Lakhimpur Kheri : गोला का सबसे लंबा कवि सम्मेलन और मुशायरा विश्व रिकॉर्ड में दर्ज

𝐤𝐮𝐬𝐡𝐚𝐥 𝐕𝐞𝐫𝐦𝐚
कपिलश फाउंडेशन के संयोजन में हुआ आयोजन 127 घंटे 57 मिनट 53 सेकेंड चला
गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर खीरी)। लांगेस्ट कवि सम्मेलन एवं मुशायरा ने बुधवार शाम छह बजे तक 127 घंटे 57 मिनट और 53 सेकेंड पूरे कर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया।

 गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के निर्णायक डॉ. आलोक कुमार ने कपिलश फाउंडेशन के नाम प्रमाणपत्र देकर गोला में बने सबसे लंबे विश्व रिकॉर्ड की घोषणा की।

शहनाई सभागार में दो अप्रैल की सुबह दस बजे विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए 121 घंटे का लक्ष्य लेकर लांगेस्ट कवि सम्मेलन एवं मुशायरा शुरू हुआ था। आयोजन में कविता, शेरो-शायरी का दौर बुधवार की शाम छह बजे 127 घंटे 57 मिनट 53 सेकेंड पूरे कर थमा। 

इस दौरान 430 कवि और शायरों ने काव्य पाठ और दो दर्जन संचालकों ने कवि सम्मेलन के संचालन का जिम्मा संभाला। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 121 घंटे पूरे होने पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के निर्णायक डॉ.आलोक कुमार ने गोला में बने विश्व रिकॉर्ड की घोषणा की और आयोजक संस्था कपिलश फाउंडेशन को प्रमाण पत्र सौंपा।

 इस घोषणा के साथ ही आयोजकों और कवियों ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया। छह दिनों तक अथक परिश्रम एवं निष्ठा के साथ हुए लांगेस्ट कवि सम्मेलन एवं मुशायरे को विश्व रिकॉर्ड का दर्जा मिलते ही युवा टीम खुशी से झूम उठी।


आयोजन के अंतिम दिन अखिल भारतीय साहित्य परिषद उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष डॉ. चैतन्य चेतन, कानपुर की बाल साहित्यकार सुहानी यादव, आशीष अनल, डॉ. सत्येंद्र द्विवेदी गंगवार, नंदीलाल निराश, डॉ. संगीता राज, बेनीराम अनजान, इकबाल अंसारी आदि ने काव्य पाठ किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि दर्जा राज्यमंत्री राजेंद्र सिंह पुंडीर, पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल, भाजपा जिला उपाध्यक्ष विजय माहेश्वरी, डॉ. बीबी धुरिया, विश्व रिकार्ड धारक यतीशचंद्र शुक्ला, शिप्रा खरे, लक्ष्मी खरे, नानकचंद वर्मा, रमेश पांडे, संतकुमार बाजपेई, डॉ. वेदप्रकाश अग्निहोत्री, श्रीकांत तिवारी, सुधीर अवस्थी, कल्पना तिवारी आदि मौजूद रहे।
बाल साहित्यकार सुहानी यादव ने बांधा समा
आयोजन के अंतिम दिन कानपुर से आईं 13 वर्षीय सुहानी यादव ने काव्य पाठ कर समा बांध दिया। 

सुहानी की पहली पुस्तक मात्र नौ वर्ष की उम्र में प्रकाशित हो चुकी है, जिसका विमोचन तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने किया था। सुहानी को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, प्रख्यात गीतकार गोपालदास नीरज और भोपाल बाल साहित्य संस्थान द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

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