कारोबारी बोले, एक माह के अंतराल में प्रति लीटर 20 रुपये तक बढ़े दाम
गोला गोकर्णनाथ। खाने का स्वाद खाद्य तेलों पर ही टिका होता है। कारोबारी बताते हैं कि पिछले वर्ष के लॉकडाउन की अपेक्षा इस वर्ष खाद्य तेलों का मूल्य दोगुना हो गया है। अप्रैल से मई के बीच सरसों और रिफाइंड के दामों में प्रति लीटर 20 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। खाद्य तेलों के बढ़ते दामों से रसोई का बजट गड़बड़ा गया है।
रेट में अंतर-
पिछले वर्ष लॉकडाउन में सरसों का तेल 90 से 100 रुपये प्रति लीटर था जो अब 170 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। रिफाइंड का मूल्य पिछले वर्ष 90-95 से बढ़कर 160-165 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। सरसों तेल, रिफाइंड और वनस्पति घी के मूल्य में अप्रैल से मई के बीच करीब 20 से 25 रुपया प्रति लीटर वृद्धि हो गई है।
मलेशिया से भारत के रिश्ते खराब
होने का असर खाद्य तेलों पर पड़ा
भारत के मलेशिया से व्यापारिक रिश्ते बिगड़ने से भारत ने पाम आयल खरीदना बंद कर दिया, जिससे भारत में तेल की कमी होती रही और अन्य देशों से जो तेल आया वह महंगा मिला। उधर. देश में सरसों का उत्पादन भी घटा है, उसमें भी नेपाल के रास्ते सरसों की विदेशों को तस्करी भी होती है, उसका भी असर खाद्य तेलों की मूल्य वृद्धि का एक बड़ा कारण है।
- शिवगोपाल गुप्ता, पूर्व महामंत्री, नगर उद्योग व्यापार मंडल, गोला
रोजाना खाने कमाने वाले परिवार मुश्किल में---
खाद्य तेल और खाद्य पदार्थों पर महंगाई से रोजाना खाने कमाने वाले लोगों को परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। आम नागरिक की जीविका प्रभावित न हो इसके लिए सरकार को खाद्य पदार्थों और तेलों पर नियंत्रण रखना चाहिए।
- अनिल शुक्ला, ई रिक्शा चालक, गुप्ता कॉलोनी
तेल और रिफाइंड की कीमतों में पिछले साल से इस वर्ष की तुलना में करीब दोगुने का अंतर आ गया है। गृहणियों का रसोई बजट गड़बड़ा गया है।
- ममता अग्निहोत्री, गृहणी, कुम्हारन टोला, गोला
रसोई के सामानों में भी तेल, रिफाइंड की कीमतों में जितनी आग इस समय लगी हुई है उससे गृहस्थी चलाना बहुत मुश्किल होता जा रहा है। सोचना पड़ता है घर में क्या बनाएं, क्या न बनाएं।
- अलका गुप्ता, गृहणी, सर्वोदय नगर, गोला
कुछ समय में तेल के भाव में दोगुने हो जाने से मध्यम वर्ग की कमर टूट गई है। रसोई के सामानों में इतनी महंगाई होना हम लोगों की बर्दाश्त के बाहर है।
- त्रिभ्या गुप्ता, गृहणी, गोला।