कपिलश फाउंडेशन के तत्वावधान में हो रहे लांगेस्ट कवि सम्मेलन में नगर से लेकर राष्ट्र तक के नामचीन कवि काव्यपाठ कर रहे हैं। फाउंडेशन की अध्यक्ष शिप्रा खरे के संचालन में लखनऊ के ओम नीरव ने पढ़ा कि-शब्द से सत्य को मैं छलूंगा नहीं, तालियों के चषक में ढलूंगा नहीं।
ओ शमां मैं पतंगा नहीं गीत हूं, ख्याति की ज्योति में मैं जलूंगा नहीं।।
बाराबंकी के डॉ. शर्मेश शर्मा ने पढ़ा कि-
हिंदी का यशगान सुनाने आए हैं, गीत गजल की तान सुनाने आए हैं।
आए हैं गोला छोटी काशी में हम, विश्व में कीर्तिमान बनाने आए हैं।।
साथ ही कवि सम्मेलन में रूबीना हमीद, अलंकार रस्तोगी, मंजूषा श्रीवास्तव, रेखा गुप्ता, सुखप्रीत सिंह, वात्सल्य श्याम, अवधराम, राजाभैया, विनय आनंद सहित दिल्ली, बाराबंकी, लखनऊ, बदायूं, सीतापुर, अलीगढ़ आदि स्थानों से आए नामचीन कवियों ने काव्यपाठ किया। इस मौके पर द्वारिका प्रसाद रस्तोगी, रमेश पांडे, नानकचंद वर्मा, लक्ष्मी खरे, कल्पना तिवारी, सुधीर अवस्थी आदि मौजूद रहे।
चार-चार घंटे की 30 पालियों में चल रहा है आयोजन
आयोजक एवं विश्व रिकार्डधारक यतीशचंद्र शुक्ल ने बताया कि 102 घंटे के लांगेस्ट कवि सम्मेलन का विश्व रिकार्ड दादरी गाजियाबाद के नाम दर्ज है, जिसके टूटते ही गोला के कवि सम्मेलन का वर्ल्ड रिकार्ड बन जाएगा। इसके लिए 121 घंटे का लक्ष्य रखा गया है। चार चार घंटे की 30 पालियां बनाई गई हैं। 400 से अधिक कवि एवं साहित्यकार शामिल हो रहे हैं। प्रत्येक को प्रस्तुति के लिए 20 मिनट का समय निर्धारित किया गया है।