लखीमपुर खीरी। बारिश के मौसम में संक्रामक बीमारियां का खतरा बढ़ गया है, ऐसे में डायरिया ने भी पांव पसार लिए हैं। पिछले तीन दिन में ही नौ मासूम जिला अस्पताल में भर्ती हुए हैं, जिसमें अधिकतर की उम्र छह माह से दो साल तक है। स्थिति यह है कि अस्पताल में ओआरएस तक नहीं है।
पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश से भले ही तपिश कम हुई हो। मगर, उमस के कारण लोग चिपचिपी गर्मी से परेशान हैं। ऐसे में उमस वाली गर्मी बच्चों के लिए डायरिया का कारण बन रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में बैक्टीरिया अधिक सक्रिय होते हैं। इसलिए डायरिया का प्रकोप बढ़ जाता है।
जिला अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि रोजाना 10 से 15 डायरिया से पीड़ित बच्चे अस्पताल आ रहे हैं। डॉक्टर बताते हैं कि तीन तरह के वायरस से डायरिया फैलाता है। इसमें नोरो एवं रोटा-वायरस पांच साल से कम उम्र के बच्चों में और एडेनो वायरस हर उम्र के लोगों में डायरिया का कारण बन सकता है।
जिला अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में पिछले तीन दिन में नौ बच्चे डायरिया की चपेट में आने से भर्ती हुए। इसमें ईसानगर निवासी दुर्गेश कुमार ने पायल (नौ माह), फूलबेहड़ निवासी विनोद कुुमार ने विवेक (तीन साल), खीरी निवासी त्रिलोकी ने राखी (सात माह), फरधान निवासी शैलेष ने सार्थक (आठ माह), गोला के मुन्नूगंज निवासी एहसान अली ने इस्माइल (सात माह), देहरबाबा निवासी शफीक ने रोजी (दो माह), रमुआपुर निवासी रामदुलाने ने आयुष (चार माह), रामपुर गोकुल निवासी विनोद वर्मा ने ऋषि (पांच माह) एवं खमरिया निवासी प्रकाश ने ढाई साल की पुत्री लाली को भर्ती कराया हैं।
बच्चे आते हैं आसानी से चपेट में
पांच साल तक के बच्चे डायरिया की चपेट में सबसे ज्यादा आते हैं, क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। साफ-सफाई में असावधानी डायरिया का कारण बन जाती है। गंदे हाथों से छूने, डायपर बदलते समय सफाई पर ठीक से ध्यान न देने, बच्चों के गंदी चीजों को छूकर आंख, मुंह, नाक आदि छूने एवं मलने से संक्रमण होने की आशंका रहती है।
डायरिया के कारण
दूषित पानी पीने से, वायरल इंफेक्शन, पेट में बैक्टीरिया का संक्रमण, शरीर में पानी की कमी, घर एवं इसके आसपास ठीक से सफाई न होना, बाजार के कटे फल खाने से, पीने वाले पानी के कंटेनर की सफाई न होने पर दूषित पानी पीने से
लक्षण
दिन में तीन या इससे अधिक बार पतले दस्त, पेट में तेज दर्द, मरोड़, उल्टी आने के साथ बुखार आना एवं कमजोरी महसूस होना।
बारिश में बरतें सावधानी
डॉक्टरों का कहना है कि बरसात के मौसम में डायरिया की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। बारिश की वजह से नदी-नाले, ताल-तलैया सब उफान पर होते हैं। जगह-जगह जमी गंदगी तैरने लगती है। इससे पीने का पानी भी प्रदूषित हो जाता है। इससे डायरिया के विषाणु आसानी से संक्रमित कर सकते हैं। वहीं बारिश के मौसम में खाने-पीने की चीजों को अच्छी तरह धोकर ही उपयोग करें।
हाथ धोना भी है लाभकारी
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राम विलास बताते हैं कि स्वच्छता अपनाकर बच्चों को डायरिया से बचाया जा सकता है। माताएं हाथों को अच्छी तरह धोकर ही बच्चों को गोदी में लें। उन्होंने बताया कि अक्सर बाथरूम से आने, खेलने-कूदने के बाद एवं खाने से पहले बच्चे हाथ धोए बिना ही खाने पीने की चीजों का इस्तेमाल करते हैं। इससे डायरिया होने का खतरा रहता हैै। बच्चों में हाथ धोने की आदत डालें। इसके लिए एंटी बैक्टीरियल साबुन प्रयोग करें। साबुन में झाग उठने के बाद कम से कम 20 से 30 सेकेंड तक हाथों को धोएं। इसके बाद साफ एवं सूखे तौलिये से हाथ पोंछे।
जिला अस्पताल में ओआरएस का संकट
जिला अस्पताल में पिछले कई दिनों से ओआरएस का संकट है, जबकि बारिश के मौसम में डायरिया होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में डॉक्टर बच्चों से लेकर बड़ों तक को ओआरएस पीने पिलाने की सलाह देते हैं। ओआरएस का टोटा पड़ने से डॉक्टर पीड़ितों को नींबू, चीनी एवं नमक का घोल का प्रयोग करने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि ओआरएस घोल शरीर में एलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरा करता है।
बारिश के मौसम में बच्चों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। घर एवं बच्चों की साफ सफाई से लेकर खान पान पर विशेष ध्यान दें। दस्त अधिक आने पर बिना लापरवाही किए अस्पताल लाकर दिखाएं।
- डॉ. राजेश कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल
दवाओं से लेकर ओआरएस की सप्लाई लखनऊ स्थिति कारपोरेशन से होती है। इसके लिए डिमांड पत्र भेजा जा चुका है। एक दो दिन में ओआरएस पैकेट आने की उम्मीद है।
- डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल