Lakhimpur Kheri :जिला पंचायत के चुनाव में भाजपा पर भारी पड़ी गुटबाजी, निर्दलीय मार ले गए बाजी

𝐤𝐮𝐬𝐡𝐚𝐥 𝐕𝐞𝐫𝐦𝐚


लखीमपुर खीरी। जिला पंचायत चुनाव में भाजपा नेताओं की गुटबाजी पार्टी पर भारी पड़ी। 

बागियों ने भी पार्टी का कम नुकसान नहीं किया। चुनाव से महज एक दिन पहले 18 अप्रैल को पार्टी की तरफ से जिला पंचायत सदस्य पद के 44 बागी उम्मीदवारों को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया। इसका असर भी ठीक नहीं रहा।
जिन सीटों पर भाजपा की आंतरिक कलह सामने आई, उनमें पार्टी का प्रदर्शन लगभग शून्य ही रहा। पलिया, मितौली, गोला और नकहा ब्लॉकों में पार्टी के नेताओं की अदावत खुलकर सामने आई थी, जिसका पार्टी को नुकसान भी पहुंचा। पलिया क्षेत्र के संपूर्णानगर में 9 मार्च को खीरी उपनिवेशन संघ के चुनाव में पार्टी के ही दो पक्ष भिड़ गए थे, जिसमें एक पक्ष भाजपा जिलाध्यक्ष का था और दूसरे पक्ष की तरफ से खीरी से सांसद अजय मिश्र टेनी के रिश्तेदार। मामला लखनऊ तक भी पहुंचा था और पार्टी की गुटबाजी सड़क पर आ गई थी। इसका सीधा असर जिला पंचायत पर दिखा। पलिया ब्लॉक की पांच सीटों में भाजपा को सिर्फ एक ही सीट मिल सकी। पलिया प्रथम और द्वितीय से दो बागी उम्मीदवार भी मैदान में थे। लिहाजा भाजपा को सिर्फ पलिया प्रथम की शहरी सीट ही मिल सकी। जबकि, चार अन्य सीटें ग्रामीण और सिख बाहुल्य क्षेत्र की थीं, जिसमें तीन नए कृषि कानूनों के विरोध का भी असर दिखा और चार में दो सीटें सपा, एक बसपा और एक निर्दलीय के खाते में गई।

इसी तरह 31 मार्च को गोला में भी भाजपा की गुटबाजी सामने आई थी। 31 मार्च को नगर पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल के खिलाफ कई पालिका सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था। 

उस वक्त मीनाक्षी अग्रवाल ने विधायक अरविंद गिरी पर यह आरोप लगाया था कि इस्तीफा देने वाले सदस्य उनके गुट के थे और सांसद अजय मिश्र टेनी की पक्ष में होने की वजह से विधायक अरविंद गिरी उनका विरोध कर रहे थे। टकराव का नतीजा यह रहा कि जिला पंचायत के चुनाव में कुंभी गोला ब्लॉक की पांच सीटों में एक भी भाजपा के खाते में नहीं गई।
8 अप्रैल को मितौली प्रथम एवं चतुर्थ से कस्ता से भाजपा विधायक सौरभ सिंह सोनू की मां दमयंती किशोर और भाई गौरव सिंह ने भी भाजपा के घोषित प्रत्याशी के खिलाफ पर्चा दाखिल किया था, हालांकि बाद में 11 अप्रैल को उन्होंने पार्टी की सख्ती पर पर्चा वापस ले लिया था। तब भाजपा विधायक ने कहा था कि पार्टी ने जिसे प्रत्याशी बनाया है वह सपा का कार्यकर्ता रहा है और पूर्व विधायक का करीबी भी है। यहां विवाद का असर रहा कि मितौली ब्लॉक की पांच में से सिर्फ 2 सीटें ही भाजपा के खाते में आईं, जबकि तीन सपा के खाते में गईं। यहां गौर करने वाली बात यह है कि निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष के पति नरेंद्र सिंह ने अनुसूचित जाति की सीट होने की वजह से मितौली द्वितीय से ओम प्रकाश भार्गव को लड़ाया, जो जीते हैं।
वहीं, 11 अप्रैल को नकहा में भी सदर विधायक योगेश वर्मा और भाजपा से जुड़े पवन गुप्ता ब्लॉक प्रमुखी की दावेदारी को लेकर आपस में भिड़ गए थे। हालांकि, यह भिड़ंत बीडीसी प्रत्याशी को लेकर थी। लेकिन, उसका असर जिला पंचायत के चुनावों में भी साफ दिखा। नकहा ब्लॉक में भी भाजपा को कोई सीट नहीं मिली।

सांसद रेखा वर्मा के क्षेत्र में तीन बागी जीते

पसगवां ब्लॉक धौरहरा सांसद और वर्तमान में भाजपा उपाध्यक्ष रेखा वर्मा का क्षेत्र है। रेखा वर्मा इसी ब्लॉक के गांव मकसूदपुर की निवासी हैं। बावजूद इसके ब्लॉक की छह सीटों में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली। जबकि, यहां से भाजपा के तीन-तीन बागी उम्मीदवार जीत गए। एक सपा के खाते में गई और बाकी दो निर्दलीय के खाते में। मैगलगंज भाजपा मंडल अध्यक्ष श्याम किशोर तिवारी कहते हैं कि भाजपा ने समर्थन की घोषणा देर से की, जिसकी वजह से प्रत्याशी मजबूती से चुनाव नही लड़ सके और जो प्रत्याशी तैयारी कर रहे थे, उन्हें पार्टी ने समर्थन नही दिया। इससे वह पार्टी से विद्रोह करके चुनाव लड़े, जिसका पार्टी को नुकसान हुआ। यही हाल, फूलबेड़, बेहजम, लखीमपुर, ईसानगर, धौरहरा और रमियाबेहड़ ब्लॉकों का भी रहा, जहां भाजपा का खाता तक न खुल सका।
बागियों को नहीं मना पाए, इसलिये हारे.. पर अध्यक्ष हमारा होगा
भाजपा उपाध्यक्ष कुलभूषण सिंह का दावा है कि भले ही वो 72 में सिर्फ पांच सीटें जीते हों, लेकिन अध्यक्ष उनका ही बनेगा। जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में कमजोर प्रदर्शन को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि वह भाजपा के बागियों को नहीं मना पाए, उनको पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखाया, पर वह नहीं माने और चुनाव लड़ा। जिला भाजपा उपाध्यक्ष की दलील है कि, आखिर बागी ही उनके परिवार के हैं। टिकट न मिलने पर नाराज थे और अब जीत गए हैं, तो वापस पार्टी में लाने के लिये मना लेंगे। साथ ही उन्होंने कई निर्दलीय सदस्यों के भी संपर्क में होने का दावा किया।
निर्दलीयों को अपना बनाने की होड़
उधर सपा और बसपा समेत कांग्रेस भी निर्दलीय सदस्यों को अपना बताने में जुटी है। सपा के जहां 14 उम्मीदवार जीते हैं, वह 24 उम्मीदवारों को अपना बता रही है। जबकि, बसपा भी निर्दलीय उम्मीदवारों को पार्टी से जुड़ा बताते हैं। दोनों पार्टियां दावा कर रही हैं, कि निर्दलीय भी उनके संपर्क में हैं।
हम हारे जरूर हैं, लेकिन अभी पार्टी की अंदरूनी समीक्षा चल रही है। पार्टी के अंदर कोई समस्या नहीं है। हार जीत के कारणों पर हमारी समीक्षा चल रही है। समीक्षा के बाद ही इस विषय पर मीडिया को जानकारी दी जाएगी - शेष नारायण मिश्रा, क्षेत्रीय अध्यक्ष अवध प्रांत

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