Lakhimpur Kheri : शर्मीली की निगरानी के लिए लगाए गए पांच जोड़ी कैमरे

𝐤𝐮𝐬𝐡𝐚𝐥 𝐕𝐞𝐫𝐦𝐚
लखीमपुर में छोड़ी गई बाधिन। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में लगे कैमरों से बाघिन पर रखी जाएगी कड़ी नजर


बांकेगंज (लखीमपुरी खीरी)। बरेली की बंद पड़ी रबर फैक्टरी से ट्रैंक्युलाइज कर शुक्रवार रात दुधवा के जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़ी गई बाघिन शर्मीली की अब कैमरों के जरिए निगरानी की जाएगी। वन विभाग ने इसके लिए जंगल में 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पांच जोड़ी कैमरे लगवाए हैं। इन कैमरों में कैद होने वाली तस्वीरों से बाघिन की सटीक लोकेशन का पता लगाया जा सकेगा।


बरेली की रबर फैक्टरी में पिछले सवा साल से प्रवास कर रही किशनपुर सेंक्चुरी की बाघिन को दुधवा, पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के अलावा डब्ल्यूटीआई के विशेषज्ञ डॉक्टरों और वन विभाग की टीम ने बृहस्पतिवार सुबह ट्रैंक्युलाइज किया था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) की अनुमित और फिट फॉर रिलीज मिलने के बाद शुक्रवार रात उसे दुधवा के जंगल में छोड़ा गया। जंगलों में बाघ/बाघिन अमूमन पांच से 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विचरण करते हैं। 

इसके मद्देनजर दुधवा के जंगल में छोड़ी गई शर्मीली की लोकेशन ट्रैस करने के लिए 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पांच जोड़ी कैमरे लगवाए गए हैं। प्रत्येक दो वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक-एक जोड़ी कैमरे लगाए गए हैं। जंगल के चिह्नित स्थलों पर लगाए इन कैमरों का समय-समय पर स्थान परिवर्तन भी किया जाएगा। कैमरों में कैद होने वाली तस्वीरों का वनाधिकारी और बॉयोलाजिस्ट बारीकी से अध्ययन करेंगे। आधुनिक शस्त्रों से लैस वन कर्मियों की टीमें पैदल गश्त में लगाई हैं। जंगल के दुर्गम स्थलों पर जालीदार ट्रैक्टरों के जरिए सघन पेट्रोलिंग कराई जा रही है। 


बरेली की बंद पड़ी रबर फैक्टरी में पिछले सवा साल से प्रवास कर रही किशनपुर सेंक्चुरी की बाघिन को शुक्रवार रात दुधवा के जंगल में छोड़ दिया गया। अब उसकी निगरानी के लिए जंगल के 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पांच जोड़ी कैमरे लगवाए गए हैं। समय-समय पर इन कैमरों का स्थान परिवर्तन भी किया जाएगा। - संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व।

गांव बेहड़ा में बाघ के पगचिह्न मिले

मितौली। थाना क्षेत्र के गांव बेहड़ा (काना खेड़ा) में रविवार की सुबह जब ग्रामीण अपने खेतों की ओर गए तो रास्ते में बाघ के पगचिह्न देखकर दहशत में आ गए। बाघ के पगचिह्न की बात सुनकर वहां ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा।
ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मी और वन दरोगा रामप्रसाद गौतम आदि ने मौके का निरीक्षण करते हुए बाघ के पगचिह्न होने की पुष्टि की और ग्रामीणों को खेतों में अकेले न जाने की सलाह दी। प्रधान राधेश्याम वर्मा समेत अन्य ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की टीम क्षेत्र में बिना कांबिंग किए ही चली गई, जबकि ग्रामीण बाघ की आशंका से दहशत में हैं। वहीं वन दरोगा रामप्रसाद गौतम का कहना है कि बाघ को ट्रैक किया जा रहा है। सराय नदी के किनारे बाघ के और भी पगचिह्न मिले हैं, जो जंगल की तरफ जाते हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बाघ वापस जंगल की तरफ जा रहा है। फिलहाल उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। संवाद

 

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