होम डिलीवरी का ऑप्शन भी रेस्टोरेंट संचालकों के कारोबार को नहीं दे पा रहा गति
कारोबारियों की मांग, जब बाजार और ढाबे खुल गए तो अब रेस्टोरेंट भी खोले जाएं
लखीमपुर खीरी। कोरोना कर्फ्यू में छूट मिलने के बाद बाजार पूरी तरह से खुल चुका है। मगर रेस्टोरेंट अब भी बंद हैं। संक्रमण के खौफ से होटलों के कमरे खाली पड़े हैं। कोरोना की मार से होटल और रेस्टोरेंट कारोबार अब तक बेहाल है। हालांकि रेस्टोरेंट संचालकों के पास होम डिलीवरी का ऑप्शन है, जो कारोबार को गति देने में नाकाफी है। इन हालातों में इन दोनों कारोबार को रोजाना 10 से 15 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए एक माह तक कर्फ्यू रहा। इससे जिले भर के होटल एवं रेस्टोरेंट कारोबारियों की आर्थिक स्थिति डगमगा गई। कर्फ्यू के कारण न तो सहालग में बुकिंग मिली, जो पहले से थी भी वह भी रद्द हो गई। अनलॉक होने के बावजूद खोलने की अनुमति न मिलने से रेस्टोरेंट कारोबार की हालत खस्ताहाल है।
कारोबारी बताते हैं कि पिछले साल भी कोरोना के कारण कारोबार चौपट हो गया था। हालांकि साल के अंत में कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन नुकसान की भरपाई तब भी नहीं हो पाई। इस बार होली के बाद फिर से संक्रमण की रफ्तार बढ़ने से काम ठप हो गया।
कहने को तो सरकार ने होम डिलीवरी की अनुमति दी हुई है, मगर इससे कारोबार का भला नहीं हो रहा। कारण, अब भी लोग बाहर से खाना मंगाने में परहेज कर रहे हैं। वहीं सरकार ने ढाबे खुलवा दिए हैं तो रेस्टोरेंट खोलने की भी अनुमति दे देनी चाहिए। इसके साथ ही बिजली बिल, जीएसटी आदि सहित अन्य करों में छूट मिले, ताकी कहीं तो कुछ राहत महसूस हो।
वर्चुअल बैठकों ने बढ़ाई मुसीबत
होटल कारोबारी व्यवसाय को रफ्तार न मिलने का कारण वर्चुअल बैठकों को भी मान रहे हैं। इनका कहना है कि कोरोना से पहले विभिन्न कंपनियों के लोग जिले में आकर व्यवसाय को लेकर बैैठकें करते थे। कोरोना के कारण अब सब बंद है। वर्चुअल बैठकें हो रही हैं। इससे लोगों का आना जाना ही नहीं हो रहा। वर्चुअल बैठकों ने भी होटल कारोबार को तगड़ी चोट दी है।
जब ढाबे खुल रहे हैं तो रेस्टोरेंट भी खुलने चाहिए। होम डिलीवरी के कभी कभार ही 15 से 20 आर्डर मिलते हैं, जबकि कारीगर, लेबर2 का खर्चा तो वही है। बिजली बिल, किराया भी देना है। आर्थिक स्थिति गड़बड़ा जाने से इनका भुगतान करने में दिक्कत हो रही है। सरकार से इसमें कुछ छूट मिलनी चाहिए। - जसपाल सिंह पाली, पंजाबी रसोई
पिछले साल से रेस्टोरेंट कारोबार पर कोरोना का ग्रहण लगा है। होम डिलीवरी की छूट है, जिससे भला नहीं होने वाला। रोजाना 10-15 आर्डर ही मिल रहे हैं। इससे रेस्टोरेंट का खर्च तक नहीं निकल पा रहा। सरकार को अब खोलने की अनुमति देने के साथ कर में रियायत देनी चाहिए। - कद्म रिषि नागर, शिवम रेस्टोरेंट
होम डिलीवरी में खर्च तो पहले जैसा ही है, लेकिन आमदनी नहीं। क्योंकि 10 से 12 आर्डर ही रोज मिलते हैं। इससे एक दिन का खर्च निकालना मुश्किल है। अब जब अनलॉक हो गया है और ढाबे खुल रहे हैं तो रेस्टोरेंट खोलने की परमीशन भी शासन का देनी चाहिए। - आशू गुप्ता, स्वाद रेस्टारेंट
कोरोना खौफ के कारण लोगों का आना-जाना बंद है। पहले विभिन्न कंपनियों के लोग जिले में आकर कारोबार की समीक्षा के लिए होटलों में रुकते थे। अब संक्रमण के खौफ के कारण वर्कफ्रॉम होम के तहत काम कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को टैक्स आदि में छूट देनी चाहिए। - विवेक कपूर, कंफर्ट इन