानों को न करने, बिना अनुमति लिए अधिक तौल कराने, क्रय केंद्रों की पंजिका में दर्ज खरीद और जिला प्रबंधक द्वारा भेजी रिपोर्ट में अंतर आदि गड़बड़ियां पकड़ी थीं।
गेहूं खरीद में गड़बड़ी करने पर दो केंद्र प्रभारियों पर दर्ज हो चुकी रिपोर्ट
लखीमपुर खीरी। 2019-20 में फूलबेहड़ में संचालित पीसीयू (प्रादेशिक कोआपरेटिव यूनियन) के दो क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद मेें गड़बड़ी पाई गई थी। इन क्रय केंद्रों पर किसानों से कम गेहूं खरीदा, लेकिन एफसीआई गोदाम में ज्यादा मात्रा में गेहूं पहुंचा दिया था। क्षेत्रीय विपणन अधिकारी प्रमोद गुप्ता ने जांच में मामला पकड़ा और उन्होंने दोनों क्रय केंद्रों के प्रभारियों के खिलाफ फूलबेहड़ थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। पीसीयू के क्रय केंद्र फूलबेहड़ पर 1862 क्विंटल गेहूं की खरीद मिली, जबकि एफसीआई के गोदाम में 2770 क्विंटल गेहूं भेज दिया गया। इसी एजेंसी के दूसरे क्रय केंद्र फूलबेहड़ एट करसौर पर भी खरीद कम पाई गई, लेकिन एफसीआई गोदाम में डिलीवरी ज्यादा भेजी जा रही थी। यहां के केंद्र प्रभारी ने 1018 क्विंटल गेहूं खरीदा और गोदाम में 1150 क्विंटल गेहूं भेजा था। क्षेत्रीय विपणन अधिकारी ने 22 अप्रैल 2020 को निरीक्षण में यह घपला पकड़ा था। इस मामले में जिला खाद्य विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय के निर्देश पर दोनों क्रय केंद्र प्रभारियों के खिलाफ फूलबेहड़ थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
लखीमपुर खीरी। 2019-20 में सरकारी धान खरीद में घोटाले की परते उधड़ने के बाद कार्रवाई की जद में आए केंद्र प्रभारियों और सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने अपनी गर्दन बचाने की कवायद तेज कर दी है। कागजों पर गन्ने के खेत में धान की फसल दिखाकर किए गए इस घोटाले में फंसे अधिकारियों को अब याद आया है कि खेत में धान है या गन्ना इसका सत्यापन करने का काम तहसील प्रशासन का है। इसलिए उन्होंने घोटाले में फसल और किसानों का सत्यापन करने वाले तहसील कर्मचारियों की ओर शक की सुई घुमाई है।
पीसीयू के जिला प्रबंधक ध्रुव कुमार कार्रवाई के बाद से लखनऊ में डेरा डाले हैं, वहीं अन्य अधिकारियों ने भी कार्रवाई से बचने के लिए जुगत भिड़ानी शुरू कर दी है। कार्रवाई को लेकर अधिकारी दबी जुबान से सवाल उठा रहे हैैं कि, किसानों के ऑनलाइन पंजीकरण के बाद तहसील प्रशासन द्वारा किसानों की उपज का सत्यापन किया जाता है, जिसके बाद किसान क्रय केंद्र पर फसल बेच पाता है। अभी सात क्रय केंद्र प्रभारियों पर कार्रवाई हुई है, लेकिन इन किसानों का सत्यापन करने वाले तहसील कर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि फसलों के सत्यापन में तहसील कर्मियों की भी अहम भूमिका रहती है, जो किसान के खेत में धान या गेहूं की फसल होने का सत्यापन करके रिपोर्ट लगाते हैं।
किसानों की फसलों का सत्यापन तहसील कर्मियों द्वारा किया जाता है, जिसमें हेरफेर करने वाले कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। इस संबंध में अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। यदि किसानों की फसलों के सत्यापन में तहसील कर्मी द्वारा गड़बड़ी की जाती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब गेहूं खरीद के लिए तहसीलों द्वारा सत्यापन किया जा रहा है।
- अरुण कुमार सिंह, एडीएम
नियम-कायदे दरकिनार कर सरकारी खरीद में हर बार लग जाती है सेंध
लखीमपुर खीरी। सरकारी गेहूं व धान खरीद को हर बार फूलप्रूफ बनाने की कोशिशें की गईं, लेकिन नियम-कायदे को दरकिनार कर क्रय केंद्र प्रभारियों समेत हैंडलिंग ठेकेदारों ने समय-समय पर लाखों-करोड़ों के वारे-न्यारे कर दिए। ऐसे कई मामले पकड़े गए, जिनमें कुछ मामले बेहद संगीन रहे। 2018 में सरकारी गेहूं खरीद के दौरान पीसीएफ के क्रय केंद्रों पर हुए 33 करोड़ के घोटाले मामले की जांच सीबीसीआईडी कर रही है, तो कुछ मामलों की जांच विभिन्न थानों की पुलिस कर रही है।
मुलायम सरकार के वर्ष 2004 में प्रदेश के कई जिलों में बड़े पैमाने पर हुए खाद्यान्न घोटाले की सीबीआई जांच कई सालों से चल रही है, जिसमें अब तक कई अधिकारी समेत सफेदपोश जेल जा चुके हैं। बावजूद इसके घोटालों में कोई कमी नहीं आई, बल्कि सरकारी सिस्टम में सेंध लगाते हुए साल-दर-साल घोटालों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। 2004 के घोटाले के बाद जनपद में दूसरा बड़ा घोटाला 2018 में सामने आए, जिसमें पीसीएफ के प्रबंध निदेशक की रिपोर्ट पर आरोपी बनाए गए पीसीएफ तत्कालीन जिला प्रबंधक प्रभंजन कुमार यादव समेत दो केंद्र प्रभारियों की सेवा समाप्त (बर्खास्त) की जा चुकी है।
रबी विपणन वर्ष 2018-19 में पीसीएफ ने 109 क्रय केंद्रों के माध्यम से 1,05,406 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा था, जिसके एवज में किसानों को एक अरब 83 करोड़ 93 लाख रुपये का भुगतान होना था। तत्कालीन आरएम/जिला प्रबंधक वैभव कुमार वर्मा ने तहरीर देकर बताया था कि तत्कालीन जिला प्रबंधक प्रभंजन कुमार यादव के इशारे पर कई केंद्र प्रभारियों ने गेहूं खरीद में गड़बड़ी करते हुए 33 करोड़ का भुगतान चेकों के माध्यम से किया, जो शासनादेश के प्रावधानों का खुला उल्लंघन था। 22 क्रय केंद्रों पर एक दिन में प्रति केंद्र 300 मीट्रिक टन से अधिक खरीद कराई गई, जिसमें अतिरिक्त कांटा लगाने के लिए डीएम से अनुमति नहीं ली गई थी।
कोतवाली पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपी तत्कालीन प्रबंधक प्रभंजन कुमार यादव, मरखापुर क्रय केंद्र प्रभारी अनूप कुमार, गोला मंडी में पीसीएफ के प्रथम और द्वितीय क्रय केंद्रों के प्रभारी शिवराज और अनिल कुमार, हसनपुर कटौली के केंद्र प्रभारी भारत भूषण मिश्रा समेत कुछ नाम पता अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मामला सरकारी गेहूं खरीद में करोड़ों के घोटाले से जुड़ा होने के कारण शासन ने इसकी जांच सीबीसीआईडी को दे दी थी। पीसीएफ के प्रबंध निदेशक ने तत्कालीन जिला प्रबंधक और केंद्र प्रभारी शिवराज को जनवरी 2020 में बर्खास्त कर दिया था, जबकि तीसरे आरोपी भारत भूषण मिश्रा की 2019 में मौत हो चुकी है। चौथे आरोपी अनिल कुमार को 18 जून 2020 को बर्खास्त किया गया। इसके बाद पांचवें आरोपी अनूप कुमार की बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई। जून 2020 में लॉकडाउन के बाद हुए अनलॉक से सीबीसीआईडी का जांच में तेजी आई थी, जिसके बाद टीम ने कार्यालय के अभिलेख खंगाले थे। इनमें से 32 क्रय केंद्रों के दस्तावेज टीम अपने साथ ले गई थी।
तीन सदस्यीय टीम ने जांच में यह पकड़ी थीं खामियां
पीसीएफ के तत्कालीन एमडी ने जिला प्रबंधक प्रभंजन यादव के खिलाफ लगे आरोपों की जांच तीन सदस्यीय टीम से कराई थी। जांच टीम ने 33 करोड़ का भुगतान किसानों को न करने, बिना अनुमति लिए अधिक तौल कराने, क्रय केंद्रों की पंजिका में दर्ज खरीद और जिला प्रबंधक द्वारा भेजी रिपोर्ट में अंतर आदि गड़बड़ियां पकड़ी थीं।
गेहूं खरीद में गड़बड़ी करने पर दो केंद्र प्रभारियों पर दर्ज हो चुकी रिपोर्ट
लखीमपुर खीरी। 2019-20 में फूलबेहड़ में संचालित पीसीयू (प्रादेशिक कोआपरेटिव यूनियन) के दो क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद मेें गड़बड़ी पाई गई थी। इन क्रय केंद्रों पर किसानों से कम गेहूं खरीदा, लेकिन एफसीआई गोदाम में ज्यादा मात्रा में गेहूं पहुंचा दिया था। क्षेत्रीय विपणन अधिकारी प्रमोद गुप्ता ने जांच में मामला पकड़ा और उन्होंने दोनों क्रय केंद्रों के प्रभारियों के खिलाफ फूलबेहड़ थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। पीसीयू के क्रय केंद्र फूलबेहड़ पर 1862 क्विंटल गेहूं की खरीद मिली, जबकि एफसीआई के गोदाम में 2770 क्विंटल गेहूं भेज दिया गया। इसी एजेंसी के दूसरे क्रय केंद्र फूलबेहड़ एट करसौर पर भी खरीद कम पाई गई, लेकिन एफसीआई गोदाम में डिलीवरी ज्यादा भेजी जा रही थी। यहां के केंद्र प्रभारी ने 1018 क्विंटल गेहूं खरीदा और गोदाम में 1150 क्विंटल गेहूं भेजा था। क्षेत्रीय विपणन अधिकारी ने 22 अप्रैल 2020 को निरीक्षण में यह घपला पकड़ा था। इस मामले में जिला खाद्य विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय के निर्देश पर दोनों क्रय केंद्र प्रभारियों के खिलाफ फूलबेहड़ थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।