मायूसी : इस बार पर्यटन सत्र छह महीने तो पिछली बार केवल तीन महीने तीन दिन भी चला था
सैलानियों की संख्या घटने के साथ आमदनी भी उसी अनुपात में घटी बांकेगंज। कोरोना संक्रमण ने दुधवा टाइगर रिजर्व के पर्यटन को लगातार दूसरी बार प्रभावित किया। इस साल पर्यटन सत्र की शुरूआत भले ही 15 दिन पहले हो गई थी, लेकिन समापन कोरोना संक्रमण के चलते डेढ़ माह पहले करना पड़ा। ऐसे में न केवल सैलानियों की संख्या कम रही, बल्कि आमदनी भी उसी अनुपात में कम रही। खास यह है कि विदेशी सैलानियों की आमद भी न के बराबर रही।
दुधवा टाइगर रिजर्व का सत्र सात माह का होता है। 2020 में कोरोना संक्रमण के चलते पर्यटन सत्र को तीन माह 27 दिन पहले ही बंद करना पड़ गया था। यानी बीते साल सत्र केवल तीन माह तीन दिन ही चला था। 2021 में दुधवा टाइगर रिजर्व का पर्यटन सत्र निर्धारित समय से डेढ़ माह पहले एक मई को ही बंद कर दिया गया था। इस तरह इस बार पर्यटन सत्र करीब छह माह चला, लेकिन संक्रमण के भय से सैलानियों की आमद न के बराबर रही। विदेशी सैलानी तो इस बार लगभग नदारद ही रहे। अब 15 जून से पर्यटन सत्र बंद करने की विधिवत घोषणा भी हो चुकी है।
दुधवा टाइगर रिजर्व का पर्यटन सत्र शुरू होने से पहले पार्क प्रशासन वन निगम से सैलानियों के भ्रमण के लिए जीनॉन जिप्सियों को यहां मंगाता है। कोरोना संक्रमण के चलते इस साल पर्यटकों की कम संख्या और समय से पहले पर्यटन बंद होने से जिप्सियों को वापस भेजना पड़ा, जिससे वन निगम की आय में भी कमी आई है।
सैलानियों को बहुत भाता है दुधवा टाइगर रिजर्व
दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी, सठियाना, सलूकापुर और दुधवा नेशनल पार्क देशी और विदेशी सैलानियों का आकर्षण का केंद्र रहे हैं। हालांकि हर साल की तरह इस साल भी दुधवा और किशनपुर सेंक्चुरी में भ्रमण करने आने वाले सैलानियों को बाघों की साइटिंग के साथ ही अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के खूब दीदार हुए। जंगल में कुलाचे भरते हिरन, पाढ़ा और चीतलों ने सैलानियों का मन मोह लिया।कोरोना संक्रमण के चलते इस साल दुधवा टाइगर रिजर्व सैलानियों के लिए एक मई को ही बंद करना पड़ा था। बावजूद इसके पर्यटन से होने वाली आय सत्र 2020 की अपेक्षा बेहतर है। हालांकि इससे पहले के सत्रों की तुलना में यह कम ही है।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व