Lakhimpur Kheri : जिस परिवार के लिए कराया था तबादला वही रह गया बेसहारा

𝐤𝐮𝐬𝐡𝐚𝐥 𝐕𝐞𝐫𝐦𝐚

जनवरी में पीलीभीत से बरेली तैनाती कराने में कामयाब हुए थे शिक्षक आलिम


पंचायत चुनाव की ड्यूटी में कोरोना संक्रमित होने के बाद चली गई जान बरेली। बहेड़ी के आलिम बतौर शिक्षक पीलीभीत में तैनात थे। जनवरी में ही उन्होंने बुजुर्ग मां और बीमार बेटे के इलाज के लिए बरेली तबादला कराया लेकिन पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण के शिकार हो गए। लखनऊ तक इलाज कराया लेकिन फिर भी 26 अप्रैल को उनकी जान चली गई। तीन बच्चों के साथ बीमार सास की भी देखभाल की जिम्मेदारी अब उनकी पत्नी संभाल रही हैं।
आलिम के भाई मोहम्मद आरिफ के मुताबिक आलिम घर में अकेले कमाने वाले थे। बुजुर्ग मां के साथ बेटे की भी तबीयत ठीक नहीं रहती थी, इसी कारण काफी मशक्कत कर जनवरी में ही पीलीभीत से बरेली तबादला कराया था। अभी उन्हें स्कूल भी आवंटित नहीं हो पाया था लिहाजा बीएसए ऑफिस में ही ड्यूटी कर रहे थे। पंचायत चुनाव में आलिम की ड्यूटी बहेड़ी के नौगवां गांव में लगी। ड्यूटी कर जब शाम को लौटे तो उन्हें तेज खांसी थी। बाद में बुखार भी चढ़ गया तो बहेड़ी के ही एक क्लिनिक से दवा ले ली। दो दिन तक कोई आराम नहीं मिला। खांसी तेज होती जा रही थी। लखनऊ के एक निजी अस्पताल में जांच कराई तो संक्रमित पाए गए। होम आइसोलेशन में ही उनका इलाज शुरू हुआ।

आरिफ ने बताया कि आलिम की खांसी बंद नहीं हुई। बहेड़ी के एक अस्पताल में एक्सरे कराया तो पता चला कि उन्हें निमोनिया हो गया है। ऑक्सीजन स्तर भी तेजी से गिरने लगा। 25 अप्रैल की रात ऑक्सीजन स्तर 71 रह गया तो वह उन्हें बहेड़ी के ही एक अस्पताल में भर्ती कराने ले गए। पहले तो वहां बेड नहीं मिला लेकिन काफी मिन्नत की तो अस्पताल में उन्हें भर्ती कर ऑक्सीजन लगा दी गई। इसके बाद भी उन्हें आराम नहीं आया और ऑक्सीजन स्तर ऊपर-नीचे होने लगा। 26 अप्रैल को तबीयत और बिगड़ी तो डॉक्टरों ने किसी हायर सेंटर ले जाकर वेंटिलेटर दिलाने को कहा। वे लोग उन्हें हायर सेंटर ले जाने के लिए निकले लेकिन रास्ते में ही आलिम ने दम तोड़ दिया।
आलिम के परिवार में उनकी पत्नी रिजवाना बेगम, हाईस्कूल और आठवीं में पढ़ रहे बेटे मिनहाल और मेहरान के अलावा चौथी में पढ़ रही बेटी रायमा फातिमा है। इसके अलावा 88 वर्षीय बीमार मां हलीमा बेगम भी आलिम के साथ रहती थीं। आलिम की मृत्यु से पूरा परिवार बेसहारा हो गया है।

आलिम के न रहने से सदमे में है परिवार

आलिम की बुजुर्ग मां को उनके निधन से गहरा सदमा लगा है। आरिफ ने बताया कि उनकी तबीयत और भी बिगड़ गई है। बड़े बेटे का भी मुरादाबाद में इलाज चल रहा है। परिवार के सामने बड़ा संकट है कि अब यह सब कैसे होगा। भाई आरिफ का कहना है कि अब सरकार से ही भरोसा रह गया है कि परिवार को संभाले। आलिम की पत्नी को मृतक आश्रित कोटे में नौकरी मिले ताकि बच्चों का भविष्य खराब न हो।

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