शिक्षक परिवार की पीड़ा : इलाज के अभाव में कोरोना से पीड़ित शिक्षक आदेश प्रताप सिंह की 24 अप्रैल को हो गई थी मौत
लखीमपुर खीरी। जनपद के मोहम्मदी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कुइयां मदारपुर में कार्यरत शिक्षक आदेश प्रताप सिंह (43) त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के प्रशिक्षण के दौरान कोरोना संक्रमित हो गए थे, जिसके बाद इलाज के अभाव में 24 अप्रैल को एम्स ऋषिकेश के गेट के बाहर ही मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि एम्स के गेट के बाहर तैनात गार्ड ने एंबुलेंस को अंदर ही नहीं जाने दिया था।मूल रूप से बिजनौर के कस्बा झालोड़ निवासी शिक्षक आदेश प्रताप सिंह की नियुक्ति पांच वर्ष पूर्व 72 हजार शिक्षक भर्ती में हुई थी। तब से वह मोहम्मदी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कुइयां मदारपुर में कार्यरत थे। पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगने के कारण शिक्षक आदेश ने पोलिंग पार्टियों का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया था, जिसमें उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद शिक्षक 17 मार्च को अपने अधिकारी को सूचना देकर अपने घर बिजनौर चले गए थे। तबीयत खराब होने पर परिजनों ने 20 अप्रैल को बिजनौर के एक अस्पताल में शिक्षक का कोरोना टेस्ट कराया, जिसमें एंटीजन रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 24 अप्रैल को आरटीपीसीआर रिपोर्ट भी पॉजिटिव आ गई।
इस बीच शिक्षक की हालत ज्यादा बिगड़ने पर परिवार वाले 23 अप्रैल को शिक्षक को लेकर एम्स ऋषिकेश पहुंचे। परिजन का आरोप है कि वहां पर गार्ड ने एंबुलेंस को एम्स के अंदर ही जाने नहीं दिया। प्रशासन से मदद भी मांगी, लेकिन सभी ने निराश किया। इलाज के अभाव में 24 अप्रैल को आदेश की मौत हो गई।
मृतक के भाई अमित कुमार ने प्रशासन पर लापरवाही करने का आरोप लगाया है और बताया कि यदि समय पर इलाज मिल जाता, तो शायद भाई की जान बच जाती। मृतक शिक्षक अपने पीछे दो बेटे, एक पुत्री और पत्नी छोड़ गए हैं। बच्चों की परवरिश की पत्नी कुसुमलता के कंधों पर आ गई है। उन्होंने बताया कि अभी विभाग या प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं मिली है। अब वह पति के बकाया देयकों व अनुकंपा आधार पर नौकरी के लिए आवेदन करेंगी।