रेलवे की जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला उछलने के बाद डीआरएम इंजीनियरिंग लखनऊ ने सहायक मंडल अभियंता मैलानी को पत्र देकर गाटा संख्या 650, 651, 652, 653 की पैमाइश कर उसे चिन्हांकन कराने के लिए पत्र लिखा था, जिस पर डीएम के निर्देश के बाद एसडीएम ने तहसीलदार विपिन कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में टीम गठित की।
राजस्व टीम बृहस्पतिवार को पैमाइश के लिए पहुंची थी, इसके बाद कई व्यापारी और चेयरमैन थाने पहुंच गए। व्यापारियों का कहना था कि जिस भूमि को रेलवे अपनी बता रहा है, उस पर वे लोग करीब 60-70 वर्षों से काबिज हैं। नगर पंचायत को टैक्स भी अदा करते हैं। तहसीलदार ने कहा कि वह अभी सिर्फ पैमाइश कराकर चिन्हांकन कराने आए हैं। इस पर व्यापारियों ने कहा कि वे भूमि संबंधी अपने साक्ष्य देना चाहते हैं, इसके लिए उन्हें समय चाहिए। तहसीलदार ने सबकी सहमति से पैमाइश के लिए एक हफ्ते का समय दे दिया। इस तरह भूमि की पैमाइश फिलहाल टल गई है। राजस्व टीम में तहसीलदार के अलावा कानूनगो विजय श्रीवास्तव, लेखपाल देवेंद्र सिंह, मनोज वर्मा शामिल थे। रेलवे की ओर से सहायक मंडल अभियंता लाल बहादुर, आईओडब्ल्यू नीरज मौजूद रहे
कुछ व्यापारी आए थे। भूमि संबंधी कागज देने की बात कही है। इसलिए उन्हें एक हफ्ते का समय दिया गया है। एक हफ्ते के बाद पैमाइश की तिथि निर्धारित की जायेगी। हालांकि अभी रिपोर्ट नहीं मिली है। फोन पर तहसीलदार से इस बाबत बात हुई है।
- अखिलेश यादव, एसडीएम गोला
एसडीएम के निर्देश पर गठित राजस्व विभाग की टीम गाटा संख्या 650, 651, 652, 653 की पैमाइश के लिए आई थी। व्यापारी भूमि से संबंधित कुछ साक्ष्य चाहते थे। लिहाजा उनके अनुरोध को स्वीकार कर एक हफ्ते का समय दिया है।
पांच साल पहले भी उठा था मामला
मैलानी। इस भूमि की पैमाइश को लेकर रेलवे ने पांच साल पहले वर्ष 2016 में भी जिला प्रशासन से पत्राचार किया था। उस समय भी पैमाइश के लिए टीम आई थी, लेकिन व्यापारियों के विरोध और तत्कालीन विधायक विनय तिवारी के हस्तक्षेप से उस वक्त भूमि की पैमाइश नहीं हो सकी थी। पांच साल बाद रेलवे की जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला फिर से तूल पकड़ गया है। राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 651 बंजर मिल्कियत सरकार, 652 आबादी रेलवे मिल्कियत सरकार, 653 आबादी रेलवे मिल्कियत सरकार और गाटा संख्या 650 सड़क मिल्कियत सरकार के रूप में दर्ज है। संवाद