लखीमपुर डिपो में 67 बसें और 136 परिचालक हैं। इनके सापेक्ष 115 टिकट मशीनें हैं। इनमें 41 मशीनें बीते छह महीने से लखनऊ स्थित सर्विस सेंटर पर सही होने के लिए गई हुईं हैं। इस दौरान और 38 मशीनों ने भी काम करना बंद कर दिया है। सिर्फ 35 मशीनों से ठोक पीटकर काम लिया जा रहा है। यही कारण है कि परिचालकों को मैनुअल टिकट बनाने पड़ रहे हैं।
मैनुअल टिकट में दूरी के हिसाब से अलग-अलग मूल्य के टिकट यात्रियों को देने पड़ते हैं। ऐसे में परिचालकों को मूल्य को लेकर बार-बार टिकट की गड्डी पलटनी पड़ती है। इस तरह टिकट बनाना यात्रियों और परिचालकों के बीच विवाद का कारण बनता है। वहीं रोडवेज को राजस्व क्षति भी हो रही है, क्योंकि हाथ से टिकट बनाकर यात्रियों की संख्या बेविल पर इंट्री करने में समय लगता है। ऐसे में परिचालक कम दूरी के यात्रियों को बस में बैठने से मना कर रास्ते में बैठाते तक नहीं हैं।
लखीमपुर डिपो
बसों की संख्या- 67
परिचालक-136
टिकट मशीनें- 115
खराब पड़ी- 79
गोला : यहां भी मशीनों का हाल खराब
गोला गोकर्णनाथ। रोडवेज बस अड्डे को 158 इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीनें मिली थीं, जिसमें से 30 मशीनें पूरी तरह से कंडम हो चुकी हैं। 68 मशीनें ठीक करने के लिए लखनऊ भेजी जा चुकी हैं। शेष 60 मशीनें भी ठोंक पीटकर चलाई जा रही हैं।
यहां बता दें कि गोला बस अड्डे में निगम की 74 और 38 अनुबंधित बसें हैं। इनके संचालन में छह नियमित और 175 संविदा परिचालक लगे हैं। टिकट मशीनें खराब होने के कारण परिचालकों को पहले की तरह हाथ से बनाकर देने वाले वाले टिकट मुहैया कराए जा रहे हैं। जो परिचालकों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। कई बार टिकट बनाने को लेकर यात्रियों और परिचालकों में विवाद तक की नौबत बन रही हैं। संवाद
2018 से ही खराब है स्थिति
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीनों के लिए 2013 में ट्राइमेक्स कंपनी से अनुबंध किया था, जो जून 2018 में समाप्त हो गया। उसके बाद अनुबंध को लेकर न तो टेंडर हुआ और न ही नवीनीकरण। इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से टिकट देना परिचालकों के लिए काफी सुगम और आसान हो गया। मगर, अब मशीनें खराब होने से परिचालकों की मुसीबतें बढ़ रही है।
डिपो में काफी मशीनें खराब हैं, जो हैं वह भी ढंग से काम नहीं करतीं। मैनुअल टिकट बनाने में एक तो समय अधिक लगता है। दूसरा मूल्य अनुसार टिकट भी बदल-बदलकर देने पड़ते हैं, जबकि मशीन में इस तरह का कोई झंझट नहीं। मशीनों के खराब होने से डिपो की आय भी प्रभावित हो रही है।
- कमलेश कुमार वर्मा, अध्यक्ष, रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद शाखा लखीमपुर डिपो
रोडवेज के अन्य परिक्षेत्रों में टिकट मशीनें आ गई हैं, लेकिन टेंडर न होने से हरदोई क्षेत्र में अभी मशीनें नहीं आई हैं। जो मशीनें थीं, वह भी खराब हो चुकी हैं। हाथ से टिकट बनाने में समय अधिक लगता है। लोकल सवारी लेने में भी दिक्कत आ रही है। टिकट बनाकर दें, वेबिल पर एंट्री करने में कभी-कभी विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है। आय भी प्रभावित हो रही है।
- अभिषेक शुक्ला लंकेश, संविदा परिचालक एवं प्रांतीय मंत्री रोडवेज संविदा कर्मचारी संघ