कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की जताई जा रही आशंका
विशेषज्ञ जता चुके हैं चिंता, 15 में 10 सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं
हालांकि एक साल में अब तक 762 बच्चे मिल चुके हैं कोरोना संक्रमित लखीमपुर खीरी। कोरोना की दूसरी लहर से अभी निजात मिली नहीं है कि विशेषज्ञ कुछ महीनों में तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की आशंका जताने लगे हैं। यहां बता दें कि जिले में गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए एक मात्र दस बेड का ही आईसीयू वार्ड है। इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन और डॉक्टर भी नहीं हैं। ऐसे में अगर स्थिति बिगड़ती है तो बच्चों का इलाज कैसे संभव होगा। गौरतलब है कि एक साल में अब तक 762 बच्चे कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं।
2011 की जनगणना के मुताबिक, जिले की आबादी लगभग 4013634 है, जिसमें दस लाख के करीब बच्चे हैं। स्वास्थ्य महकमे के पास जिले में गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए एक मात्र दस बेड का आईसीयू वार्ड है। जिले में 15 सीएचसी हैं, लेकिन न तो वहां आईसीयू वार्ड हैं और न ही बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर, जबकि कोरोना के इस एक साल में दस साल तक के 762 और 11 से 17 साल तक के करीब 1775 किशोर संक्रमित हो चुके हैं।
विशेषज्ञों की आशंकाओं पर गौर करते हुए योगी सरकार ने सूबे में अलर्ट जारी कर दिया है। इस पर शनिवार को जिला अस्पताल के सीएमएस ने आईसीयू वार्ड के कर्मचारियों को वेंटिलेटर, मॉनिटर आदि का रोजाना परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
बच्चों से लेकर बड़ों तक को बरतनी होगी सतर्कता
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। बच्चों को घर से न निकलने दें, मास्क एवं दो गज की दूरी का पालन कराएं। खान पान पर ध्यान दें, क्योंकि इम्युनिटी कमजोर होने के कारण बच्चे संक्रमण की चपेट में जल्दी आते हैं। परिवार के सदस्य भी बेवजह घर से बाहर न निकलें। बाहर से घर आने पर बच्चों से दूर रहे। पहने हुए कपड़े उतार दें और नहाने के बाद ही बच्चों के करीब जाएं। घर के बड़े सदस्य जागरूक और सावधानी बरत कर बच्चों को कोरोना मुसीबत से बचा सकते हैं।
15 सीएचसी में दस पर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं
जिले में बच्चों को बेहतर इलाज मुहैया कराने को लेकर स्वास्थ्य महकमे के पास बाल रोग विशेषज्ञ तक नहीं हैं। जिले में 15 सीएचसी हैं। इसमें से पांच को छोड़कर बिजुआ, पलिया, फरधान, मोहम्मदी, बेहजम, फूलबेहड़, नकहा, पसगवां, रमियाबेहड़, निघासन, ईसानगर्र बांकेगंज आदि में आज तक बाल रोग विशेषज्ञ तैनात ही नहीं हुए हैं।
जिला अस्पताल में गंभीर बच्चों के लिए सिर्फ दस बेड का आईसीयू वार्ड है। विषम परिस्थितियों में गंभीर बच्चों की संख्या बढ़ने पर अस्पताल प्रशासन के पास कोई इंतजाम नहीं हैं। बताते हैं कि अस्पताल प्रशासन ने बच्चों के इलाज के लिए अस्पताल में मौजूद संसाधनों के बारे में जिला प्रशासन को अवगत भी करा दिया है।
सुविधाएं
बेड-10, वेंटिलेटर-10, मॉनीटर-10, इन्फ्यूजन पंप-10, डेफ्रीलेटर- दो, ऑक्सीन सिलिंडर-20 जंबो
स्टाफ नर्स-18, ऑपरेटर-चार, टेक्नीशियन- एक
डॉक्टरों का भी अभाव
जिला अस्पताल में बच्चों के दो डॉक्टर तैनात हैं, तो वहीं महिला अस्पताल में नवजात रोग विशेषज्ञ तीन। उधर, 10 सीएचसी पर भी बाल रोग विशेषज्ञों का अभाव है। जिला अस्पताल के लोगों की माने तो सीएचसी पर डॉक्टर न होने से बच्चे जिला अस्पताल रेफर कर दिए जाते हैं, जबकि वहां तैनात दो डॉक्टरों पर ओपीडी करने के साथ आईसीयू, चिल्ड्रन वार्ड की जिम्मेदारी है। आईसीयू के लिए अलग से स्टाफ तो तैनात कर दिया गया, लेकिन डॉक्टर आज तक नहीं आए।
अभी काफी तैयारी है जरूरी
शुक्रवार को जनपद के दौरे पर आए सीएम योगी ने अधिकारियों को तीसरी लहर से निपटने के लिए योजनां बनाने की नसीहत दी थी, ऐसे में खीरी जैसे पिछड़े जनपद में युद्घस्तर पर तैयारी करने की जरूरत है। जिले में न तो पर्याप्त संसाधन है और न ही बाल रोग विशेषज्ञ। बच्चों के वार्ड की कमी है। सरकार को मौजूदा स्थिति को देखते हुए युद्धस्तर पर स्थायी या अस्थायी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी, अन्यथा तीसरी लहर बच्चों के लिए काफी गंभीर हो सकती है।
वार्ड- बेड संख्या
चिल्ड्रन - 11
आईसीयू- 10
एनआरसी-10
एसएनसीयू-10 (सिर्फ नवजात के लिए )
तीसरी लहर की जो आशंका जताई जा रही है। उसको देखते हुए 10 बेड का आईसीयू वार्ड तैयार है। दवाएं भी उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर 10 बेड के कुपोषण एवं 10 बेड के चिल्ड्रन वार्ड का भी उपयोग होगा। अस्पताल के पास दो बाल रोग विशेषज्ञ है, जिनकी ड्यूटी लगाई जाएगी।
- डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस