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| पलिया चीनी मिल में धरने पर बैठे किसान। संवाद - फोटो : Lakhimpur Kheri |
पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। चीनी मिल के गन्ना मूल्य का भुगतान न करने से नाराज किसान शुक्रवार को पूरी रात धरने पर बैठे रहे। यह धरना शनिवार को भी जारी रहा। किसान तुरंत 50 करोड़ रुपये का भुगतान करने की मांग कर रहे हैं।
शुक्रवार को बकाया गन्ना भुगतान को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा और शाहजहांपुर जिलाध्यक्ष अमरजीत सिंह संधू के नेतृत्व में काफी संख्या में किसान चीनी मिल पहुंचे और धरना शुरू कर दिया। यूनिट हेड प्रदीप कुमार सालार ने किसानों से वार्ता की लेकिन किसानों को मनाने में वह कामयाब नहीं हुए। एसडीएम डॉ अमरेश कुमार व तहसीलदार आशीष कुमार सिंह भी पहुंचे और किसानों व मिल अधिकारियों अलग-अलग वार्ता की पर बात बन नहीं सकी। जिसपर किसान शुक्रवार रात में भी चीनी मिल के केन आफिस में धरने पर बैठे रहे।
धरना शनिवार को भी जारी रहा और दोपहर बाद सैकड़ों किसान धरनास्थल पर पहुंच गए। किसानों ने एक स्वर में मांग की कि जब तक गन्ने का भुगतान नहीं किया जाता है तब तक धरना जारी रहेगा। मिल अधिकारियों ने चीनी न बिकने की बात कही जिस पर भी किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे। देर शाम तक किसानों का धरना जारी था।
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धरने के दौरान मिल परिसर में शुरू कराया लंगर
पलियाकलां। चीनी मिल में धरना दे रहे किसानों के लिए वहीं लंगर शुरू किया गया है।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा का कहना है कि यदि धरने पर कोई भी बीमार होता है तो उसकी जिम्मेदारी मिल प्रशासन की होगी। जब तक भुगतान नहीं होगा किसान यहीं जमा रहेंगे और किसानों के लिए यहां पर लंगर भी बराबर चलता रहेगा। संवाद
क्या कहते हैं किसान
खेतों में फसलों को खाद पानी की जरूरत है लेकिन रकम नहीं है जो फसलों को बचा लें, मिल भुगतान में किसानों को परेशान कर रही है। -अजमेर सिंह
- घरेलू कार्यों समेत कई आवश्यकताएं रोजमर्रा की जिंदगी में हैं लेकिन धन नहीं है। गन्ना ही एक मात्र साधन है उसका भी भुगतान नहीं किया जा रहा है।
-सुरेंद्र सिंह
कृषि पर लिए गए ब्याज की रकम बढ़ती जा रही है किसान गन्ना भुगतान न होने से दोहरी मार झेल रहा है। बिना भुगतान अब किसान की हालत पतली हो गई है।
- गुरपेज सिंह गोपी नन्नर
बीमारी में इलाज तक के लिए अब रुपया नहीं रह गया है किसानों के पास, गन्ना भुगतान से आस थी लेकिन वह भी पूरी नहीं हो रही है। किसानों की सुनने वाला कोई नहीं है।
-गुरुप्रताप सिंह, किसान
