खाद्यान्न- मूल्य
रिफाइंड-165
सरसों का तेल- 170
वनस्पति घी- 150
आटा -25
चना दाल- 80
अरहर दाल- 110
मैदा-28
चीनी-39
सब्जी की जगह चटनी रोटी खा रहे हैं
इमली चौराहा निवासी कल्लू बताते हैं कि कर्फ्यू से पहले कचहरी के सामने पानी के पाउच बेचते थे। दिन भर में दो से तीन सौ रुपये की कमाई हो जाती थी। मगर, कर्फ्यू के कारण खरबूजा और तरबूज बेच रहे हैं। दोपहर तक करीब दो सौ का माल बेचकर 30 रुपये की कमाई हुई है। शाम तक सौ रुपये होना मुश्किल है। पांच लोगों का परिवार है। महंगाई के कारण सब्जी की जगह चटनी रोटी खा रहे हैं।
सब्जी में रसा बढ़ाकर खाते हैं रोटी
शहर में 20 किलोमीटर दूर गांव डिंगरा से रिक्शा चलाने के लिए आने वाले राम सिंह का कहना है कि कर्फ्यू से पहले तीन सौ रुपये तक का काम हो जाता था। मगर, अब बमुश्किल 150 रुपये ही मिल पाते हैं। 50 रुपये किराया निकल जाता है। घर में पांच लोग है। महंगाई के चलते घर का खर्च चलाना मुश्किल है। दोपहर का खाना लाना बंद कर दिया। समाजसेवी देते हैं तो खा लेता हूं। सब्जी में रसा बढ़ाकर रोटी खा रहे हैं।
महिलाएं बोलीं, गड़बड़ाने
लगा है रसोई का बजट
पंजाबी कॉलोनी निवासी मनप्रीत कौर बताती हैं कि पिछले कुछ दिनों से बेतहाशा महंगाई बढ़ी है। सरसों का तेल से लेकर दाल की कीमत आसमान पर हैं। बढ़ती महंगाई से रसोई का बजट गड़बड़ाने लगा है। इससे थाली सूनी होने लगी है।
नौरंगाबाद निवासी सबिता गुप्ता का कहना है कि महंगाई ने तो रिकार्ड ही तोड़ दिया। बाजार में हर चीज महंगी है। खाद्य सामग्री के रेट काफी बढ़ गए हैं। बढ़ी कीमतों के कारण थाली की रौनक कम होने लगी है। सरकार को इस पर अंकुुश लगाना चाहिए।