2020 में विदेशी टिड्डी दल ने इसी मौसम में किया था हमला
लखीमपुर खीरी। बारिश के मौसम से पहले ही ताउते चक्रवात की वजह से हुई बारिश से तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर शुरू हो गया है, जिससे गन्ने की फसल पर कीटों का प्रकोप होने की संभावना बढ़ गई है। गन्ना विभाग ने इन कीटों से फसलों बचाने के लिए एडवाइजरी जारी की है, साथ ही कीटों की जांच के लिए कृषि वैज्ञानिकों की ओर से स्थलीय जांच कराने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश भी दिए हैं।
पिछले वर्ष 2020 में विदेशी टिड्डी दल ने इसी मौसम में हमला किया था, लेकिन इस वर्ष ग्रास हॉपर, फॉल आर्मीवर्म, काला चिकटा और पायरिला कीटों का गन्ने की फसल पर प्रकोप हो सकता है। इसलिए किसानों को सतर्क करते हुए गन्ना विभाग ने एडवाइजरी के माध्यम से कहा है कि समय-समय पर फसल की जांच करते रहें और कीटों के दिखने पर तत्काल उनकी रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाएं। अन्यथा पूरी फसल प्रभावित हो सकती है।
गन्ना आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने अधीनस्थ जनपदों में स्थलीय निरीक्षण कराएं और कीटों की जांच गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिकों से कराकर रोकथाम की उचित व्यवस्था कराएं। किसानों को इन कीटों से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी देने के साथ ही प्राकृतिक तरीके से नियंत्रण पर जोर देने के निर्देश दिए गए हैं।
दवाओं के छिड़काव की दी जा रही सलाह
जिन क्षेत्रों में पायरिला कीट का प्रकोप अधिक है, वहां पर गन्ना शोध परिषद की संस्तुति से चीनी मिलों द्वारा पॉवर स्प्रेयर के माध्यम से कीटनाशी इमिडाक्लोप्रिड 150-200 मिली या प्रोफेनोफास 750 मिली को 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कराने के निर्देश दिए हैं। काला चिकटा अधिकतर पेड़ी में पाया जाता है, इसलिए इसमें भी इमिडाक्लोप्रिड या क्वीनॉलफास या डाइक्लोरवास का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
खेतों में अगर फॉल आर्मीवर्म कीट का प्रकोप है तो प्रभावित पौधों को नष्ट कर दें। जमीन की गुड़ाई करें और इस क्षेत्र का गन्ना बीज बुवाई के लिए प्रयोग में न लाएं। इस कीट के प्रभाव को आरंभिक चरण में नीम के तेल का प्रयोग कर अंडे देने की प्रक्रिया और लार्वा पोषण को रोका जा सकता है। इस कीट का प्रकोप होने पर क्लोरपाइरोफास एवं मोनोक्रोटोफास दवा का घोल बनाकर छिड़काव करें।
- ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी