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लखीमपुर खीरी। सरकारी गेहूं खरीद में बिचौलियों और माफिया के दखल को रोकने के लिए इस बार क्रय केंद्रों पर ई-पॉप (इलेक्ट्रानिक प्वाइंट ऑफ परचेज) मशीन मुहैया कराई गई हैं। इसकी मदद से ऑनलाइन गेहूं खरीद कराई जा रही है। इसके बावजूद मंडी समिति राजापुर में बड़े पैमाने पर बिचौलिए और माफिया मिलकर सरकारी व्यवस्था में सेंध लगाने में कामयाब हो गए और सरकारी धन का गबन करने में जुटे थे। संभागीय खाद्य नियंत्रक द्वारा इस मामले के पकड़े जाने के बाद क्रय केंद्र प्रभारियों और उनकी एजेंसियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
बता दें कि बृहस्पतिवार को संभागीय खाद्य नियंत्रक संतोष कुमार ने मंडी समिति राजापुर के चबूतरा नंबर छह पर और पास में खड़े दो ट्रकों में लोड सरकारी पीपी बोरों में भरा 1820.50 क्विंटल गेहूं पकड़ा था। इसी चबूतरे पर यूपीएसएस और मंडी समिति के क्रय केंद्र भी संचालित थे, जिनके केंद्र प्रभारियों ने बरामद गेहूं के बारे में अनभिज्ञता जताई थी। एसडीएम सदर डॉ. अरुण कुमार सिंह के निर्देश पर यूपीएसएस के जिला प्रबंधक ने केंद्र प्रभारी और अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे युवक के खिलाफ सदर कोतवाली में सरकारी धन के गबन आदि आरोपों में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस खुलासे से एक बात स्पष्ट हो गई कि ई-पॉप मशीनों के इस्तेमाल से गेहूं खरीद में पारदर्शिता लाने का दावा खोखला साबित हुआ है। अनाज माफिया और क्रय केंद्र प्रभारियों की मिलीभगत से मशीन को चकमा देने का तोड़ निकाल लिया गया है, जिसकी मदद से माफिया बिचौलियों के माध्यम से सस्ते में गेहूं खरीदकर सरकारी गोदामों में सप्लाई भेज रहे थे। सूत्रों के मुताबिक क्रय केंद्र प्रभारी और माफिया के बीच गठजोड़ के चलते ऐसा संभव हुआ है। सरकारी पीपी बोरों की सप्लाई माफिया तक कैसे पहुंची, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
सरकारी बोरों का कराया जा रहा सत्यापन
बरामद 1820.50 क्विंटल गेहूं में 3641 पीपी बोरों का इस्तेमाल किया है। इन बोरों की सप्लाई खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा क्रय एजेंसियों को की जाती है। अब अधिकारियों के सामने यह सवाल है कि इन बोरों की सप्लाई किस एजेंसी के क्रय केंद्र ने अनाज माफिया तक पहुंचाई। जिला खाद्य विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय ने बताया कि करीब 158 क्रय केंद्र संचालित थे, जिन पर सप्लाई हुए बोरों की सूचना मांगी है। खरीद के सापेक्ष प्रयोग किए गए बोरों की जांच कराई जा रही है।
किसानों को भी गोरखधंधे में किया शामिल
गेहूं खरीद में ई-पॉप मशीन पर किसान का अंगूठा लगाने के बाद ही खरीद ऑनलाइन दर्ज होती है, जिससे अनाज माफिया ने कुछ ऐसे किसानों को नेटवर्क में शामिल किया है, जो माफिया के कहने पर अंगूठा लगाने को तैयार रहते हैं। भुगतान मिलने पर किसान के खाते से रकम निकलवा लेते हैं। ऐसे किसानों को कुछ पैसे देकर मैनेज किया जाता है। मंडी में पकड़ा गया गेहूं अभी आनलाइन खरीद में चढ़ नहीं पाया था, जिससे पकड़ा गया।
राजापुर मंडी में पहले भी पकड़े जा चुके ऐसे मामले
मंडी समिति राजापुर में करीब तीन साल पहले गेहूं खरीद के दौरान करीब 1400 क्विंटल सरकारी बोरों में भरा गेहूं पकड़ा गया था। तब भी किसी क्रय केंद्र प्रभारी और आढ़तिये ने गेहूं को स्वीकार नहीं किया था। बरामद गेहूं में प्रयोग किए सरकारी पीपी बोरों की जानकारी जुटाई जा रही है। सभी एजेंसियों से उनके क्रय केंद्र वार बोरा सप्लाई का ब्योरा मांगा गया है। इसके बाद ही क्लू मिल सकेगा। पूरे मामले की विस्तृत जांच पुलिस कर रही है। - लालमणि पांडेय, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
