Lakhimpur Kheri : जनसुनवाई के लिए पहुंचे डीएम को ग्रामीणों ने घेरा

𝐤𝐮𝐬𝐡𝐚𝐥 𝐕𝐞𝐫𝐦𝐚
डंडौरा गांव के पास इथेनॉल फैक्टरी लगाने का ग्रामीणों ने किया विरोध, नारेबाजी
डीएम बोले, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण मंत्रालय करेगा अंतिम फैसला
चपरतला (लखीमपुर खीरी)। मैगलगंज क्षेत्र में इथेनॉल फैक्टरी लगाने के लिए जनसुनवाई को पहुंचे डीएम का डंडौरा के ग्रामीणों ने घेराव किया। इस दौरान ग्रामीणों ने नारेबाजी भी की। उनकी मांग है कि इथेनॉल फैक्टरी गांव के पास न लगाकर कहीं और लगाई जाए। इससे जल संसाधन प्रभावित होगा और क्षेत्र में गंदगी भी बढ़ेगी। इस पर डीएम ने कहा कि वह ग्रामीणों और फैक्टरी मालिक का पक्ष लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजेंगे। अंतिम निर्णय पर्यावरण मंत्रालय करेगा।

मितौली तहसील के पसगवां ब्लॉक के डंडौरा गांव के प्राथमिक स्कूल में पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से लोक जन सुनवाई का आयोजन किया गया था, जिसमें फैक्टरी प्रबंधन की तरफ से प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में ग्रामीणों की राय ली जानी थी। मंच पर प्रबंधन के द्वारा फैक्टरी लगने से क्षेत्र में विकास की बात कही जा रही थी। इस बीच सभा स्थल से कुछ दूरी पर ग्रामीणों ने हंगामा करना शुरू कर दिया।

डीएम जब हंगामा कर रहे ग्रामीणों के पास पहुंचे तो ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और नारेबाजी करने लगे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में पहले से ही बरनाला पोल्ट्री फार्म खुला हुआ है। भीषण गंदगी की वजह से पनपी मक्खियों से पहले ही लोगों का जीना मुहाल है। ऐसे में डिस्टलरी यूनिट लगाने के प्रस्ताव पर ग्रामीणों ने आशंका जताई कि इससे भी गंदगी फैलेगी। क्षेत्र के पर्यावरण के साथ-साथ जल का संकट भी उत्पन्न हो जाएगा। मामले से जुड़ा एक ज्ञापन भी डीएम को सौंपा गया।

ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद जिलाधिकारी शैलेंद्र सिंह ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि पर्यावरण प्रदूषण की टीम के द्वारा स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को तत्काल निर्देशित किया कि टीम का बंदोबस्त कर मक्खियों की समस्या पर काम करें।

100 करोड़ के प्रोजेक्ट से इथेनॉल प्लांट प्रस्तावित है, जिसके लिए जनसुनवाई का कार्यक्रम रखा गया था। मामले में एक पक्ष प्लांट लगने का समर्थक था, जबकि दूसरा विरोधी। ग्रामीणों की समस्याओं को सुनकर उनका ज्ञापन लिया गया है। मामले में फैक्टरी प्रबंधन का भी पक्ष लिया गया है। दोनों पक्षों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भेजा जायेगा, जिसके बाद पर्यावरण मंत्रालय इस पर अंतिम निर्णय लेगा।

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