Lakhimpur Kheri : एंबुलेंस के रेट तय पर नहीं रुक रही मनमानी, निजी वाहन भी दौड़ रहे एंबुलेंस बनकर

𝐤𝐮𝐬𝐡𝐚𝐥 𝐕𝐞𝐫𝐦𝐚
लखीमपुर खीरी। एंबुलेंस चालकों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए भले ही जिला प्रशासन ने किराया निर्धारित कर दिया है, लेकिन तीमारदारों का शोषण जारी है। कुछ एंबुलेंस चालक अब भी आपदा में अवसर तलाश कर तीमारदारों का दोहन कर रहे हैं। उधर, ग्रामीण क्षेत्र के चालक अपने वाहन का एंबुलेंस के रूप में उपयोग कर शर्तों के साथ मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच एंबुलेंस चालकों की मनमानी रोकने के लिए जिला प्रशासन ने नौ मई को एंबुलेंस चालकों के रेट तय कर दिये थे, जिसके तहत ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस के लिए पहले 10 किलोमीटर के लिये 1250 और उसके बाद प्रति किलोमीटर 22 रुपये की दर निर्धारित की गई थी, बावजूद इसके कुछ अस्पताल और निजी एंबुलेंस अभी भी मनमाने दाम वसूल रहे हैं। न तो जारी रेट लिस्ट वाहन पर चस्पा की है और न ही जिला प्रशासन की ओर से निर्धारित रेट मान रहे हैं। इसका खुलासा बुधवार उस समय हुआ, जब अमर उजाला के संवाददाता ने तीमारदार बनकर एंबुलेंस चालकों से मरीज ले जाने के लिए बात की।

शर्तों के साथ एंबुलेंस बनकर दौड़ रहे निजी वाहन
ग्रामीण क्षेत्र से जिला मुख्यालय और फिर यहां से लखनऊ ले जाने वाले निजी चार पहिया वाहन भी एंबुलेंस बनकर दौड़ रहे हैं। इनके चालक भी तीमारदारों से मनमाने दाम वसूल कर टोल टैक्स तक वहन कराते हैं। मरीज ले जाने के लिए तीमारदार से शर्त रख जाती है कि चेकिंग के दौरान बताना होगा कि वाहन किराए पर लेकर नहीं आए हैं। इसके साथ साथ रास्ते में यदि किसी प्रकार का जुर्माना लगा तो उसे भी तीमारदार को वहन करना होगा।
निर्धारित किराया
1.ऑक्सीजन रहित एंबुलेंस- 10 किलोमीटर तक 800 रुपये और उसके बाद 20 रुपये प्रति किलोमीटर।
2. ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस- 10 किलोमीटर तक 1250 रुपए और उसके पश्चात 22 रुपये प्रति किलोमीटर।
3. वेंटिलेटर सपोर्ट एवं बाई पैप युक्त एंबुलेंस- 10 किलोमीटर तक 2200 रुपए और उसके पश्चात 40 रुपये प्रति किलोमीटर किराया।
सीओ बोले, नहीं आई शिकायत, एआरटीओ प्रवर्तन का नंबर बंद
एंबुलेंस चालक यदि मनमाने पैसे मांगते हैं तो पीड़ित पुलिस हेल्प लाइन नंबर-112, डीएम कैंप कार्यालय- 05872- 252715, सीओ सिटी अरविंद कुमार वर्मा- 9454401484, एआरटीओ प्रवर्तन रमेश कुमार चौबे- 8005441025 से शिकायत कर सकते हैं। मामले में सीओ सिटी का कहना है कि अब तक कोई ऐसी शिकायत नहीं मिली है, जबकि एआरटीओ प्रवर्तन रमेश कुमार चौबे का नंबर बंद है।

केस- एक
समय-11 बजे
स्थान- जिला अस्पताल
मरीज को लखनऊ मेडिकल कॉलेज ले जाने के लिए एंबुलेंस चालक ने चार हजार रुपये मांगे। साथ ही सिलिंडर की व्यवस्था स्वयं करने को कहा। ऑक्सीजन की व्यवस्था हम कहां से करें। इस पर एक हजार रुपये सिलिंडर के और टोल टैक्स अलग से देने को कहा।

केस- दो
समय-11:30 बजे
स्थान- महिला अस्पताल
जिला अस्पताल से बिजुआ तक मरीज ले जाने के लिए एंबुलेंस चालक ने तीन हजार रुपये मांगे। इस पर जब सरकार से रेट निर्धारित करने की बात कही तो चालक बोला कि डीजल का रेट देखा। तुम्हें तो जाना है हमें वापस भी आना है। कोई और देख लो।

केस- तीन
समय-दोपहर 2 बजे
स्थान- पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस
बाहर टैक्सी स्टैंड से मरीज को लखनऊ ले चलने पर बात करने पर एक ड्राइवर ने 800 रुपये दिहाड़ी और 10 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से डीजल देना होगा। साथ ही टोल टैक्स भी वहन करना होगा।

केस-चार
समय- दोपहर ढाई बजे
स्थान- रेलवे स्टेशन
बाहर खड़े एक ड्राइवर ने मरीज लखनऊ ले जाने के लिए छोटी टैक्सी का किराया एक हजार और इनोवा आदि का भाड़ा 1400 रुपये बताया। साथ ही दस रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से डीजल चार्ज के साथ रास्ते टोल टैक्स देने बताया।

केस पांच
सरकारी रेट 2350, मांगे 4,000
पौने तीन बजे जब एक साथी ने भीरा के एक निजी अस्पताल की एंबुलेंस को फोन किया तो वहां से, मरीज को लखीमपुर लाने के लिए 4000 रुपये मांगे, जबकि शासन द्वारा निर्धारित ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस का किराया 2350 रुपये होना चाहिये। भीरा से लखीमपुर खी दूरी 60 किलोमीटर है, इस तरह ऑक्सीजन युक्त ऐंबुलेंस का किराया पहले 10 किलोमीटर तक 1250, फिर शेष 50 किलोमीटर के लिये 22 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से 1100 रुपये हुआ। इस तरह 60 किलोमीटर की दूरी के लिये ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस के लिये कुल 2350 रुपये हुए, लेकिन अस्पताल ने चार हजार रुपये मांगे।

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